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Indore MP News: पुलिस आरक्षक की दर्दनाक मौत: कोबरा सांप पकड़ते वक्त डंस लिया, वीडियो वायरल; पत्नी-दो बच्चे

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक ऐसी घटना घटी, जो पुलिसकर्मियों की बहादुरी और जोखिम भरी जिंदगी को बयां करती है। फर्स्ट बटालियन में तैनात एक आरक्षक कोबरा सांप को पकड़ने की कोशिश में डंस गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

यह हादसा शनिवार रात को हुआ, जब आरक्षक घोड़ों के अस्तबल में सांप की सूचना पर पहुंचा था। साथी पुलिसकर्मी ताली बजा रहे थे, लेकिन सांप ने अचानक हमला कर दिया। पूरी घटना का वीडियो भी सामने आ गया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आइए, इस पूरी घटना को सरल भाषा में विस्तार से समझते हैं, ताकि आप हर पहलू को जान सकें।

MP Indore police constable bitten while trying to catch a cobra video viral

एक सामान्य रात्रि ड्यूटी जो बनी अंतिम सफर

इंदौर का फर्स्ट बटालियन पुलिस का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां घुड़सवार दस्ते की ट्रेनिंग और रखरखाव होता है। यहां घोड़ों के लिए अलग अस्तबल है, जो रात के समय शांत रहता है। लेकिन 20 सितंबर 2025 की रात करीब 9 बजे, अस्तबल में हलचल मच गई। कुछ घोड़ों के बेचैन होने से पता चला कि वहां कोई सांप घुस आया है। सांप का नाम था कोबरा - एक जहरीला सरीसृप, जो भारत में सबसे खतरनाक सांपों में शुमार है।

आरक्षक संतोष चौधरी (47 वर्ष) को इसकी सूचना मिली। वह फर्स्ट बटालियन में 17 साल से सेवा दे रहे थे और इलाके में सांप पकड़ने के लिए मशहूर थे। बताया जाता है कि संतोष ने पहले भी कई बार सांप पकड़े थे - कभी जंगल में, कभी शहर की गलियों में। उनके साथी कहते हैं, "संतोष भैया को सांपों से डर ही नहीं लगता था। वे कहते थे, 'यह तो बस एक छोटा जीव है, पकड़ लो तो सब ठीक।'" इस बार भी, अधिकारी के कहने पर संतोष ने बिना हिचकिचाहट के अस्तबल की ओर कदम बढ़ाए। उनके साथी स्वामी प्रसाद साहू भी थे, जो बाद में उन्हें अस्पताल ले गए।

अस्तबल में अंधेरा था, लेकिन लाइट की मदद से संतोष ने सांप को देख लिया। कोबरा फन फैलाए लहरा रहा था। संतोष ने सावधानी से हाथ बढ़ाया, सांप को पकड़ने की कोशिश की। साथी पुलिसकर्मी इकट्ठा हो गए थे। वे संतोष की हिम्मत देखकर ताली बजा रहे थे, जैसे कोई खेल देख रहे हों। लेकिन अगले ही पल, सांप ने हमला बोल दिया। कोबरा ने संतोष की उंगली में डंस लिया। जहर तेजी से फैलने लगा। संतोष ने दर्द सहा, लेकिन सांप को छोड़ नहीं दिया। उन्होंने उसे कसकर पकड़ लिया और बाहर निकाल आए। लेकिन तब तक जहर शरीर में घुल चुका था।

यह पूरी घटना एक मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में साफ दिख रहा है कि संतोष सांप को पकड़ते हुए गिरते हैं, लेकिन साथी उन्हें संभाल लेते हैं। वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर शोक की लहर दौड़ गई। लोग लिख रहे हैं, "सच्चे सिपाही की शहादत। जय हिंद!"

