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MP News weather: कड़ाके की ठंड ने तोड़े 80 साल पुराने रिकॉर्ड, पचमढ़ी में पहली बार 5.8 डिग्री, रीवा में 1 मौत

MP Weather News: मध्य प्रदेश में नवंबर का महीना ही दिसंबर-जनवरी जैसी कड़ाके की ठंड का गवाह बन गया है। गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान पहली बार 5.8 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया, जिससे वहां बर्फीली हवाओं ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को घरों में कैद कर लिया।

इसी क्रम में रीवा जिले में ठंड से एक बुजुर्ग की मौत हो गई, जबकि भोपाल और इंदौर जैसे प्रमुख शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे घूम रहा है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को 21 जिलों में शीतलहर का रेड अलर्ट जारी किया है, जिसमें भोपाल, इंदौर, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, रीवा, सतना, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन प्रमुख हैं। इस असामान्य ठंड ने न केवल दैनिक जीवन को ठप कर दिया है, बल्कि स्कूलों के समय में बदलाव और स्वास्थ्य जोखिमों को भी बढ़ा दिया है।

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मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) भोपाल के अनुसार, उत्तर भारत में हिमाचल और उत्तराखंड की बर्फबारी का असर सीधे मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने मैदानी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे रात का पारा सामान्य से 4-5 डिग्री नीचे चला गया। पचमढ़ी में 5.8 डिग्री का रिकॉर्ड नवंबर के लिए अभूतपूर्व है, जहां सामान्यतः तापमान 10-12 डिग्री के आसपास रहता है।

यहां घने जंगलों और ऊंचाई के कारण ठंड और तीव्र हो जाती है, लेकिन इस बार बर्फीली हवाओं ने इसे और गहरा दिया। नर्मदापुरम संभाग में घना कोहरा छाया रहा, जहां विजिबिलिटी मात्र 500 से 1000 मीटर तक सीमित हो गई। ड्राइविंग के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है, जिसके चलते एनएचआई ने स्पीड लिमिट कम करने के निर्देश जारी किए हैं।

प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी ठंड का प्रकोप कम नहीं है। रीवा में न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री दर्ज हुआ, लेकिन इसी ठंड ने एक 65 वर्षीय बुजург की जान ले ली। स्थानीय अस्पताल के अनुसार, बुजुर्ग को हाइपोथर्मिया (शीतलालसा) के कारण भर्ती किया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। यह इस सीजन की पहली ऐसी मौत है, जो ठंड से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं की गंभीरता को दर्शाती है।

भोपाल में गुरुवार रात का पारा 9.6 डिग्री पर अटका रहा, जो नवंबर में पिछले 84 सालों का सबसे निचला स्तर है। 1941 के बाद पहली बार राजधानी का तापमान इतना नीचे गिरा है। इंदौर में 8.4 डिग्री का रिकॉर्ड 25 साल पुराना है, जब 2000 में भी इतनी ही ठंड पड़ी थी। ग्वालियर 12.8, उज्जैन 11.5, जबलपुर 11.1, छतरपुर के नौगांव 8.5, खरगोन 8.8, नरसिंहपुर 9, खंडवा 9.4 और उमरिया 7.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मालवा-निमाड़ क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां दिन का तापमान भी 25 डिग्री से नीचे आ गया है।

इस ठंड का दौर 6 नवंबर से ही शुरू हो गया था, जब उत्तर भारत की बर्फीली हवाओं ने मैदानों को छूना शुरू किया। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में असामान्य बर्फबारी हो रही है, जो सीधी मध्य प्रदेश तक ठंडी हवाओं को ला रही है। भोपाल में पिछले 10 दिनों से लगातार कोल्ड वेव चल रही है, जिससे सुबह-शाम घना कोहरा और दिन में धूप के बावजूद ठिठुरन बनी हुई है। इस ठंड ने दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

सड़कों पर आवागमन धीमा हो गया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में किसान फसल कटाई में परेशान हैं। खरीफ की अंतिम फसलें जैसे धान और सोयाबीन ठंड से प्रभावित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। ठंड से संबंधित बीमारियां जैसे निमोनिया, जोड़ों का दर्द और सांस की तकलीफ बढ़ गई हैं। अस्पतालों में ओपीडी में 30 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।

बढ़ती ठंड को देखते हुए शिक्षा विभाग ने कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव कर दिया है। भोपाल, इंदौर, रीवा, सतना, उमरिया, छिंदवाड़ा, सागर, शहडोल, झाबुआ, देवास, ग्वालियर, अनूपपुर और मंडला सहित 15 जिलों में कक्षा नर्सरी से 8वीं तक के स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक कर दिया गया है। निजी स्कूलों को भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को गरीब परिवारों को कंबल वितरण और आश्रय गृहों में व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। एनएसएस और एनसीसी के छात्रों को कोहरे में ट्रैफिक जागरूकता अभियान में लगाया गया है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले दो दिनों (शुक्रवार-शनिवार) तक शीतलहर का असर बरकरार रहेगा। इंदौर, भोपाल, राजगढ़, शाजापुर और सीहोर में तीव्र शीतलहर का अलर्ट है, जहां पारा और 1-2 डिग्री गिर सकता है। लेकिन राहत की खबर यह है कि 22 नवंबर से दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में लो प्रेशर एरिया एक्टिव हो जाएगा। इससे हवाओं का रुख बदलेगा और तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि होगी। विशेषज्ञ दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, "साफ मौसम और उत्तरी हवाओं के कारण ठंड बढ़ रही है, लेकिन 22 नवंबर से नमी बढ़ने से शीतलहर कमजोर पड़ेगी। पूरे नवंबर में ठंड बनी रहेगी, लेकिन चरम पर नहीं।" हालांकि, विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि रबी की बुवाई में देरी न करें और फसल बीमा करवाएं।

यह असामान्य ठंड न केवल मौसम की मारामारी है, बल्कि जलवायु परिवर्तन की चेतावनी भी। पिछले साल नवंबर में औसत तापमान 15 डिग्री था, लेकिन इस बार 8-10 डिग्री की गिरावट ने सबको हैरान कर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अलाव जलाकर रातें काट रहे हैं, जबकि शहरों में हीटर और गर्म कपड़ों की बिक्री दोगुनी हो गई है। सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1077 जारी किया है ताकि ठंड से प्रभावित लोग सहायता ले सकें। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश इस ठंड के तांडव से जूझ रहा है, लेकिन 22 नवंबर से मिलने वाली राहत की उम्मीद ने लोगों के चेहरों पर हल्की मुस्कान ला दी है। मौसम विभाग लगातार अपडेट दे रहा है, इसलिए नागरिक सतर्क रहें और गर्म कपड़े पहनें।

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