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MP के इस मंदिर में होती है खंडित शिवलिंग की पूजा, जानिए क्या है महाकाल के उपलिंग की मान्यता?

सतना जिला मुख्यालय से महज 40 किलोमीटर दूर बिरसिंहपुर में स्थित भगवान भोलेनाथ का एक ऐसा मंदिर है। जहां स्वयंभू खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती हैं। इसे गैवीनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर का जिक्र पद्म पुराण के पाताल खंड में भी लिखा गया है। सावन मास के सोमवार में यहां प्रतिवर्ष लाखों भक्त पहुंचते हैं। गैवीनाथ धाम को उज्जैन महाकाल का उपलिंग भी बोला जाता है।

खंडित शिवलिंग की होती है पूजा

खंडित शिवलिंग की होती है पूजा

जिले के बिरसिंहपुर में शिव मंदिर है जहां खंडित शिवलिंग की पूजा होती है, इस शिवलिंग को उज्जैन महाकाल का दूसरा उपलिंग बोला जाता है। यह गैवीनाथ धाम के नाम से यह मंदिर सुप्रसिद्ध है। यहां भगवान भोलेनाथ के खंडित शिवलिंग की पूजा- पाठ की जाती है। सावन महीना और महाशिवरात्रि में यहां जिला समेत देश के कोने कोने से भी लाखों की तादाद में भक्त पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं। इस शिवलिंग का जिक्र पाताल पुराण में किया गया है।

सपनों में आए महाकाल

सपनों में आए महाकाल

की मान्यता है कि भगवान महाकाल ने राजा वीर सिंह को स्वप्न में दर्शन दिए और देवपुर में दर्शन देने की बात कही। इसके बाद इसी क्षेत्र में गैवी यादव नामक व्यक्ति के घर में एक दुर्घटना सामने आई। घर के चूल्हे से रात को शिवलिंग निकला। जिसे गैवी यादव की मां मूसल से ठोक कर अंदर कर दिया। शिवलिंग फिर निकला दोबारा से उसे अंदर कर दिया गया। यह सिलसिला बीते कई दिनों तक चलता रहा। 1 दिन महाकाल फिर राजा के स्वप्न में आए और कहा मैं तुम्हारी पूजा और निष्ठा से प्रसन्न होकर तुम्हारे क्षेत्र में प्रकट होना चाहता हूं, लेकिन गैवी यादव मुझे निकलने नहीं देता।

गैवी यादव का कराया गया घर खाली

गैवी यादव का कराया गया घर खाली

राजा ने गैवी यादव को बुलवाया स्वप्न की बात बताई, इसके बाद गैवी के घर की उस स्थान को खाली कराया गया। राजा ने उस जगह पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया। भगवान महाकाल के कहने पर शिवलिंग का नाम गैवीनाथ धाम रख दिया गया। तभी से भगवान भोलेनाथ को गैवीनाथ के नाम से जाना जाने लगा।

शिवलिंग की मान्यता

शिवलिंग की मान्यता

क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार यहां पर चारों धाम से लौटने वाले भक्त भगवान भोलेनाथ के दर गैवीनाथ धाम पहुंचकर चारों धाम का जल चढ़ाते हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि, जितना चारों धाम का दर्शन लाभ का पुण्य मिलता है उससे कहीं ज्यादा गैवीनाथ में जल चढ़ाने से मिलता है। लोग कहते हैं कि, चारों धाम का जल अगर यहां नहीं चढ़ा तो चारों धाम की यात्रा पूरी नहीं मानी जाती है। यहां पर पूरे क्षेत्र से भक्त पहुंचते हैं। हर सोमवार यहां लाखों भक्त पहुंचकर भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं। मन्नत मांगते हैं। यहां पहुंचने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।

शिवलिंग की किवदंती

शिवलिंग की किवदंती

यहां की किवदंती है कि, यह स्वयंभू स्थापित शिवलिंग है। जो कि खंडित है। यहां मुगल शासक औरंगजेब ने सोने के लालच में इस शिवलिंग को खंडित करने की कोशिश की थी। इसमें उसने टाकी मारी थी। जब औरंगजेब ने पहली टाकी मारी थी तो दूध निकला था। दूसरी टाकी में खून, तीसरी टाकी में मवाद, चौथी टाकी में फूल बेलपत्र आदि और पांचवी टाकी में जीवजंतु निकले, इसके बाद औरंगजेब को वहां से जाना पड़ा। भगवान भोलेनाथ से छमा मांगनी पड़ी। तब से लेकर अब तक यहा खंडित शिवलिंग की पूजा पाठ की जाती हैं।

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