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Bhopal में आवारा कुत्तों का आतंक, सुप्रीम कोर्ट ने दिए आदेश – 8 हफ्तों में हटें सड़कों से आवारा डॉग

भोपाल के जेपी अस्पताल में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है, जहां रात में निकलना खतरे से खाली नहीं। वन इंडिया के ग्राउंड रिपोर्टर एलएन मालवीय ने अस्पताल परिसर में लोगों से बात की, तो हर कोई दहशत में था। "रात 8 बजे के बाद कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं, बाइट केस रोज आते हैं," एक मरीज ने बताया।

यह समस्या केवल जेपी अस्पताल तक सीमित नहीं - मध्य प्रदेश में 10 लाख से अधिक स्ट्रीट डॉग्स हैं, जिनमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में ही 6 लाख हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) की रिपोर्ट में इन शहरों में डॉग बाइट केस सबसे ज्यादा हैं। शुक्रवार (7 नवंबर 2025) को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर सख्त फैसला सुनाया - सभी राज्यों को 8 हफ्तों में स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हाईवे से कुत्तों को हटाने का आदेश।

Stray dogs create havoc at Jaypee Hospital Supreme Court orders removal of stray dogs from streets within 8 weeks

कोर्ट ने साफ कहा, स्टेरलाइजेशन के बाद इन्हें उसी जगह न छोड़ें। लेकिन जमीनी हकीकत क्या है? क्या MP को मिलेगी राहत? आइए, इस पूरे मुद्दे को विस्तार से समझते हैं - सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लेकर MP के आंकड़े, जेपी अस्पताल का जमीनी हाल और अगला कदम।

जेपी अस्पताल का जमीनी हाल: रोज सैकड़ों डॉग बाइट केस, रात में निकलना खतरे से खाली

भोपाल का जेपी अस्पताल (जयप्रकाश अस्पताल) शहर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां रोजाना 2,000 से अधिक मरीज आते हैं। लेकिन पिछले एक साल में यहां आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। वन इंडिया के संवादाता एलएन मालवीय ने ग्राउंड पर जाकर लोगों से बात की। एक नर्स ने कहा, "रात 8 बजे के बाद परिसर में कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं। स्टाफ और मरीज डरते हैं।" एक मरीज के परिजन बोले, "हमारा बच्चा बाइट का शिकार बना। अस्पताल में ही कुत्ता आ गया।"

2025 में जनवरी से जून तक भोपाल में 10,769 डॉग बाइट केस दर्ज हुए, जिनमें 30% जेपी अस्पताल में ही। अस्पताल प्रशासन ने बताया, "रोज 150 ARV (एंटी-रैबीज वैक्सीन) शॉट्स देते हैं, लेकिन कुत्ते परिसर में घुस आते हैं।" मालवीय की रिपोर्ट में एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें कुत्ते अस्पताल के गेट पर झुंड बनाए थे। डॉक्टरों ने कहा, "बाइट केस 20% बढ़े, रैबीज का खतरा।" यह समस्या रात में ज्यादा है - स्टाफ ड्यूटी के दौरान हमले।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 8 हफ्तों में हटें आवारा कुत्ते, स्कूल-हॉस्पिटल में बाड़ लगाओ

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 'स्ट्रे डॉग्स मामला' में अहम फैसला सुनाया। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजरिया की बेंच ने कहा, "डॉग बाइट केसों में वृद्धि चिंताजनक है। सभी राज्य 8 हफ्तों में स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से कुत्तों को हटाएं।" कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को पूरे देश पर लागू किया। मुख्य निर्देश:

