MP News: अतिथि शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी, हरियाणा मॉडल अपनाने की तैयारी में मोहन सरकार
MP News Guest Faculty: मध्य प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों (गेस्ट फैकल्टी) के लिए नए साल की शुरुआत उम्मीदों की नई किरण लेकर आई है। वर्षों से कम मानदेय, असुरक्षित भविष्य और नियमित नियुक्ति के इंतजार में पढ़ा रहे अतिथि विद्वानों को अब मोहन यादव सरकार से बड़ी राहत मिलने के संकेत हैं।
प्रदेश सरकार विश्वविद्यालयों और शासकीय महाविद्यालयों में अस्थायी रूप से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के लिए हरियाणा मॉडल लागू करने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रही है।

सात सदस्यीय समिति गठित, हरियाणा मॉडल का होगा अध्ययन
उच्च शिक्षा विभाग ने इस दिशा में पहला ठोस कदम उठाते हुए सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति हरियाणा में लागू गेस्ट फैकल्टी (guest faculty) व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन करेगी और उसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि मध्य प्रदेश में हरियाणा मॉडल को किस स्वरूप में लागू किया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, यदि यह मॉडल लागू होता है तो प्रदेश के अतिथि शिक्षकों के वेतन में डेढ़ गुना तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अतिथि विद्वानों की सेवाएं बार-बार खत्म होने की अनिश्चितता समाप्त हो सकती है और सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा सुरक्षा मिलने का रास्ता खुलेगा।
वर्तमान व्यवस्था: कम मानदेय, ज्यादा असुरक्षा
मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों में नियमित प्राध्यापकों की भर्ती लंबे समय से बेहद सीमित रही है। इसी कमी को पूरा करने के लिए 1990 के दशक में जन भागीदारी समितियों के माध्यम से तदर्थ और अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्ति शुरू की गई थी। वर्ष 2000 के बाद यह व्यवस्था तेजी से बढ़ी और आज प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था का बड़ा हिस्सा इन्हीं अतिथि शिक्षकों के कंधों पर टिका है।
फिलहाल प्रदेश में अतिथि विद्वानों को 2000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। हालांकि अवकाश के दिनों का भुगतान नहीं होने के कारण उनका मासिक वेतन आमतौर पर 40 से 44 हजार रुपये के बीच ही सिमट जाता है। उन्हें साल में केवल 13 आकस्मिक अवकाश और 3 ऐच्छिक अवकाश की पात्रता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिस पद पर अतिथि शिक्षक पढ़ा रहा होता है, यदि वहां नियमित प्राध्यापक की नियुक्ति हो जाती है तो अतिथि विद्वान को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के हटा दिया जाता है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है, बल्कि मानसिक असुरक्षा भी बनी रहती है।
हरियाणा मॉडल क्या है और क्यों खास है?
हरियाणा में गेस्ट फैकल्टी के लिए लागू मॉडल को देश के सबसे बेहतर मॉडलों में गिना जाता है। वहां अतिथि शिक्षकों को न सिर्फ अपेक्षाकृत बेहतर मानदेय मिलता है, बल्कि उनकी सेवाएं भी अधिक स्थिर मानी जाती हैं। उम्र सीमा तक सेवा, मानदेय में नियमित वृद्धि और अनुभव के आधार पर प्राथमिकता जैसी व्यवस्थाएं इस मॉडल की खासियत हैं।
मध्य प्रदेश सरकार का मानना है कि यदि हरियाणा मॉडल को प्रदेश की जरूरतों के अनुसार ढालकर लागू किया गया, तो इससे न केवल अतिथि शिक्षकों की स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
अतिथि शिक्षकों में बढ़ी उम्मीद
इस फैसले से प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों में उत्साह है। लंबे समय से वे समान काम के लिए समान वेतन, सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक भविष्य की मांग कर रहे थे। अब सरकार की पहल को वे अपनी वर्षों पुरानी मांगों की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।
सरकार का संकेत: शिक्षा व्यवस्था होगी मजबूत
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य केवल अतिथि शिक्षकों को राहत देना ही नहीं, बल्कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की निरंतरता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
कुल मिलाकर, यदि हरियाणा मॉडल मध्य प्रदेश में लागू होता है, तो यह अतिथि शिक्षकों के लिए ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है-जिसका असर न सिर्फ शिक्षकों पर, बल्कि लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ेगा।












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