कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी पर बवाल: उमंग सिंघार समर्थकों का प्रदर्शन, बंगले के बाहर पोस्टर दहन
kailash vijayvargiya: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
इस बयान के विरोध में उमंग सिंघार के समर्थकों और आदिवासी युवाओं ने भोपाल में मंत्री के बंगले के बाहर प्रदर्शन करते हुए उनका पोस्टर जलाया। प्रदर्शनकारियों ने "कैलाश विजयवर्गीय मुर्दाबाद", "उमंग सिंघार जिंदाबाद" और "आदिवासी जिंदाबाद" के नारे लगाए।

कैसे शुरू हुआ विवाद
19 फरवरी 2026 को विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भगीरथपुरा क्षेत्र में विस्थापन और 35 परिवारों के बेघर होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पुनर्वास और राहत को लेकर जवाब मांगा। इसी दौरान बहस के बीच मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की ओर से "औकात में रहो" जैसी टिप्पणी किए जाने का आरोप लगा, जिससे सदन में जोरदार हंगामा हुआ और कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही।
उमंग सिंघार का तीखा पलटवार
सदन के बाहर उमंग सिंघार ने कहा कि वे जनता की आवाज उठा रहे हैं और यह टिप्पणी केवल उनके नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की जनता के सम्मान का सवाल है। उन्होंने सरकार पर अहंकार और असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और सवाल पूछना उनका कर्तव्य है।
बंगले के बाहर प्रदर्शन और पोस्टर दहन
शाम होते-होते विवाद सड़कों पर उतर आया। उमंग सिंघार के समर्थक और कुछ आदिवासी युवा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के भोपाल स्थित बंगले के बाहर एकत्र हुए। उन्होंने मंत्री का पोस्टर जलाया और जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह बयान आदिवासी समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है और मंत्री को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

विपक्ष का आरोप: अस्मिता पर चोट
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इसे आदिवासी अस्मिता का मुद्दा बताते हुए सदन में माफी की मांग की। विपक्ष का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए और इस तरह की टिप्पणी लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
सत्ता पक्ष की सफाई
सत्ता पक्ष के नेताओं ने कहा कि बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी कहा कि उनका किसी का अपमान करने का इरादा नहीं था और टिप्पणी बहस के दौरान कही गई बात का हिस्सा थी।
राजनीतिक असर और आगे की स्थिति
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में तीखी बयानबाजी को जन्म दिया है। आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि माफी नहीं दी गई तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में विधानसभा और सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।












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