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MP News: जानिए कैसे हुआ शैक्षणिक लीज भूमि घोटाला, जबलपुर नगर निगम को 3.50 करोड़ का नुकसान

जबलपुर नगर निगम की शैक्षणिक उपयोग के लिए दी गई लीज भूमि के दुरुपयोग का एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने इस मामले में जॉय एजुकेशन सोसायटी के तत्कालीन चेयरमैन अखिलेश मेवन और तत्कालीन तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि लीज की शर्तों का उल्लंघन कर सरकारी भूमि का व्यावसायिक उपयोग किया गया, जिससे नगर निगम और शासन को करीब 3.50 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई है।

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वर्ष 2000 में शैक्षणिक उद्देश्य से दी गई थी लीज

EOW की प्रारंभिक जांच के अनुसार, मध्यप्रदेश शासन के निर्देशों के तहत वर्ष 2000 में नगर निगम जबलपुर ने प्लॉट नंबर-440, डाइवर्जन शीट नंबर-152 की कुल 7500 वर्गफुट भूमि जॉय एजुकेशन सोसायटी को 30 वर्ष की लीज पर आवंटित की थी। लीज की शर्तों में साफ-साफ उल्लेख था कि भूमि का उपयोग केवल शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जाएगा और किसी भी अन्य प्रयोजन के लिए नगर निगम से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

निगम की अनुमति के बिना अस्पताल का निर्माण

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि लीज नवीनीकरण के बाद सोसायटी द्वारा नगर निगम की अनुमति लिए बिना भूमि पर अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। यह न केवल लीज शर्तों का उल्लंघन है, बल्कि शासकीय भूमि के व्यावसायिक दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। निगम के रिकॉर्ड में अस्पताल निर्माण से संबंधित किसी भी प्रकार की स्वीकृति या अनुमति दर्ज नहीं पाई गई।

तहसीलदार से मिलीभगत कर कराई गई अवैध नामांतरण प्रक्रिया

EOW जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि तत्कालीन तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे की कथित मिलीभगत से लीज भूमि को अवैध रूप से अपने नाम दर्ज करवा लिया गया। इसके लिए न तो कोई वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और न ही नियमों के अनुसार प्रक्रिया का पालन किया गया। जांच एजेंसी इसे साजिश के तहत की गई गंभीर अनियमितता मान रही है।

व्यावसायिक क्षेत्र की भूमि, 3.5 करोड़ की क्षति

जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह भूमि जबलपुर शहर के एक महत्वपूर्ण और व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान क्षेत्र में स्थित है। कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार भूमि की वर्तमान कीमत करीब 3.50 करोड़ रुपये आंकी गई है। EOW ने इसे शासन और नगर निगम को हुई प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति के रूप में दर्ज किया है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ अपराध

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(5), 61(2) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7(सी) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। विवेचना प्रारंभ कर दी गई है और आने वाले दिनों में अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

लीज भूमि मामलों पर फिर उठे सवाल

इस प्रकरण के सामने आने के बाद जबलपुर में शैक्षणिक और सामाजिक उपयोग के लिए दी गई अन्य लीज भूमियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते निगरानी की जाती, तो करोड़ों की सरकारी संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सकता था।

आगे क्या?

EOW अब दस्तावेजों की गहन जांच, बैंकिंग लेन-देन और निर्माण अनुमति से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है। सूत्रों के मुताबिक आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे संभव हैं।

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