MP: कोई नहीं सुन रहा ट्रेडमैन सिपाहियों का दर्द, प्रमोशन के बावजूद अफसरों के धो रहे हैं कपड़े
भोपाल, 10 मई 2022: मध्य प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए सिपाही सालों से अफसरों की हजामत बना रहे हैं और उनके कपड़े भी धो रहे हैं। कुछ अफसर तो अपने सिपाही (कुक) को छोड़ना ही नहीं चाहते। भर्ती होने के बाद कुछ सिपाहियों का प्रमोशन तो हुआ, लेकिन काम और स्थान नहीं बदला। मतलब कपड़े धोने वाला आरक्षक प्रमोशन पाकर एसआई तो बना, लेकिन काम कपड़े धोने का ही कर रहा है।
दरअसल, वर्ष 2012 में पुलिस महानिदेशक के एक आदेश के बाद ट्रेड मैन पुलिस के जवानों की जनरल ड्यूटी में संविलियन को बंद कर दिया गया। मतलब ट्रेडमैन सिपाही प्रमोशन होने के बाद भी जनरल ड्यूटी नहीं कर सकता है।

गृह मंत्री कर चुके अनुशंसा, डीजीपी दबाकर बैठे
मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने 24 मार्च 2022 को एक पत्र जारी करके ट्रेडमैन से जीडी में संविलियन प्रारंभ करने के लिए अनुशंसा की, किंतु उस पत्र पर विभाग ने कार्रवाई ही नहीं की। जबकि विभाग का मुखिया चाहता है कि संविलियन प्रारंभ हो। जब वनइंडिया हिंदी के रिपोर्टर ने इस विषय पर डीजीपी साहब से बात करने की कोशिश की तो डीजीपी ने कोई जवाब नहीं दिया। इसका मतलब हुआ कि मध्य प्रदेश में पुलिस अधिकारी ट्रेडमैन सिपाहियों से अपनी गुलामी करवाना चाहते हैं।

'अफसरों की पत्नियां भी परेशान करती हैं'
पूर्व मंत्री और विधायक जीतू पटवारी को लिखित पत्र में एक ट्रेड आरक्षक ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि अधिकारियों के बंगले पर ड्यूटी लगाने के साथ उनसे झाड़ू-पोछा, झूठे बर्तन धुलवाए जाते हैं। कई बार अधिकारियों की पत्नियों द्वारा लगातार उन्हें अपशब्द और प्रताड़ना भी दी जाती है। अधिकारियों के यहां ड्यूटी होने से ट्रेड आरक्षक को को हमेशा निलंबन एवं आर्थिक नुकसान का डर बना रहता है जिससे वह मानसिक रूप से परेशान रहते हैं।

'अफसरों का निजी स्वार्थ आड़े आया'
आपको बता दें कि, ट्रेड मैन सिपाही संविलियन के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। यह प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है। राजधानी में एसएएफ की 7,23 व 25 बटालियन में पदस्थ ज्यादातर ट्रेडमैन सिपाही डीजीपी, एडीजी, आईजी और डीआईजी व एसपी स्तर के अफसरों के बंगलों पर उनकी सेवा में लगे हैं। इनमें ट्रेडमैन धोबी, कुक, सफाई कर्मी, नाई, मिस्त्री, दर्जी और ड्राइवर शामिल हैं। ट्रेडमैन सिपाहियों का कहना है कि वे भी फील्ड में अपनी सेवाएं देना चाहते हैं। उनका तर्क है कि अफसरों ने अपने स्वार्थ के लिए संविलियन पर रोक लगा रखी है। ट्रेड मैन सिपाही पुरानी जीओपी 59/93 को फिर से शुरू करने के लिए तत्कालीन महानिदेशक विवेक जौहरी को आवेदन दिया था।

हो गए बरसों, लेकिन काम वही पुराना
जिला पुलिस बल में राजकुमार प्रजापति-दर्जी, ढोल राज सिंह खल्लासी, गुड्डू-खल्लासी, प्रभु दयाल- मिस्त्री, किशोर परते-ड्राइवर, राजा मियां-दर्जी, देवेंद्र परिहार-मोची, इनके अलावा कई ट्रेडमैन सिपाही हैं जो जिला पुलिस लाइन से अफसरों की सेवा में है या कुछ स्थाई रूप से अफसरों के बंगलों पर तैनात हैं। इनकी नौकरी को 20 साल से ज्यादा हो चुके हैं। इनका हवलदार व एएसआई में प्रमोशन भी हुआ पर काम नहीं बदला।

पहले के नियम को क्यों बदला?
पुलिस मुख्यालय की पीओपी 5793 में नियम था कि एसएएफ या जिला बल में 5 साल की ट्रेडमैन में सर्विस पूरी करने के बाद सिपाही का जीडी सिपाही में संविलियन हो सकता था। जीडी में संविलियन के बाद से फील्ड में पोस्टिंग की जा सकती थी। सन् 2012 तक संविलियन की व्यवस्था थी, लेकिन वर्ष 2012 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ने बिना किसी कारण एक आदेश निकालकर बंद कर दिया।












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