MP News: 12 दिन बाद लापता अर्चना तिवारी कैसे मिली सुरक्षित, परिवार ने ली राहत की सांस, ग्वालियर में नया मोड़,
Missing Archana Tiwari: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक राहत भरी खबर ने सभी का ध्यान खींचा है। 12 दिनों से लापता 28 वर्षीय अर्चना तिवारी आखिरकार सुरक्षित मिल गई हैं। इंदौर में सिविल जज की तैयारी कर रही अर्चना, रक्षाबंधन के मौके पर अपने घर कटनी लौट रही थीं, जब वे नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन में भोपाल के पास अचानक गायब हो गई थीं।
इस घटना ने उनके परिवार, दोस्तों और स्थानीय प्रशासन को चिंता में डाल दिया था। लेकिन 19 अगस्त को अर्चना ने अपने परिवार से संपर्क किया और बताया कि वे ग्वालियर में सुरक्षित हैं। इस खबर ने न केवल उनके परिवार को राहत दी, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया। आइए, इस रहस्यमयी घटना की पूरी कहानी जानते हैं।

लापता होने की कहानी: एक साधारण यात्रा बनी रहस्य
अर्चना तिवारी, कटनी की रहने वाली एक होनहार युवती, इंदौर में रहकर सिविल जज की परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। 7 अगस्त 2025 को, वे रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के लिए अपने परिवार से मिलने कटनी के लिए नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन (AC-B3 कोच) में सवार हुई थीं। उनकी आखिरी लोकेशन नर्मदापुरम स्टेशन के पास देखी गई थी, लेकिन इसके बाद वे रहस्यमय ढंग से गायब हो गईं। उनका सामान ट्रेन में ही मिला, लेकिन अर्चना का कोई सुराग नहीं था।
परिवार ने तुरंत कटनी और भोपाल रेलवे पुलिस को सूचित किया। अर्चना के भाई, रवि तिवारी ने पुलिस को बताया, "हमने हर संभव जगह पर उनकी तलाश की। उनका फोन बंद था, और हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या हुआ।" परिवार ने मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) की आशंका जताई और CBI जाँच की माँग भी की। इस बीच
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित अर्चना तिवारी गुमशुदगी मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। ग्वालियर रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने भंवरपुरा थाने में तैनात आरक्षक राम सिंह तोमर को हिरासत में लिया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। अर्चना तिवारी, जो इंदौर में सिविल जज की तैयारी कर रही थीं, 7 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने के लिए नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन से कटनी के लिए रवाना हुई थीं, लेकिन भोपाल के पास रहस्यमयी ढंग से लापता हो गई थीं। इस मामले ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है, और अब राम सिंह तोमर का नाम सामने आने से जांच ने नई दिशा ले ली है।
राम सिंह तोमर का बयान: "मैं बेकसूर हूँ, मुझे फंसाया जा रहा है"
जीआरपी थाने में मंगलवार देर रात से चल रही पूछताछ में आरक्षक राम सिंह तोमर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, "मैं अर्चना से कभी नहीं मिला, आज तक अर्चना को मैंने फेस-टू-फेस नहीं देखा है। मैं अपने दोस्त विक्रम राजावत के जरिए उससे फोन पर बात करता था। अर्चना से मेरी केवल मोबाइल पर बात हुई है। मेरा इस मामले में कोई लेना-देना नहीं है, मुझे फंसाया जा रहा है। मैंने केवल उसका टिकट बुक कराया था, अर्चना कहां है, मुझे नहीं पता।" राम सिंह तोमर का यह बयान जांच को और उलझाने वाला साबित हो रहा है, क्योंकि पुलिस को उनकी और अर्चना के बीच पिछले छह महीनों से लंबी-लंबी फोन कॉल्स के सबूत मिले हैं।
जीआरपी की जांच: कॉल डिटेल्स ने खोला राज
पुलिस की जांच में सामने आया है कि राम सिंह तोमर और अर्चना तिवारी के बीच पिछले छह महीनों से नियमित रूप से फोन पर बातचीत हो रही थी। कॉल डिटेल्स की जांच में यह भी पता चला है कि अर्चना का इंदौर से ग्वालियर तक का ट्रेन टिकट राम सिंह तोमर ने ही बुक कराया था। इसके अलावा, कुछ सूत्रों के अनुसार, अर्चना ने संभवतः इस टिकट का उपयोग नहीं किया, जिसने मामले को और रहस्यमय बना दिया है। जीआरपी ने राम सिंह तोमर का मोबाइल जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है, ताकि उनकी बातचीत और अन्य डिजिटल सबूतों का विश्लेषण किया जा सके।
