MP News: राहुल गांधी का जोशीला आह्वान, रेस का घोड़ा बनना है, विधायकों को दिया 10 नेताओं वाला जवाब,जानिए
MP News Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को भोपाल में मध्यप्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंका। 'संगठन सृजन अभियान' की शुरुआत के लिए आयोजित रविंद्र भवन सम्मेलन में उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, "हमें रेस का घोड़ा बनना है, जो तेजी से दौड़कर आगे निकल जाए।"
उन्होंने एक प्रेरक कहानी सुनाते हुए कहा, "दुनिया में तीन तरह के घोड़े होते हैं: रेस वाला, जो हमेशा जीतता है; बारात वाला, जो सिर्फ दिखावे तक चलता है; और लंगड़ा घोड़ा, जो किसी काम का नहीं। हमें रेस वाला घोड़ा बनना है, जो मध्यप्रदेश में कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाए।" इस बयान ने कार्यकर्ताओं में उत्साह भर दिया और सोशल मीडिया पर यह संदेश खूब वायरल हुआ।

विधायक की शिकायत, राहुल का करारा जवाब
राहुल गांधी के भोपाल दौरे के दौरान विधायकों की बैठक में सेमरिया के विधायक अभय मिश्रा ने पार्टी की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा, "हमें मध्यप्रदेश में कोई ऐसा नेता नहीं दिखता, जिसके भरोसे हम चुनाव जीत सकें।" इस टिप्पणी पर राहुल गांधी ने तुरंत जवाब दिया, "आपको भले न दिखते हों, लेकिन मुझे 10 ऐसे नेता नजर आते हैं, जो मध्यप्रदेश में नेतृत्व करने और सरकार बनाने की क्षमता रखते हैं।" इस बयान ने न केवल विधायक की शिकायत का जवाब दिया, बल्कि पार्टी में नेतृत्व के प्रति विश्वास भी जगाया। राहुल का यह जवाब उन आलोचनाओं को भी खारिज करता है, जो मध्यप्रदेश कांग्रेस में मजबूत नेतृत्व की कमी की बात उठाती रही हैं।
संगठन सृजन अभियान, मध्य प्रदेश में कांग्रेस की नई रणनीति
'संगठन सृजन अभियान' कांग्रेस की उस महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, जिसे पिछले साल दिसंबर 2024 में बेलगावी में आयोजित कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में मंजूरी दी गई थी। इसका उद्देश्य पार्टी को बूथ स्तर से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक पुनर्जनन करना, कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना और युवाओं, किसानों, मजदूरों जैसे सामाजिक समूहों से फिर से जुड़ना है। मध्यप्रदेश में यह अभियान गुजरात मॉडल पर आधारित है, जहां 'संगठन सृजन अभियान' के तहत हर जिले में पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए और संगठन की कमजोरियों को दूर करने के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई थी।

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "यह अभियान मध्यप्रदेश कांग्रेस के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। पहली बार इतने सुनियोजित ढंग से संगठन को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। राहुल गांधी जी के नेतृत्व में यह अभियान हमें 2028 में सत्ता में वापसी का रास्ता दिखाएगा।" उन्होंने बताया कि 10 जून से 30 जून तक यह अभियान प्रदेश के सभी 52 जिलों में चलेगा, जिसमें 61 AICC पर्यवेक्षक और प्रत्येक जिले में चार सहायक पर्यवेक्षक (Associate Observers) तैनात होंगे। ये पर्यवेक्षक जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति का आकलन करेंगे, कमजोरियों को चिह्नित करेंगे और मजबूत नेतृत्व को आगे लाने के लिए रिपोर्ट तैयार करेंगे।
राहुल गांधी का भोपाल दौरा, छह घंटे, चार बैठकें
राहुल गांधी मंगलवार सुबह भोपाल पहुंचे, जहां उनका हवाई अड्डे पर मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और अन्य नेताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके दौरे का शेड्यूल बेहद व्यस्त रहा, जिसमें छह घंटे में चार महत्वपूर्ण बैठकें शामिल थी।
पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की बैठक: सुबह 11 बजे राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (इंदिरा भवन) में PAC की बैठक की। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, सज्जन वर्मा, विवेक तन्खा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष शोभा ओझा जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे। हालांकि, कमलनाथ के बेटे और छिंदवाड़ा के पूर्व सांसद नकुलनाथ की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। इस बैठक में मध्यप्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य, संगठन की चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई।

