सिंधिया का खुलासा : कांग्रेस ने मुझे डिप्टी सीएम पद का ऑफर दिया था, इस वजह से नहीं किया स्वीकार
ग्वालियर। कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन करने के करीब पांच माह बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चुप्पी तोड़ी है और बड़ा खुलासा किया है। भाजपा के तीन दिवसीय सदस्यता अभियान के आयोजन के दूसरे दिन रविवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2020 जीतकर कांग्रेस सत्ता में आई।
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जनता की भलाई के लिए मैंने इसे ठुकरा दिया प्रस्ताव
तब मुझे मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री का पद देने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन जनता की भलाई के लिए मैंने इसे ठुकरा दिया था। सिंधिया ने कहा कि तभी मुझे अंदाजा हो गया था कि 15 महीने में ही कमलनाथ के नेतृत्च वाली प्रदेश की कांग्रेस सरकार का बंटाधार हो जाएगा और ऐसा हुआ भी।

15 महीने में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सरकार का बंटाधार कर देंगे
सिंधिया ने कहा कि वैसे भी मैं समझ गया था कि 15 महीने में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सरकार का बंटाधार कर देंगे। यह पहली बार है जब सिंधिया ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उसे मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री के पद का ऑफऱ दिया गया था। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने 11 मार्च को कहा था कि सिंधिया को पार्टी ने मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बनने का ऑफऱ किया था, लेकिन सिंधिया अपने चेले को उप मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। इसलिए कमलनाथ ने चेले को इस पद के लिए अस्वीकार कर दिया था।

वादाखिलाफी का आरोप लगाया
सिंधिया ने कांग्रेस पर मध्य प्रदेश की जनता के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने वादा किया था कि यदि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आएगी तो 10 दिन में किसानों के दो लाख रुपए तक के कर्ज माफ हो जाएंगे। यदि नहीं हुए तो 11वें दिन मुख्यमंत्री बदल दिया जाएगा, लेकिन कर्ज माफ नहीं हुए। सिंधिया ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस सरकार को मजबूती और विकास के लिए ग्वालियर-चंबल से 26 सीटें दीं, लेकिन विकास की बजाय भ्रष्टाचार होता रहा।

दादी और पिता की तरह जनता का सेवक हूं
सिंधिया ने कहा कि 'मैं अपनी दादी और पिता की तरह जनता का सेवक हूं। कुर्सी का सेवक नहीं। यदि मैं कुर्सी का सेवक होता तो जब मुझे उप मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव दिया गया था। चाहता तो मैं उसे स्वीकार कर लेता, लेकिन मुझे पता था कि सरकार में जो लोग बैठे हैं, वो प्रदेश का क्या हश्र करने वाले हैं और उसका भार मैं अपने ऊपर नहीं लेना चाहता था।












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