MP News: इंदौर पानी कांड में सरकारी रिपोर्ट से बड़ा खुलासा, जानिए कैसे भागीरथपुरा में लोगों की गई जान
IndoreMP News: देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाने वाले इंदौर में एक ऐसी त्रासदी सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के मामले में अब सरकारी रिपोर्ट ने भी सच्चाई पर मुहर लगा दी है।
यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि लापरवाही का ऐसा सिलसिला है, जिसकी कीमत आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

सरकारी रिपोर्ट से खुलासा: दूषित पानी ही बना मौत की वजह
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ माधव हसानी ने साफ शब्दों में कहा है कि महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब में जांचे गए पानी के नमूनों में गंभीर गंदगी पाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाइपलाइन में लीकेज के कारण पेयजल में सीवेज का पानी मिल गया, जिससे संक्रमण फैला और लोगों की तबीयत बिगड़ी।
डॉ हसानी ने बताया कि यह लीकेज किस स्तर पर और कितनी गंभीर थी, इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित विभागीय अधिकारी ही दे पाएंगे, लेकिन इतना स्पष्ट है कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार पड़े और मौतें हुईं।
मंत्री विजयवर्गीय ने भी मानी चूक
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी स्वीकार किया है कि भागीरथपुरा में हालात बिगड़ने की मुख्य वजह पेयजल में सीवेज का मिलना है। उन्होंने कहा कि चौकी के पास लीकेज वाली जगह सबसे प्रमुख कारण हो सकती है।
हालांकि, सवाल यह है कि अगर लीकेज की समस्या पहले से थी, तो समय रहते सुधार क्यों नहीं किया गया? स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे पिछले दो साल से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
आंकड़े डराने वाले: 14 मौतें, 1400 से ज्यादा बीमार
अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, दूषित पानी पीने से 14 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 1400 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। अस्पतालों में भर्ती मरीजों में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
मानव अधिकार आयोग की एंट्री
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने कहा है कि यदि ये रिपोर्ट सही हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला बनता है।
NHRC ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग का मानना है कि शिकायतों के बावजूद दूषित पानी की आपूर्ति रोकने के लिए समय पर कार्रवाई नहीं की गई, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
मुआवजे पर भी फूटा गुस्सा
घटना के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जब भागीरथपुरा पहुंचे और मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए के चेक सौंपने की कोशिश की, तो वहां माहौल और गरमा गया। कई परिजनों ने साफ कहा-"हमें आपका चेक नहीं चाहिए, हमें हमारे अपने चाहिए।" इस दौरान महिलाओं ने खुलेआम नाराजगी जाहिर की। एक महिला ने कहा कि दो साल से गंदा पानी आ रहा था, लेकिन भाजपा पार्षद और अधिकारी आंख मूंदे बैठे रहे।
वीडियो ने बढ़ाया सियासी तापमान
मंत्री विजयवर्गीय के दौरे का वीडियो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में महिलाएं मंत्री से सवाल करती नजर आ रही हैं और आरोप लगा रही हैं कि उनकी शिकायतों को अनसुना किया गया।
जीतू पटवारी ने X पर लिखा-"पूरा मोहल्ला बीमार है, लेकिन सत्ता के अहंकार में चूर मंत्री जी ने बहन की बात तक नहीं सुनी।"
बड़ा सवाल: जिम्मेदारी किसकी?
भागीरथपुरा की यह त्रासदी अब सिर्फ एक स्थानीय हादसा नहीं रही, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, राजनीतिक संवेदनशीलता और सिस्टम की विफलता पर बड़ा सवाल बन गई है। सरकारी रिपोर्ट से यह तो साफ हो गया कि मौत का पानी नलों से आया, लेकिन अब जनता यह जानना चाहती है कि दोषियों पर कार्रवाई कब होगी और क्या भविष्य में ऐसी त्रासदी दोहराई नहीं जाएगी?
इंदौर, जो स्वच्छता की मिसाल माना जाता है, आज उसी शहर में लोग सुरक्षित पानी के लिए तरस रहे हैं। यह घटना बताती है कि सिर्फ रैंकिंग नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत सुधारना ही असली चुनौती है।












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