MP News: होली से पहले किसानों को 27,746 करोड़ की सौगात, शिखरधाम में पहली कृषि कैबिनेट, 7 जिलों पर फोकस
MP Agriculture Cabinet: होली से ठीक एक दिन पहले मध्य प्रदेश के किसानों-खासतौर पर निमाड़ और जनजातीय अंचल के किसानों-को बड़ी राहत मिली। डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट बैठक जनजातीय बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी स्थित शिखरधाम में आयोजित हुई।
करीब 25 मंत्रियों की मौजूदगी में भीलटदेव मंदिर की तलहटी पर 8 एकड़ के गार्डन को अस्थायी मंत्रालय का रूप दिया गया। यह राज्य सरकार की छठी डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक थी, जिसका फोकस निमाड़ अंचल के सात जिलों-खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, झाबुआ और आलीराजपुर-की कृषि व विकास संबंधी जरूरतों पर रहा।

बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल के साथ बाबा भीलटदेव के दर्शन किए। इसके बाद वे जुलवानिया के भगोरिया हाट पहुंचे, जहां हजारों आदिवासी समाज के लोग जुटे थे। यहां उन्होंने स्थानीय पेय ताड़ी पर हल्के-फुल्के अंदाज में सवाल किया-"झाड़ से जिसे उतारकर पीते हैं, उसे क्या कहते हैं? मैं तो अनाड़ी हूं..."-भीड़ ने हंसते हुए "ताड़ी" कहा और माहौल आत्मीय हो गया।
16 योजनाएं, 27,746 करोड़ की मंजूरी
कृषि कैबिनेट में किसान कल्याण के लिए कुल 27,746 करोड़ रुपये की 16 योजनाओं को मंजूरी दी गई। प्रमुख फैसले-
- सरसों फसल भावांतर योजना में शामिल: बाजार भाव कम होने पर अंतर की राशि सीधे किसानों के खातों में।
- वरला और पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति।
- बड़वानी में आधुनिक कृषि उपज मंडी की स्थापना।
- खेतिया मंडी को आदर्श मंडी बनाने की योजना।
- नई मत्स्य पालन नीति: कोल्ड चेन, मार्केटिंग स्ट्रक्चर, रेफ्रिजरेटेड वैन और फीड प्लांट पर सब्सिडी।
- महाविद्यालयों में एग्रीकल्चर सब्जेक्ट पढ़ाने की तैयारी।
- भीलटदेव क्षेत्र का पर्यटन विकास।
- नेशनल शूटिंग चैंपियन वैष्णवी माहुले के पिता को शूटिंग अकादमी के लिए 5 लाख रुपये की घोषणा।

मुख्यमंत्री ने कहा, "यह कृषि कैबिनेट किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता के लिए समर्पित है। खेत से बाजार तक आय बढ़ाने की विस्तृत योजना बनाई जा रही है, निमाड़ और जनजातीय अंचल पर विशेष फोकस है।"
क्यों खास रही यह बैठक?
यह प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट थी, वह भी जनजातीय अंचल में। कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, सहकारिता और मत्स्य विभागों ने फसल विविधीकरण, सिंचाई विस्तार, बीज-खाद उपलब्धता, बाजार भाव और आय वृद्धि पर रोडमैप पेश किया। सरकार का संदेश स्पष्ट था-होली पर किसानों को ठोस आर्थिक राहत।
जमीन पर असर और राजनीतिक प्रतिक्रिया
ग्रामीण इलाकों में सरसों को भावांतर में शामिल करने और मत्स्य पालन में सब्सिडी को बड़ा कदम माना जा रहा है। सिंचाई परियोजनाओं से निमाड़ में रबी व खरीफ दोनों सीजन में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। वहीं विपक्ष ने इसे "चुनावी सौगात" करार देते हुए कर्जमाफी, MSP पर खरीद और फसल बीमा क्लेम के त्वरित निपटारे की मांग दोहराई।
फिलहाल, 2 मार्च की इस ऐतिहासिक कृषि कैबिनेट से निकले फैसलों ने प्रदेश के लाखों किसानों में उम्मीद जगाई है। यदि योजनाएं समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो होली की यह सौगात वाकई आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का आधार बन सकती है।












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