MP : 200 स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर कर रहे उफनती नदी पार, प्रियंका गांधी ने सरकार को दी नसीहत

मध्य प्रदेश के हरदा जिले में 200 स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर उफनती नदी को पार कर रहे हैं। जिसका वीडियो कांग्रेस की महासचिव प्रियंका वाड्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है।

भोपाल,29 जुलाई। प्रियंका गांधी वाड्रा ने मध्य प्रदेश सरकार को घेरते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस वीडियो ने मध्य प्रदेश सरकार के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के मॉडल की पोल खोल दी। प्रियंका ने मध्यप्रदेश सरकार को जिम्मेदारी निभानी की नसीहत तक दे डाली। प्रियंका गांधी वाड्रा ने लिखा कि यह दृश्य दिल दहलाने वाला है। हरदा, मध्य प्रदेश की ये छात्राएं अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रही हैं। बच्चे देश का भविष्य होते हैं। उनकी शिक्षा से लेकर सुरक्षा तक सरकार का दायित्व है। मध्य प्रदेश सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इन बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ता मुहैया कराना चाहिए।

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    रहटगांव तहसील की गंजाल नदी का वीडियो

    रहटगांव तहसील की गंजाल नदी का वीडियो

    प्रियंका गांधी वाड्रा ने जो वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया वह हरदा के रहटगांव तहसील की गंजाल नदी का है। जो बारिश की वजह से उफान पर है। बता दे मध्य प्रदेश में पिछले कई दिनों से भारी बारिश का दौर जारी है। इस वजह से नदी नाले उफान पर है, लेकिन रहटगांव तहसील की इस नदी पर पुल नहीं होने के कारण यहां के गांवों के करीब 200 स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार कर कर स्कूल जाने को मजबूर है।

    बच्चों को कंधे पर ले जाते उनके परिजन

    बच्चों को कंधे पर ले जाते उनके परिजन

    मीडिया को ग्रामीणों ने बताया कि गांव से बाहर जाने के लिए एकमात्र रास्ता है। मंगलवार की शाम को भी टेमरूबहार से राजाबरारी और बोरी क्षेत्र में बच्चे उफनती नदी पार करके स्कूल जाते हुए दिखाई दिए। छोटे बच्चों को उनके माता-पिता कंधों पर ले जा रहे थे। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

    रपटे पर न तो रेलिंग न सुरक्षा

    रपटे पर न तो रेलिंग न सुरक्षा

    वही ग्रामीणों ने बताया कि नदी पर बने रपटे पर ना तो रेलिंग है और ना ही किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था फूल बनाने को लेकर कई बार आवेदन प्रशासनिक अधिकारियों को दिए गए। लेकिन अब तक यहां पर कोई पुल नहीं बन सका है। कई सालों से हम लोग यहां पर पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन न कोई जनप्रतिनिधि और ना ही कोई अधिकारी सुनने को तैयार है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले जो रपटे बनाए थे, अगर उन्हीं को ऊंचा कर दिया जाता तो, यह समस्या खड़ी नहीं होती। चांदियापुरा, मोगरढाना, गूलरढाना, टिमरूबहार, मराबटोल सहित 15 से अधिक गांवों के लोगों को इसी रास्ते से होकर जाना पड़ता है।

    पुल बनाने के लिए नहीं है वन विभाग के पास बजट

    पुल बनाने के लिए नहीं है वन विभाग के पास बजट

    डीएफओ अंकित पांडे का कहना है कि यहां पर वन विभाग ने रपटा बनाया है। पुल बनाए जाने को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों से कई बार चर्चा की गई लेकिन बजट नहीं होने के कारण अब तक पुल नहीं बनाया जा सका है। उन्होंने बताया कि संबंधित विभाग के अधिकारियों से चर्चा की जा रही है।

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