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MP News: सीहोर में किसान की बेबसी, 40 पैसे किलो प्याज पर 50 कट्टियां सड़क पर फेंकीं, सीएम से की ये मांग

MP News: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के पूर्णिया गांव से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जो किसानों की बेबसी और आर्थिक हताशा की जीती-जागती तस्वीर पेश करती है। प्याज की फसल बेचने पहुंचे एक किसान ने मंडी में 40 पैसे प्रति किलो के घाटे वाले दाम देखकर अपनी पूरी 50 कट्टियां (लगभग 2 टन) सड़क पर फेंक दीं।

40 किलो की एक कट्टी मात्र 10 रुपये में बिक रही थी, जिससे ट्रॉली-ट्रैक्टर का भाड़ा भी नहीं निकल पा रहा था। किसान ने इसे "मेहनत का अपमान" बताते हुए मंडी परिसर के बाहर सड़क जाम कर विरोध जताया।

MP Farmers in Sehore are helpless throwing sacks on road demanding action from CM mohan yadav

यह घटना प्रदेश में प्याज की कीमतों में आई भारी गिरावट का प्रतीक है, जहां मंदसौर, उज्जैन और सीहोर जैसे जिलों में किसान 1-2 रुपये किलो के भाव पर फसल बेचने को मजबूर हैं। समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से अपील की है कि प्याज को तत्काल भावांतर योजना में शामिल किया जाए। मेवाड़ा ने कहा, "सोयाबीन की फसल पहले ही बर्बादी का शिकार हो चुकी है, अब प्याज ने किसानों को आर्थिक संकट में धकेल दिया। सरकार खरीद शुरू करे, वरना ऐसी घटनाएं बढ़ेंगी।"

घटना का पूरा विवरण: सुबह मंडी पहुंचे, शाम तक सड़क पर फेंकी फसल

पूर्णिया गांव के किसान रामस्वरूप पटेल (उम्र 52 वर्ष) ने पिछले तीन महीनों की मेहनत से उगाई प्याज की फसल बेचने के लिए बुधवार सुबह ट्रैक्टर-ट्रॉली लादकर सीहोर कृषि उपज मंडी पहुंचे। लेकिन मंडी में नीलामी शुरू होते ही सदमा लग गया - 40 किलो की कट्टी पर बोली मात्र 10 रुपये लगी। यानी प्रति किलो 25 पैसे से भी कम। रामस्वरूप ने बताया, "प्याज उगाने में बीज, खाद, मजूरी पर 25-30 रुपये किलो खर्च आया। भाड़ा भी 500 रुपये था, लेकिन बिक्री से 500 रुपये भी न निकलते। यह मेहनत का मजाक है।"

निराश होकर रामस्वरूप ने ट्रॉली से 50 कट्टियां उतारकर मंडी के बाहर सड़क पर फेंक दीं। सड़क पर लुढ़कती प्याज की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।

रामस्वरूप ने वनइंडिया हिंदी से कहा, "मैंने 2 एकड़ में प्याज लगाई थी। अच्छी पैदावार हुई, लेकिन बाजार ने लूट लिया। अब घर लौटकर क्या मुंह दिखाऊं? सरकार भावांतर योजना में प्याज शामिल करे, ताकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिले।"

प्याज कीमतों में गिरावट का कारण: अधिक पैदावार और निर्यात प्रतिबंध

मध्य प्रदेश प्याज उत्पादन में अग्रणी राज्यों में शुमार है, लेकिन इस सीजन में बेमौसम बारिश और अधिक पैदावार ने कीमतें धड़ाम कर दीं। मंदसौर, नीमच, रतलाम और सीहोर में प्याज 1-2 रुपये किलो बिक रही है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. राकेश शर्मा ने बताया, "केंद्र सरकार के निर्यात प्रतिबंध (सितंबर 2025 से) ने बाजार में आपूर्ति बढ़ा दी। किसान को लागत मूल्य (25-30 रुपये/किलो) भी नहीं मिल रहा।"

प्रदेश में पिछले महीने 5 लाख टन से अधिक प्याज की आवक हुई, लेकिन खरीदार कम। उज्जैन मंडी में भी किसानों ने मई 2025 में फ्री प्याज बांटा था। सोशल मीडिया पर #OnionCrisisMP ट्रेंड कर रहा है, जहां किसान सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

सोयाबीन बर्बादी के बाद प्याज संकट: किसानों की कमर टूटी

यह घटना सीहोर में किसानों के लिए दोहरी मार है। अगस्त 2025 में बेमौसम बारिश से सोयाबीन फसल बर्बाद हो गई, जिसमें हजारों किसानों को 50% तक नुकसान हुआ। अब प्याज ने आग पर तेल डाल दिया। सीहोर जिले में 20,000 से अधिक किसान प्याज उत्पादक हैं, और इस सीजन में 10 लाख टन उत्पादन अनुमानित था। जिला कृषि अधिकारी ने कहा, "कीमतें 5-7 रुपये/किलो तक पहुंचनी चाहिए थीं, लेकिन बाजार की मंदी ने सब उलट दिया।"

एम.एस. मेवाड़ा, जो किसान संगठनों से जुड़े हैं, ने कहा, "भावांतर योजना में सोयाबीन, दालें शामिल हैं, लेकिन प्याज क्यों नहीं? मुख्यमंत्री जी और शिवराज जी से अपील है - तुरंत खरीद शुरू करें। अन्यथा, किसान आत्महत्या के रास्ते पर होंगे।" मेवाड़ा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भी लिखा है।

राजनीतिक रंग: विपक्ष ने घेरा, सरकार ने MSP पर खुलासा देने का वादा

कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार की नाकामी बताया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ट्वीट किया, "प्याज 40 पैसे किलो? यह किसान हत्या है। मोहन सरकार भावांतर में प्याज शामिल करे।" प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितू पटवारी ने कहा, "शिवराज जी केंद्र में कृषि मंत्री हैं, फिर भी MP के किसान सड़क पर फेंक रहे फसल।"

भाजपा सरकार ने सफाई दी। कृषि मंत्री अइलूजा ने कहा, "कीमतें बाजार निर्धारित करती हैं। हम भावांतर योजना की समीक्षा कर रहे हैं। प्याज को शामिल करने पर जल्द फैसला लेंगे।" मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, "किसानों को राहत के लिए 100 करोड़ का पैकेज तैयार।"

भावांतर योजना क्या है? प्याज शामिल करने से क्या फायदा?

भावांतर भुगतान योजना (2017 से) किसानों को MSP और बाजार मूल्य के अंतर की राशि देती है। वर्तमान में सोयाबीन, दालें, सरसों आदि शामिल हैं। प्याज शामिल होने पर:

  • - MSP 25-30 रुपये/किलो तय होगा।
  • - घाटे की भरपाई सरकार करेगी।
  • - किसानों को कम से कम 50% लाभ सुनिश्चित।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज को शामिल करने से 5 लाख किसानों को फायदा होगा।

किसान की पुकार, सरकार कब सुनेगी?

सीहोर की यह घटना मध्य प्रदेश के किसानों की बदहाली को उजागर करती है। 50 कट्टियां सड़क पर फेंकना सिर्फ एक किसान का गुस्सा नहीं, बल्कि पूरे समुदाय का दर्द है। क्या भावांतर में प्याज शामिल होगा? या किसानों को फिर इंतजार करना पड़ेगा? वनइंडिया हिंदी किसानों की आवाज बनेगा। क्या आपके इलाके में भी प्याज संकट है? कमेंट में बताएं।

(रिपोर्ट: वनइंडिया हिंदी संवाददाता)

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