सांसदों और विधायकों की बैठक: PAC बैठक के बाद राहुल गांधी ने सांसदों और विधायकों के साथ चर्चा की। इस बैठक में सेमरिया के विधायक अभय मिश्रा ने कहा, "हमें मध्यप्रदेश में कोई ऐसा नेता नहीं दिखता, जिसके भरोसे हम चुनाव जीत सकें।" इस पर राहुल गांधी ने जवाब दिया, "आपको भले न दिखते हों, लेकिन मुझे 10 ऐसे नेता नजर आते हैं, जो मध्यप्रदेश में नेतृत्व करने और सरकार बनाने की क्षमता रखते हैं।" इस बयान ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा और नेतृत्व के सवाल पर पार्टी की एकजुटता को दर्शाया।
AICC पर्यवेक्षकों और प्रभारियों के साथ बैठक
दोपहर में राहुल गांधी ने 'संगठन सृजन अभियान' के लिए नियुक्त 61 AICC पर्यवेक्षकों और PCC प्रभारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में पर्यवेक्षकों को जिले में संगठन की स्थिति का आकलन करने, जिला अध्यक्षों के लिए मजबूत उम्मीदवारों की पहचान करने और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए। पर्यवेक्षकों का चयन उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता, नेतृत्व क्षमता और संगठन के साथ लंबे जुड़ाव के आधार पर किया गया है।
ब्लॉक और जिला अध्यक्षों का सम्मेलन: दिन की अंतिम और सबसे बड़ी बैठक रविंद्र भवन में हुई, जिसमें करीब 1,500 ब्लॉक और जिला अध्यक्षों, AICC सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। राहुल गांधी ने इस सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
'रेस वाला घोड़ा' बनने की अपील
रविंद्र भवन में अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के लिए एक कहानी सुनाई। उन्होंने कहा, "दुनिया में तीन तरह के घोड़े होते हैं। पहला रेस वाला घोड़ा, जो तेजी से दौड़ता है और हमेशा आगे निकल जाता है। दूसरा बारात वाला घोड़ा, जो सिर्फ बारात तक चल पाता है और फिर थम जाता है। तीसरा लंगड़ा घोड़ा, जो किसी काम का नहीं होता। हमें रेस वाला घोड़ा बनना है। हमें तेजी से दौड़ना है और मध्यप्रदेश में कांग्रेस को फिर से खड़ा करना है।" इस प्रेरक बयान ने कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया और सोशल मीडिया पर भी यह बयान वायरल हो गया।
राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि संगठन की मजबूती ही पार्टी की जीत की कुंजी है। उन्होंने कहा, "हमें बूथ स्तर पर मजबूत होना होगा। हर कार्यकर्ता को जनता के बीच जाना होगा और उनकी समस्याओं को सुनना होगा। यह अभियान केवल संगठन को मजबूत करने का नहीं, बल्कि जनता के साथ फिर से जुड़ने का भी है।"
टिकट वितरण में संगठन की राय सर्वोपरि
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि भविष्य में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण में संगठन की राय को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "जो नाम ब्लॉक और जिला स्तर पर संगठन की ओर से आएंगे, उन्हें ही टिकट दिया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि मेहनती और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को मौका मिले।" उन्होंने नई पीढ़ी को भी संगठन में शामिल करने और उन्हें नेतृत्व के अवसर देने की बात कही।
इस बयान को पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस पिछले कुछ वर्षों से आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व के सवालों से जूझ रही है। 2018 में कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी थी, लेकिन 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों की बगावत के कारण सरकार गिर गई थी। राहुल गांधी का यह बयान संगठन को एकजुट करने और कार्यकर्ताओं में विश्वास जगाने की कोशिश है।
पर्यवेक्षकों की भूमिका और अभियान की रूपरेखा
'संगठन सृजन अभियान' के तहत AICC ने 61 पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया है, जिनमें धीरज गुर्जर, रागिनी नायक, मुकेश भाकर, मनीष यादव जैसे नेता शामिल हैं। ये पर्यवेक्षक उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड और अन्य राज्यों से हैं। प्रत्येक पर्यवेक्षक को एक जिले की जिम्मेदारी दी गई है, और उनके साथ चार सहायक पर्यवेक्षक काम करेंगे।
पर्यवेक्षकों का मुख्य कार्य निम्नलिखित होगा
- जमीनी स्थिति का आकलन: प्रत्येक जिले में संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और कमजोरियों का विश्लेषण।