  • हाईवे से हटाओ: NHAI और राज्य सरकारें हाईवे, स्टेट हाईवे, एक्सप्रेसवे से स्ट्रे एनिमल्स (कुत्ते, गाय) हटाएं। शेल्टर में रखें।
  • संस्थागत क्षेत्रों में बाड़: 2 हफ्तों में सरकारी-निजी स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, स्पोर्ट्स ग्राउंड में फेंसिंग लगाएं। DM नोडल ऑफिसर नियुक्त करें।
  • स्टेरलाइजेशन नियम: ABC रूल्स के तहत स्टेरलाइजेशन के बाद कुत्तों को उसी जगह न छोड़ें, शेल्टर में रखें। रैबीज प्रभावित कुत्तों को अलग।
  • हाईवे पेट्रोल: 24x7 पेट्रोल टीम बनाएं, हेल्पलाइन नंबर लगाएं।

कोर्ट ने कहा, "कुत्तों को वापस छोड़ना आदेशों को कमजोर करेगा।" यह फैसला जुलाई 2025 में TOI की रिपोर्ट "सिटी हाउंडेड बाय स्ट्रेज, किड्स पे प्राइस" पर स्वत: संज्ञान से आया। कोर्ट ने राज्यों को 3 महीने में रिपोर्ट मांगी।

MP में स्ट्रीट डॉग्स का संकट: 10 लाख कुत्ते, 6 लाख 5 शहरों में - डॉग बाइट केसों का तांडव

मध्य प्रदेश में स्ट्रे डॉग्स की समस्या चरम पर है। 2022 में राज्य में 10 लाख 9 हजार स्ट्रे डॉग्स थे, जो अब 10 लाख से अधिक अनुमानित हैं। भोपाल में 1.5 लाख, इंदौर में 1.5 लाख, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर में कुल 6 लाख। NHM की 2024-25 रिपोर्ट में MP के 6 शहरों (भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रतलाम) में डॉग बाइट केस सबसे ज्यादा।

शहरवार आंकड़े (जनवरी-जून 2025):

  • भोपाल: 10,769 केस (रोज 1,795), 2024 में 19,285।
  • इंदौर: 30,304 केस (रोज 125), जनवरी-जुलाई 2025 में 24,000।
  • ग्वालियर: 11,902 केस, 2024 में 548 एक दिन में।
  • जबलपुर: 13,619 केस।
  • उज्जैन: 10,296 केस।
  • रतलाम: सबसे ज्यादा, 2024-25 में टॉप।

2022-जनवरी 2025 में MP में 3.39 लाख डॉग बाइट केस। रैबीज से 9 मौतें। NHM ने 2030 तक रैबीज फ्री शहर बनाने का लक्ष्य रखा, लेकिन कार्यान्वयन कमजोर।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश बनाम जमीनी हकीकत: क्या मिलेगा राहत?

कोर्ट ने ABC रूल्स का हवाला दिया - स्टेरलाइजेशन, वैक्सीनेशन, शेल्टर। लेकिन MP में चुनौतियां:

  • कार्यान्वयन: भोपाल में 1,000 शेल्टर क्षमता, लेकिन 1.5 लाख कुत्ते। इंदौर में 24,000 बाइट केस, लेकिन स्टेरलाइजेशन 10%।
  • समस्या: कुत्तों को वापस छोड़ना, जिसे कोर्ट ने रोका। हाईवे पर कुत्ते दुर्घटना का कारण।
  • अगला कदम: राज्य सरकार 2 हफ्तों में फेंसिंग प्लान, 8 हफ्तों में हटाना। DM नोडल। MP में हेल्पलाइन 1962।
  • जेपी अस्पताल में बाड़ लगाने का प्लान, लेकिन बजट की कमी। डॉक्टर बोले, "राहत मिलेगी, लेकिन शेल्टर बढ़ाने जरूरी।"

जनता का सवाल: क्या अब मिलेगा आवारा कुत्तों से राहत?

लोगों में उम्मीद जगी। एक भोपालवासी ने कहा, "कोर्ट का आदेश अच्छा, लेकिन अमल हो।" एनिमल राइट्स ग्रुप ने विरोध किया, "कुत्तों को मारना नहीं, शेल्टर में रखो।" MP सरकार ने कहा, "आदेश मानेंगे।"

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