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Bhopal News: साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने अनिरुद्धाचार्य के लिव-इन बयान का किया समर्थन, जानिए पूरा मामला

पूर्व भाजपा सांसद और भोपाल से चर्चित राजनेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। 31 जुलाई 2025 को मालेगांव ब्लास्ट केस से बरी होने के बाद वृंदावन पहुंचीं प्रज्ञा ने वहां गौरी गोपाल आश्रम में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य से मुलाकात की।

इस दौरान उन्होंने अनिरुद्धाचार्य के लिव-इन रिलेशनशिप पर दिए गए बयान का खुलकर समर्थन किया और समाज में बढ़ती पाश्चात्य संस्कृति और संस्कारों की कमी को लेकर चिंता जताई। प्रज्ञा ने कहा कि माता-पिता बच्चों को मर्यादा और संस्कार नहीं सिखा पाते, जिसके चलते लड़कियां अर्धनग्न दिखती हैं और समाज में दुराचार की घटनाएँ बढ़ रही हैं।

Sadhvi Pragya Thakur supported Aniruddhacharya s live-in statement

इस मुलाकात में प्रज्ञा की बहन उपमा सिंह ठाकुर भी उनके साथ थीं। इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ बटोरी हैं, और कई लोग इसे महिलाओं के प्रति रूढ़िवादी बताकर आलोचना कर रहे हैं, जबकि उनके समर्थकों ने इसे सनातन मूल्यों की रक्षा की आवाज़ करार दिया है।

अनिरुद्धाचार्य का बयान और प्रज्ञा का समर्थन

अनिरुद्धाचार्य, जो अपने धार्मिक प्रवचनों और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं, ने हाल ही में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया था। उन्होंने इसे सनातन धर्म के खिलाफ बताया और कहा कि यह पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव है, जो भारतीय परिवारों और सामाजिक ढांचे को कमजोर कर रहा है। इस बयान पर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी, लेकिन साध्वी प्रज्ञा ने इसे सामाजिक सत्य करार देते हुए समर्थन किया।

वृंदावन में मुलाकात के दौरान प्रज्ञा ने अनिरुद्धाचार्य से कहा, "आपने जो कहा, वह समाज की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करता है। आपने आत्मविश्वास के साथ सच बोला है, और मैं आपकी बात का पूर्ण समर्थन करती हूँ।" उन्होंने आगे कहा, "जब समाज में ऐसे परिदृश्य बढ़ने लगते हैं, जहाँ मर्यादा और संस्कारों की कमी हो, तो दुराचार की घटनाएँ भी बढ़ती हैं। माता-पिता अपने बच्चों को सही शिक्षा और अनुशासन नहीं दे पाते, जिसके चलते लड़कियां स्कूल-कॉलेज में अर्धनग्न दिखाई देती हैं।"

प्रज्ञा ने इस दौरान माताओं पर विशेष जोर देते हुए कहा, "माताओं को अपनी बेटियों को मर्यादा सिखानी चाहिए, लेकिन यह जिम्मेदारी केवल लड़कियों तक सीमित नहीं है। बेटों को भी अनुशासन और संस्कारों की शिक्षा दी जानी चाहिए।"

बेटा-बेटी दोनों के लिए अनुशासन जरूरी

प्रज्ञा ठाकुर ने अपने बयान में लैंगिक समानता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "जैसे बेटियों से पूछा जाता है कि वे कितने बजे घर लौटेंगी, वैसे ही बेटों से भी यह सवाल होना चाहिए। घर लौटने का समय एक अनुशासन है, जिसे हर किसी को मानना चाहिए। अगर माता-पिता अपने बच्चों को यह नहीं सिखाएंगे, तो समाज में विकृति और पाश्चात्य सोच के कारण रिश्तों की पहचान तक मुश्किल हो जाएगी।"