- जिला अध्यक्षों का चयन: वैचारिक प्रतिबद्धता, नेतृत्व क्षमता और जमीनी जुड़ाव के आधार पर जिला अध्यक्षों के लिए उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग।
- बूथ स्तर पर सक्रियता: बूथ कमेटियों को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देना।
- रिपोर्ट तैयार करना: 30 जून तक प्रत्येक जिले की विस्तृत रिपोर्ट AICC और PCC को सौंपना, जिसके आधार पर संगठनात्मक बदलाव किए जाएंगे।
- इस अभियान की शुरुआत विदिशा जिले से हो चुकी है, जो केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का गढ़ माना जाता है। विदिशा में 100-150 प्रशिक्षित कार्यकर्ता गांवों में रहकर स्थानीय लोगों से जुड़ रहे हैं और उनकी समस्याओं को समझ रहे हैं। 15 दिनों के इस अभियान के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर पूरे प्रदेश में रणनीति बनाई जाएगी।
आंतरिक चुनौतियां और राहुल गांधी की रणनीति
मध्य प्रदेश में कांग्रेस पिछले दो दशकों से सत्ता से ज्यादातर बाहर रही है। 2018 में कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी थी, लेकिन 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के बाद यह गिर गई। 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को 66 सीटें मिलीं, जो बहुमत से काफी कम थीं। 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी प्रदेश की सभी 29 सीटें हार गई। इन हारों ने पार्टी में आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व के सवालों को और गहरा दिया।
राहुल गांधी ने भोपाल में इन चुनौतियों को संबोधित करते हुए सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा, "जो लोग कांग्रेस में रहकर BJP के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। चाहे उनकी संख्या कितनी भी हो, ऐसे लोगों को चिह्नित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।" उमंग सिंघार ने इसे 'फूल छाप कांग्रेसी' करार देते हुए कहा कि यह अभियान पार्टी की विश्वसनीयता को बहाल करेगा।
सामाजिक समीकरण और जातिगत जनगणना का मुद्दा
राहुल गांधी ने अपने दौरे में जातिगत जनगणना के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी लगातार मांग के कारण केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने इसके लिए राहुल गांधी के प्रति आभार जताने के लिए एक सोशल मीडिया कैंपेन शुरू किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सज्जन वर्मा ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP ने शुरू में राहुल जी का मजाक उड़ाया, लेकिन उनकी जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा।"
मध्यप्रदेश में OBC, SC और ST समुदायों की बड़ी आबादी को देखते हुए कांग्रेस इस अभियान के जरिए सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि जातिगत जनगणना और सामाजिक समावेशन के मुद्दे 2028 के चुनावों में उसे मजबूत करेंगे।
BJP की प्रतिक्रिया
राहुल गांधी के दौरे पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने तंज कसा। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी भोपाल आए, यह अच्छी बात है। लेकिन उन्होंने अपनी दादी इंदिरा गांधी की प्रतिमा पर फूल चढ़ाते समय जूते नहीं उतारे, जो हमारी सांस्कृतिक परंपराओं के खिलाफ है।" BJP ने इसे कांग्रेस की सांस्कृतिक असंवेदनशीलता करार दिया। हालांकि, कांग्रेस ने इस आलोचना को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया।
चुनौतियां और भविष्य की राह
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां हैं। आंतरिक गुटबाजी, नेतृत्व का अभाव और BJP की मजबूत संगठनात्मक मशीनरी इनमें प्रमुख हैं। 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में हार ने पार्टी के मनोबल को प्रभावित किया है। इसके अलावा, कई जिला और शहर कमेटियां वर्षों से अपरिवर्तित हैं, जिसके कारण संगठन में नई ऊर्जा की कमी है।
'संगठन सृजन अभियान' इन चुनौतियों से निपटने की कोशिश है। जीतू पटवारी ने कहा, "हमने ब्लॉक और पंचायत स्तर तक नेतृत्व की सूची तैयार की है। शहरों में मोहल्ला स्तर पर इकाइयां बनेंगी। यह अभियान हमें नई दिशा देगा।" पार्टी का लक्ष्य 2028 तक हर बूथ पर मजबूत संगठन बनाना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है।












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