MP में नए वायरस की दस्तक? रीवा में अचानक मर रहे सुअरों से दहशत, लोगों के बीच संक्रमण फैलने की अफवाह
रीवा, 14 अगस्त। जिले में सूअरों की लगातार हो रही मौतों पर पशु चिकित्सा विभाग ने टीकाकरण अभियान शुरू किया है। नगर निगम क्षेत्र में रोग व असामान्य मृत्युदर को दृष्टिगत रखते हुए रोग की रोकथाम, नमूना एकत्रीकरण, उपचार और टीकाकरण के लिए पशु चिकित्सा अधिकारी व सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारियों की मोहल्ले में ड्यूटी लगाई गई है। 1 साथ बड़ी संख्या में हो रही मौतों के बाद स्वाइन फीवर की खबरें सामने आई हैं।

दूसरे दिन भी कई मौतें
रीवा नगर में लगातार दूसरे दिन भी सूअरों की मौतें होने की खबरें मिली है। बताया गया, अधिकांश तो ऐसे थे जिनकी मौत कई दिन पहले हो चुकी थी, दुर्गन्ध के चलते तो अब पता लग रही है। करीब आधा दर्जन से अधिक नए स्थानों पर स्वाइन फीवर फैलने की खबरें भी सामने आई है।

डॉक्टरों को किया गया तैनात
नगर के वार्ड क्रमांक 4 में खण्ड पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर वायपी सिंह और सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी लालता प्रसाद साकेत, वार्ड क्रमांक-10 में वरिष्ठ पशु चिकित्सा शल्यज्ञ डॉक्टर अरुणेंद्र शुक्ल व राकेश मिश्रा, वार्ड क्रमांक -27 में डॉक्टर अनवर आलम खान व मयंक त्रिपाठी, वार्ड क्रमांक- 39 में डॉ. शंकरदयाल पाण्डेय व अनिल मिश्रा तथा वार्ड-40 में पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ डॉ. मनीष तिवारी व अनिल मिश्रा को उपचार व टीकाकरण के लिए तैनात किया गया है।

मवेशियों में लंपी स्किन डिसीज का खतरा
इधर, गाय-भैंस जैसे जानवरों में लंपी स्किन डिसीज की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। पशु चिकित्सा विभाग ने इसके लिए अलर्ट जारी जारी किया है। पशु चिकित्सा अधिकारियों ने इस पर निगरानी रखने की सलाह दी है। गाय,भैंसों में बुखार, अपच, लार बहना, भूख न लगने आदि भी इसके लक्षण हैं। इस बीमारी को नियंत्रित करने चिकित्सालयों को अलर्ट किया गया है। यह बीमारी मच्छर, मक्खियों से फैलती है।

नीम की पत्तियों से धुआं करें
इसलिए पशुपालक गाय-भैंस के शेड में नीम की पत्तियों का धुआं कर मच्छर मक्खियां दूर रखें। इस बीमारी में मृत्यु की संभावना बहुत कम है, लेकिन पशुओं के शरीर पर घाव व अन्य समस्याएं हो जाने के कारण दुग्ध उत्पादन में कमी हो जाती है। उप संचालक डॉक्टर राजेश मिश्रा ने बताया कि स्वाइन फीवर से सूअरों की हो रही मौतों के चलते वैक्सीनेशन शुरू किया गया है। साथ ही चिह्नित क्षेत्रों में चिकित्सकों को तैनात किया गया है कि वह पूरी व्यवस्थाएं देखें। वैक्सीनेशन के बाद मौतों की संख्या घटेगी।

बच्चों पर भी मंडरा रहा खतरा
सुअरों की इस तरह से मौत को लेकर इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में स्वाइन फ्लू की दहशत व्याप्त हो रही है। इन बस्तियों में सुअरों के साथ लोगों के छोटे बच्चे भी खेलते हैं। ऐसे में छोटे बच्चों पर भी खतरा मंडरा रहा है। वास्तव में इन मौतों का क्या कारण है, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। बीमारी की सही जानकारी सामने लाकर आवश्यक उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए लेकिन इस पर जरा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बंसल मोहल्ले में रहने वाले तमाम लोगों की रोजी-रोटी का साधन सुअर पालन ही है। इनकी मौत से अब इनके सामने रोजी-रोटी का भी संकट खड़ा हो रहा है। यहां चिंता की बात यह भी है कि इनमें से कई लोग सुअर का मांस पकाकर खाते हैं। यदि इन लोगों ने बीमार जानवर का मांस खाया तो वे भी मौत के मुंह में जा सकते हैं।

मऊगंज में 10 दिनों से मौत का सिलसिला जारी
मऊगंज क्षेत्र में दस दिन पहले से सुअरों की मौत का क्रम जारी है। एसडीएम द्वारा मौके पर पशु चिकित्सकों की टीम को जाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो कोई भी उन तक नहीं पहुंचा है। इतना ही नहीं, अभी तक किसी भी प्रकार के सैम्पल आदि तक नहीं लिए गए हैं। अब यह सिलसिला रीवा शहर में भी जारी हो गया है। जल्द ही इस पर काबू नही पाया गया तो यह सिलसिला और क्षेत्रों में भी शुरू हो सकता है।












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