अस्पताल में जद्दोजहद: तुरंत पहुंचाया गया, लेकिन जहर घातक साबित

सांप डसने के तुरंत बाद स्वामी प्रसाद साहू ने संतोष को गोद में उठाया और एमवाय अस्पताल की ओर दौड़े। इंदौर का एमवाय अस्पताल शहर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां सांप काटने के लिए एंटी-वेनम इंजेक्शन हमेशा उपलब्ध रहते हैं। डॉक्टरों ने तुरंत एक्शन लिया - जहर को रोकने के लिए इंजेक्शन दिए, लेकिन कोबरा का जहर बहुत तेज होता है।

कोबरा का जहर न्यूरोटॉक्सिक टाइप का होता है, जो नर्वस सिस्टम पर असर डालता है। डसने के बाद 30 मिनट से 6 घंटे के बीच लक्षण दिखने लगते हैं - सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, पैरों में सुन्नपन। संतोष के साथ भी यही हुआ। अस्पताल पहुंचते ही उन्हें वेंटिलेटर पर डाल दिया गया, लेकिन जहर इतना घातक था कि इलाज के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया। सदर बाजार पुलिस के अनुसार, मौत रात करीब 11 बजे हुई।

घटना की खबर फैलते ही कई वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे। फर्स्ट बटालियन के कमांडेंट और अन्य अफसर रात भर परिवार के साथ रहे। संतोष इंदौर के ही रहने वाले थे। उनका घर सदर बाजार इलाके में था। परिवार में पत्नी, एक बेटा (जो पढ़ाई कर रहा है) और एक बेटी (शादीशुदा) है। पत्नी ने बताया, "संतोष हमेशा कहते थे कि ड्यूटी में जोखिम तो है, लेकिन सेवा ही सब कुछ है। आज घर सूना लग रहा है।" बेटा रोते हुए बोला, "पापा सांप पकड़ने में एक्सपर्ट थे, लेकिन आज..." परिवार को सरकारी सहायता का आश्वासन दिया गया है।

संतोष चौधरी: 17 साल की निष्ठा, सांप पकड़ने का 'एक्सपर्ट'

संतोष चौधरी 2008 में पुलिस सेवा में भर्ती हुए थे। फर्स्ट बटालियन में वे घुड़सवार दस्ते का हिस्सा थे, जहां घोड़ों की देखभाल के साथ-साथ इलाके में गश्त का काम होता है। लेकिन संतोष की खासियत थी सांप पकड़ना। पुलिसकर्मी बताते हैं कि उन्होंने कम से कम 10-12 सांप पकड़े हैं - कभी बैरक में, कभी ट्रेनिंग ग्राउंड पर। एक बार तो उन्होंने एक रसेल वाइपर (एक और जहरीला सांप) को नंगे हाथ पकड़कर वाइल्डलाइफ टीम को सौंपा था।

संतोष का जन्म इंदौर में ही हुआ था। वे एक साधारण परिवार से थे, लेकिन पुलिस यूनिफॉर्म पहनकर उन्होंने सबका सिर ऊंचा कर दिया। उनके साथी कहते हैं, "वे हमेशा हंसमुख रहते थे। ड्यूटी के बाद परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते थे।" 17 साल की सेवा में उन्हें कई प्रमाण-पत्र मिले, लेकिन यह आखिरी ड्यूटी उनके लिए अंतिम साबित हुई।

कोबरा का खतरा: क्यों इतना घातक, और कैसे बचें?

भारत में सांप काटने से हर साल हजारों मौतें होती हैं। एनसीआरबी के अनुसार, 2024 में ही 50,000 से ज्यादा मामले दर्ज हुए, जिनमें कोबरा का बड़ा हाथ है। कोबरा को 'बिग फोर' सांपों में गिना जाता है - कोबरा, कृत्र, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर। इनका जहर घाव पर असर नहीं डालता, बल्कि पूरे शरीर को लकवा मार देता है।

डॉक्टर बताते हैं कि डसने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। एंटी-वेनम 1-2 घंटे में दिया जाए तो 90% मामलों में बचाव हो जाता है। लेकिन देरी हो तो 24 घंटे के अंदर मौत निश्चित है। संतोष के मामले में, डसने से अस्पताल तक का समय कम था, लेकिन जहर की तीव्रता ने सब बिगाड़ दिया।

सावधानियां बरतें:

  • घर-आंगन साफ रखें: सांप अंधेरे और गंदगी में छिपते हैं।
  • रात में सावधानी: ग्रामीण इलाकों में टॉर्च जलाकर चलें।
  • डसने पर: घाव को न रगड़ें, न काटें। तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
  • पुलिसकर्मियों के लिए: ट्रेनिंग में सांप पकड़ने की प्रैक्टिस, लेकिन प्रोफेशनल हेल्प लें।

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