अर्चना के परिजनों का दावा: "वह सुरक्षित है"
इस बीच, अर्चना तिवारी के मुंह बोले भाई और युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अंशुल मिश्रा ने दावा किया है कि अर्चना ने उनसे फोन पर बात की है और वह पूरी तरह सुरक्षित है। अंशुल मिश्रा ने कहा, "अर्चना ने हमें फोन पर बताया कि वह सुरक्षित है। हम उसे लेने के लिए ग्वालियर रवाना हो गए हैं।" हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अर्चना ने कहां से फोन किया या वह वर्तमान में कहां है। जीआरपी ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है और उनका कहना है कि अर्चना का अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।
पुलिस का बयान: जांच हर पहलू पर
ग्वालियर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) लाल कृष्ण चांदनी ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा, "हम राम सिंह तोमर से पूछताछ कर रहे हैं। अर्चना तिवारी के लापता होने के बाद से जीआरपी और जिला पुलिस हर संभव कोण से जांच कर रही है। कॉल डिटेल्स और टिकट बुकिंग के आधार पर राम सिंह तोमर को हिरासत में लिया गया है। हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अर्चना और तोमर के बीच क्या संबंध थे और अर्चना वर्तमान में कहां है।" एएसपी ने यह भी बताया कि अर्चना की आखिरी लोकेशन भोपाल के पास नर्मदा ब्रिज के आसपास मिली थी, जिसके बाद उनका फोन बंद हो गया।
अर्चना की गुमशुदगी: 13 दिन बाद भी रहस्य बरकरार
अर्चना तिवारी 7 अगस्त को इंदौर से नर्मदा एक्सप्रेस के थर्ड एसी कोच में सवार हुई थीं। भोपाल तक वह अपनी सीट पर थीं, और उनकी चाची से फोन पर बात भी हुई थी। लेकिन इसके बाद उनका फोन नर्मदापुरम के पास नर्मदा ब्रिज पर बंद हो गया। जब ट्रेन कटनी पहुंची, तो अर्चना की बर्थ पर उनका बैग मिला, जिसमें राखी और मिठाई थी, लेकिन वह स्वयं गायब थीं। इस घटना ने उनके परिवार और पुलिस को चिंता में डाल दिया। जीआरपी ने भोपाल, नर्मदापुरम, इटारसी, जबलपुर, और कटनी में व्यापक तलाशी अभियान चलाया, जिसमें ड्रोन, गोताखोर, और स्निफर डॉग्स की मदद ली गई। इसके बावजूद, अर्चना का कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
परिवार की चिंता और मांग
अर्चना के परिवार ने पुलिस से जांच तेज करने की मांग की है। उनके ताऊ बाबू प्रकाश तिवारी, जो बीमारी से जूझ रहे हैं, ने कहा, "हमारी बेटी को जल्द से जल्द ढूंढा जाए। यह मामला मानव तस्करी से भी जुड़ा हो सकता है, लेकिन पुलिस इस दिशा में ध्यान नहीं दे रही।" परिवार का कहना है कि अर्चना के साथ कोई अनहोनी हुई हो सकती है, क्योंकि वह स्वेच्छा से गायब नहीं हो सकती।
ग्वालियर कनेक्शन: क्या सुलझेगा रहस्य?
राम सिंह तोमर का नाम सामने आने और उनके द्वारा टिकट बुक किए जाने की जानकारी ने इस मामले में ग्वालियर को केंद्र में ला दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अर्चना और राम सिंह तोमर के बीच क्या रिश्ता था और क्या अर्चना वास्तव में ग्वालियर में है। अर्चना के परिजनों के दावे और पुलिस की जांच के बीच विरोधाभास ने इस मामले को और जटिल बना दिया है।
आगे क्या?
जीआरपी और जिला पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अर्चना की तलाश के लिए पूरे भारत में ऑल इंडिया सर्च ऑर्डर जारी किया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच कर रही है। राम सिंह तोमर से पूछताछ में मिलने वाले जवाब इस मामले को सुलझाने में अहम हो सकते हैं। दूसरी ओर, अर्चना के परिजनों का दावा कि वह सुरक्षित है, ने उम्मीद की किरण जगाई है, लेकिन जब तक अर्चना सामने नहीं आती, यह रहस्य बना रहेगा।
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