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MP News: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, MP के हजारों कर्मचारियों को मिलेगा 400 करोड़ से ज्यादा का एरियर

MP News Highcourt: मध्य प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट से बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड के दौरान वेतन में की गई कटौती को अवैध और असंवैधानिक करार देते हुए राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि जिन कर्मचारियों की सैलरी काटी गई है, उन्हें पूरा वेतन एरियर सहित लौटाया जाए। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले का सीधा असर 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि पर पड़ेगा।

यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आया है, जो पिछले कई वर्षों से "कम वेतन में पूरा काम" करने को मजबूर थे।

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2019 का नियम बना कर्मचारियों की परेशानी की जड़

दरअसल, साल 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने नई भर्तियों के लिए एक विवादास्पद नियम लागू किया था। इस नियम के तहत कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में पूरा वेतन न देकर-

  • पहले वर्ष 70%
  • दूसरे वर्ष 80%
  • तीसरे/चौथे वर्ष 90% वेतन, दिया जा रहा था।

हालांकि, कर्मचारियों से काम 100 प्रतिशत लिया जा रहा था। इस फैसले को कर्मचारियों ने शुरू से ही अन्यायपूर्ण बताया और इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: पूरा काम, तो पूरा वेतन

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति दीपक खोट) ने 2019 के सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

अदालत ने साफ कहा- "जब सरकार कर्मचारियों से 100 प्रतिशत कार्य ले रही है, तो प्रोबेशन के नाम पर वेतन में कटौती का कोई औचित्य नहीं है।" कोर्ट ने इसे "समान काम के लिए समान वेतन" के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन माना।

भेदभाव का खुलासा: MPPSC और ESB भर्ती में दो नियम

फैसले के दौरान हाईकोर्ट ने एक और अहम पहलू पर ध्यान दिया। अदालत ने पाया कि- MPPSC से चयनित अधिकारियों को केवल 2 साल का प्रोबेशन, पहले दिन से पूरा वेतन, जबकि कर्मचारी चयन मंडल (ESB) से भर्ती कर्मचारियों को 3 से 4 साल तक प्रोबेशन, कटौती वाला वेतन मिल रहा था। कोर्ट ने इसे सीधा भेदभाव, नैसर्गिक न्याय के खिलाफ और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया।

शिवराज सरकार का अधूरा वादा भी चर्चा में

साल 2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले शिवराज सरकार ने घोषणा की थी कि-

  • प्रोबेशन पीरियड 4 साल से घटाकर
  • फिर से 2 साल किया जाएगा

लेकिन यह घोषणा कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी। कर्मचारियों का आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ता रहा और अंततः मामला कोर्ट तक पहुंच गया।

एरियर भुगतान पर सख्त आदेश, एकमुश्त लौटानी होगी राशि

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि-

  • जिन कर्मचारियों का वेतन 2019 के नियम के तहत काटा गया
  • उन्हें 100% वेतनमान के अनुसार पूरी राशि एरियर में लौटाई जाए
  • इसका मतलब है कि कर्मचारियों को एकमुश्त लाखों रुपये तक का भुगतान मिल सकता है।

अब आगे क्या? सरकार के सामने दो रास्ते

सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार इस फैसले को लेकर मंथन कर रही है-

  • हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाए, या
  • कर्मचारियों को एरियर का भुगतान किया जाए
  • इस पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्तर पर होना है।

कितने कर्मचारियों को मिलेगा फायदा?

हालांकि अभी आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन अनुमान है कि-

  • हजारों कर्मचारी
  • विभिन्न विभागों में
  • 2019 के बाद हुई भर्तियों से जुड़े
  • इस फैसले से सीधे लाभान्वित होंगे।

कर्मचारी संगठनों में खुशी, सरकार पर दबाव बढ़ा

हाईकोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर है। वहीं सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह बिना देरी किए कर्मचारियों को उनका हक लौटाए। एक ओर जहां यह फैसला कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर यह सरकार की नीति और वादों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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