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Bhopal MP News: उच्च शिक्षा विभाग की बड़ी भर्ती ड्राइव, 2022 में 2053 नियुक्तियां, अब 2197 पदों पर भर्ती चालू

MP News: मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा अब केवल डिग्री और पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अनुभव, अनुसंधान और व्यावहारिक ज्ञान का केंद्र बनती जा रही है। इसी दिशा में एक अहम संकेत देते हुए उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार आने वाले वर्षों में उच्च शिक्षा के स्वरूप और पहुंच-दोनों को नए स्तर पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित "दो वर्षों की विभागीय उपलब्धियां एवं आगामी कार्ययोजनाएं" विषयक पत्रकार वार्ता में मंत्री श्री परमार ने उच्च शिक्षा विभाग के अब तक के कार्यों और भविष्य के रोडमैप को विस्तार से रखा।

Recruitment for 2197 posts is now underway in the Higher Education Department of MP - Minister Inder Singh Parmar

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, प्रमुख सचिव आयुष डी.पी. आहूजा, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, आयुक्त आयुष श्रीमती उमा आर. माहेश्वरी और आयुक्त तकनीकी शिक्षा अवधेश शर्मा भी मौजूद रहे।

उच्च शिक्षा में भर्ती का बड़ा अभियान: खाली पद नहीं रहेंगे

मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा-वर्ष 2022 में लोक सेवा आयोग के माध्यम से 2053 पदों पर भर्ती पूरी की जा चुकी है। वर्तमान में 2197 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है, जिसे जल्द ही पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए योग्य शिक्षक सबसे अहम कड़ी हैं और इसी सोच के तहत मानव संसाधन सुदृढ़ किया जा रहा है।

GER बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य: 28.9% से 35% तक

उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार का अगला बड़ा लक्ष्य सकल नामांकन अनुपात (GER) को तेजी से बढ़ाना है। वर्तमान में मध्यप्रदेश का GER 28.9% है, जिसे आने वाले समय में 35% तक ले जाने की योजना है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए- नए कॉलेज और विश्वविद्यालय, पाठ्यक्रमों में लचीलापन, रोजगारोन्मुखी शिक्षा, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की पहुंच हुई। जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक युवा उच्च शिक्षा से जुड़ सकें।

NEP 2020 के अनुरूप बड़ा शैक्षणिक बदलाव

मंत्री परमार ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उच्च शिक्षा विभाग राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) को जमीनी स्तर पर लागू करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

प्रमुख शैक्षणिक सुधार:

  • शैक्षणिक सत्र 2021-22 से चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूर्ण रूप से लागू
  • एक वर्षीय स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम की शुरुआत
  • Interdisciplinary (अंतःविषय) विकल्प, जिससे छात्र एक से अधिक विषयों का ज्ञान प्राप्त कर सकें
  • मंत्री ने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नवाचार और शोध में सक्षम युवा बनाना है।

तीन नए विश्वविद्यालय: क्षेत्रीय शिक्षा को मजबूती

  • प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए तीन नए विश्वविद्यालयों की स्थापना को भी मंत्री ने बड़ी उपलब्धि बताया-
  • गुना में क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय
  • खरगोन में क्रांति सूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय
  • सागर में रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय
  • इन विश्वविद्यालयों से न केवल क्षेत्रीय छात्रों को फायदा मिलेगा, बल्कि स्थानीय शोध और संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस: हर जिले में शिक्षा का मॉडल केंद्र

मंत्री परमार ने बताया कि प्रदेश के हर जिले में एक महाविद्यालय को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है।

कुल 55 कॉलेज चयनित

  • ₹336 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत
  • 1845 नए पद सृजित
  • इन कॉलेजों में आधुनिक लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और इंडस्ट्री-लिंक्ड कोर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

किताबों से आगे बढ़कर अनुभव और शोध की ओर मध्यप्रदेश

पत्रकार वार्ता के दौरान मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा- "मध्यप्रदेश अब शिक्षा के क्षेत्र में केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है। हमारा फोकस अनुभव, अनुसंधान और व्यावहारिक ज्ञान पर है।"

  • उन्होंने बताया कि आने वाले तीन वर्षों की कार्ययोजना में-
  • स्टार्टअप से जुड़ी शिक्षा
  • रिसर्च और इनोवेशन
  • इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग
  • डिजिटल और हाइब्रिड लर्निंग
  • जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
  • उच्च शिक्षा में नई दिशा की ओर एमपी

दो वर्षों की उपलब्धियां और आगामी योजनाएं यह संकेत देती हैं कि मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार, विस्तार और गुणवत्ता-तीनों मोर्चों पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। रिक्त पदों की भर्ती से लेकर GER बढ़ाने और विश्वविद्यालयों के विस्तार तक, सरकार का फोकस स्पष्ट है-हर छात्र तक बेहतर और आधुनिक शिक्षा पहुंचाना।

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