इस दौरान अनिरुद्धाचार्य ने बीच में "लिव-इन..." शब्द का जिक्र किया, जिसे प्रज्ञा ने तुरंत टोकते हुए कहा, "हमारे शब्दों की एक मर्यादा है। भले ही कोर्ट कुछ भी कहे, लेकिन सनातन धर्म में ऐसी चीजें स्वीकार्य नहीं हैं। हम इसका विरोध करते हैं।" प्रज्ञा ने इस बयान के जरिए लिव-इन रिलेशनशिप को सनातन मूल्यों के खिलाफ बताया और इसे सामाजिक ताने-बाने के लिए हानिकारक करार दिया।

संयुक्त परिवार की वकालत

प्रज्ञा ने अपने बयान में संयुक्त परिवार की महत्ता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "संयुक्त परिवार की परंपरा केवल भारत में है, और यह हमारी संस्कृति का गौरव है। गुजरात में संयुक्त परिवारों के कई बेहतरीन उदाहरण देखने को मिलते हैं। उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी कुछ परिवार इस परंपरा को निभा रहे हैं, लेकिन कई राज्यों में लोग अकेले रहना पसंद कर रहे हैं, जो चिंताजनक है।"

उन्होंने आगे कहा, "संयुक्त परिवार न केवल हमारी संस्कृति को संजोता है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में भी सहायक है। दादा-दादी, नाना-नानी से बच्चे संस्कार और मूल्य सीखते हैं। अगर यह परंपरा खत्म हो गई, तो हमारी आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से कट जाएंगी।"

मालेगांव केस से बरी होने के बाद वृंदावन में सक्रियता

31 जुलाई 2025 को मालेगांव ब्लास्ट केस में NIA कोर्ट द्वारा बरी होने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने वृंदावन का रुख किया। वहाँ उन्होंने गौरी गोपाल आश्रम में अनिरुद्धाचार्य से मुलाकात की और धार्मिक-सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उनकी बहन उपमा सिंह ठाकुर भी मौजूद थीं। प्रज्ञा ने कहा, "मालेगांव केस में सत्य की जीत हुई है। अब मैं पूरी तरह से समाज और सनातन धर्म की सेवा में समर्पित हूँ।"

मालेगांव केस में प्रज्ञा को 2008 में गिरफ्तार किया गया था, और लंबे समय तक जेल में रहने के बाद उन्हें 2017 में जमानत मिली थी। 2025 में कोर्ट ने उन्हें और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया, जिसके बाद उन्होंने इसे सनातन धर्म की जीत करार दिया था।

अनिरुद्धाचार्य का विवादों से नाता

अनिरुद्धाचार्य, जिन्हें महंत बाबा के नाम से भी जाना जाता है, अपने बेबाक बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहते हैं। इससे पहले भी उनके लिव-इन रिलेशनशिप, पाश्चात्य संस्कृति, और महिलाओं के पहनावे पर दिए गए बयानों पर विवाद हो चुका है। 2024 में उनके एक प्रवचन में लिव-इन रिलेशनशिप को वैवाहिक संस्था के खिलाफ बताने पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी।

सामाजिक विश्लेषक प्रो. अनिल शर्मा ने कहा, "प्रज्ञा ठाकुर और अनिरुद्धाचार्य का यह बयान सामाजिक बदलावों के प्रति एक रूढ़िगत दृष्टिकोण दर्शाता है। आज की युवा पीढ़ी स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद को महत्व देती है, जिसे धार्मिक या सांस्कृतिक मापदंडों में बांधना मुश्किल है।"

मध्य प्रदेश में प्रज्ञा ठाकुर का प्रभाव

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर मध्य प्रदेश में हिंदुत्व और सनातन धर्म के प्रबल समर्थक के रूप में जानी जाती हैं। 2019 में उन्होंने भोपाल से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को हराकर सांसद का पद हासिल किया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिसके बाद वे सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय हो गईं।

प्रज्ञा अपने विवादास्पद बयानों के लिए भी जानी जाती हैं। 2019 में नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने पर उनकी खूब आलोचना हुई थी, जिसके बाद PM नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वे उन्हें दिल से माफ नहीं कर पाएंगे। मालेगांव केस से बरी होने के बाद प्रज्ञा ने इसे सनातन धर्म की जीत बताया और कहा कि वे अब पूरी तरह से समाज सेवा में समर्पित हैं।

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