भोपाल में 25 लाख मुस्लिम क्यों इकट्ठे हुए? दुनिया का सबसे बड़ा तब्लीगी मरकज बना ईंट खेड़ी – 78वें आलमी इज्तिमा
भोपाल के ईंट खेड़ी (इस्लामनगर) में आयोजित 78वें आलमी तब्लीगी इज्तिमा का आज सुबह 10 बजे भावपूर्ण माहौल में भव्य समापन हो गया। लेकिन सवाल यह है कि 25 लाख से अधिक मुस्लिम यहां क्यों इकट्ठे हुए? जवाब है - दीन की तालीम, आत्म-सुधार (इस्लाह), अमन-भाईचारे का पैगाम और अल्लाह की इबादत।
अंतिम दिन मौलाना साद कांधलवी ने अमन, भाईचारे और इंसानी भलाई की दुआ फरमाई, जिसके साथ पूरा मैदान सन्नाटे में डूब गया और लाखों हाथ एक साथ उठे। आयोजकों के अनुसार, यह इज्तिमा की सबसे बड़ी भीड़ों में से एक थी, जो भोपाल को दुनिया का सबसे बड़ा तब्लीगी मरकज साबित करती है।

तीन दिनों तक चले इस धार्मिक महासम्मेलन ने देश-विदेश से आए जायरीनों को एकता का खूबसूरत पैगाम दिया। आइए, जानते हैं - क्यों इकट्ठे हुए, क्या हुआ इज्तिमा में, और भोपाल क्यों बना ग्लोबल सेंटर?
क्यों इकट्ठे हुए 25 लाख मुस्लिम? तब्लीगी जमात का पैगाम और उद्देश्य
तब्लीगी इज्तिमा तब्लीगी जमात का वार्षिक धार्मिक सम्मेलन है, जो 1926 में मौलाना इलियास कांधलवी द्वारा शुरू हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य:
- दावत-ओ-तब्लीग: मुसलमानों को दीन की बुनियाद (नमाज, अख्लाक, कुरान) सिखाना।
- इस्लाह-ए-नफ्स: आत्म-सुधार, गुनाहों से तौबा।
- एकता का पैगाम: सभी फिरकों को एक मंच पर लाना, अमन-भाईचारा।
- इंसानी भलाई: दुआ पूरी मानवता के लिए।
मौलाना साद (जमात के मौजूदा अमीर) ने कहा, "इज्तिमा इबादत का समुद्र है। यहां लोग दुनिया की भागदौड़ छोड़कर अल्लाह की याद में डूबते हैं।" 25 लाख की भीड़ ने साबित किया कि तब्लीग का पैगाम कितना जीवंत है। जायरीन 3-40 दिनों की जमातों में निकलते हैं, गांव-शहरों में दावत देते हैं।
भीड़ का ब्रेकडाउन:
- भारत से: 24 लाख+ (28 राज्य, मध्य प्रदेश से 5 लाख)।
- विदेश से: 1 लाख+ (पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी, इंडोनेशिया, UK, USA)।
- महिलाएं: 6 लाख+ (अलग पंडाल)।
- युवा: 50% से अधिक (18-35 आयु)।
- तीन दिनों का कार्यक्रम: तालीम, बयान और दुआ का सिलसिला
इज्तिमा 15 नवंबर से शुरू हुआ:
- दिन 1 (आगमन): जायरीन का पहुंचना, पंडाल सजावट। शाम को पहला बयान।
- दिन 2 (तालिमात): 6 बयानात - नमाज की अहमियत, सदाचार, परिवार सुधार। गश्त (घर-घर दावत)।
- दिन 3 (समापन): सुबह 10 बजे दुआ। मौलाना साद की दुआ में अमन की अपील।
खास पल: दुआ शुरू होते ही सन्नाटा। लाखों सजदे, आंसू। दुआ पूरी इंसानियत के लिए - "युद्ध बंद हो, गरीबी मिटे, भाईचारा कायम हो।"
भोपाल 1949 से इज्तिमा का स्थायी केंद्र है। कारण:
- क्षेत्रफल: 400 एकड़ मैदान, 1 लाख+ पंडाल।
- कनेक्टिविटी: एयरपोर्ट (50 अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स), रेलवे (स्पेशल ट्रेनें)।
- सरकारी सहयोग: मध्य प्रदेश सरकार का फुल सपोर्ट - 5,000 पुलिस, 100 एम्बुलेंस।
- इतिहास: 78 साल, हर साल रिकॉर्ड भीड़। 2024 में 22 लाख, 2025 में 25 लाख+।
आयोजक हाजी अहमद कहते हैं, "दिल्ली का रायविंद अब छोटा पड़ गया। भोपाल ग्लोबल मरकज है।"
इंतजामों की मिसाल: 24x7 मेहनत, कोई हादसा नहीं
25 लाख की भीड़ संभालना आसान नहीं, लेकिन:
- ट्रैफिक: 2,000 पुलिस, 50 किमी डायवर्जन, 1 लाख वाहन पार्किंग।
- खाना-पानी: 200 लंगर, 10 लाख लीटर पानी रोज, 5 लाख रोटी।
- मेडिकल: 1,000 डॉक्टर, 50 अस्पताल, फ्री दवाइयां।
- वॉलंटियर्स: 30,000 युवा, 24 घंटे ड्यूटी।
- सुरक्षा: ड्रोन, CCTV, कोई अप्रिय घटना नहीं।
- पर्यावरण: प्लास्टिक फ्री, 50,000 पौधे लगाए।
- कलेक्टर ने कहा, "विश्व स्तरीय आयोजन। भोपाल गर्व करता है।"
राजनीतिक-सामाजिक पैगाम: अमन की मिसाल
- CM मोहन यादव: "इज्तिमा सद्भाव का प्रतीक।"
- मौलाना साद: "दुआ सबके लिए।"
- जायरीन: "जीवन बदल गया।"
इज्तिमा ने साबित किया - धार्मिक आयोजन शांति ला सकते हैं।
आगे: 79वें इज्तिमा की तैयारी
जायरीन घर लौटकर दावत जारी रखेंगे। भोपाल फिर तैयार होगा।
भोपाल का इज्तिमा अमन की मिसाल। दुआ कबूल हो!












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