छोड़ दी थी उम्मीद, भोपाल कलेक्टर लवानिया की मदद से ST वर्ग के विद्यार्थियों का मेडिकल कॉलेज में हुआ प्रवेश

भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने MMBS में चयनित ST वर्ग के बच्चों से कहा कि आज आपको मदद मिली है। कल जब आप सक्षम हो जाए तो आप भी किसी पढ़ने वाले बच्चे को मदद करना, जिससे उनकी पढ़ाई पूरी हो सके।

help of Bhopal collector Lavania, ST students got admission in medical college for doctor

मध्य प्रदेश के अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों ने आर्थिक तंगी के चलते डॉक्टर बनने की उम्मीद छोड़ दी थी। दरअसल इन बच्चों का एमबीबीएस के लिए चयन हो गया था, लेकिन उनके पास कॉलेज में फीस भरने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया बच्चों की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने बच्चों की मदद करती है उनकी दो-दो लाख की फीस जमा कर दी इससे इन बच्चों का मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई के लिए चयन हो गया है। कलेक्टर द्वारा मिली मदद से अब उन्हे भरोसा हो गया है कि वह डॉक्टर जरूर बनेंगे।

कलेक्टर ने जमा कराई 12 लाख रुपए फीस

कलेक्टर ने जमा कराई 12 लाख रुपए फीस

कलेक्टर अविनाश लवानिया ने MBBS में चयनित 6 बच्चों को काउंसलिंग के लिए दो ₹2-2 प्रति बच्चे के हिसाब से रेड क्रॉस से फीस जमा कराई है। इससे उनका चयन शहर की निजी मेडिकल कॉलेज में हो गया है। मध्यप्रदेश शासन से बच्चों की फीस मंजूर होने पर रेड क्रॉस से दी हुई राशि भी वापस हो गई हैं।

बच्चों का सपना है डॉक्टर बनना

बच्चों का सपना है डॉक्टर बनना

भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने कहा कि बच्चों का सपना डॉक्टर बनना है लेकिन भी फीस जमा करने में सक्षम नहीं थे। ऐसे में मुझे जब मामले में पता चला तो पूरी मदद करते हुए फीस जमा कराई है। बच्चे मदद के लिए मेरे पास बुधवार को आए थे, जहां मैंने कहा कि तुम्हारी मदद प्रशासन ने की है। जब तुम लोग सक्षम बन जाओ तो पढ़ने वाले बच्चों की मदद करना। उन्होंने कहा कि आप भविष्य के डॉक्टर है आपका काम सेवा का है और आप समाज में अपने कामों से अपना स्थान बनाए यही प्रयास हमेशा करें।

2 लाख रुपए प्रति बच्चा जमा होनी थी फीस

2 लाख रुपए प्रति बच्चा जमा होनी थी फीस

कलेक्ट्रेट में एमबीबीएस में चयनित होने वाले 4 बच्चे कलेक्टर अविनाश लवानिया को धन्यवाद देने आए थे। इन बच्चों ने हॉस्टल में रहकर MBBS के प्री एग्जाम की तैयारी की और इनका सिलेक्शन हुआ था। इन 6 बच्चो को काउंसलिंग के लिए 2 लाख रुपए प्रति बच्चा जमा होनी थी किंतु इनके परिवार की स्थिति ऐसी नही थी कि वे दो लाख की भारी भरकम राशि जमा कर सके। डीएम अविनाश लवानिया के संज्ञान में जब ये बात आई तो उन्होंने रेड क्रॉस से तत्काल इनके लिए फीस जमा कराई और काउंसलिंग के बाद इनका प्रवेश चिरायु और आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज में हो गया। बाद में प्रवेश मध्यप्रदेश शासन से बच्चों की फीस मंजूर होने पर रेड क्रॉस से दी हुई राशि भी वापस रेडक्रॉस को मिल गई है।

 ₹2 लाख फीस जमा करा दी

₹2 लाख फीस जमा करा दी

एमबीबीएस की छात्रा कुसुमलता पुसाम मंडला की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि जनजाति कार्य विभाग की आकांक्षा योजना के तहत एमबीबीएस की प्राथमिक परीक्षा में मेरा चयन हो गया था। घर की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। इस वजह से काउंसलिंग के लिए ₹2 लाख जमा नहीं कर पा रही थी। जब भोपाल कलेक्टर से मिली और अपनी बात रखी तो उन्होंने मदद करती हो मेरे ₹2 लाख फीस जमा करा दी है। इससे मेरा चैन MBBS प्रथम वर्ष निजी कॉलेज में हो गया।

डॉक्टर बनकर परिजनों का सपना करूंगा साकार

डॉक्टर बनकर परिजनों का सपना करूंगा साकार

एक और अन्य छात्र बालाघाट के शिवनाथ धुर्वे ने बताया कि मैंने विभाग के आकांक्षा योजना के तहत डॉक्टर बनने के लिए तैयारी की थी। इससे मेरा चयन हो गया था, लेकिन मेरे और मेरे परिवार के पास में रुपए नहीं थे कि काउंसलिंग की ₹2 लाख फीस जमा कर सकूं। कलेक्टर अविनाश लगाने में मेरी मदद करते हुए ₹2 लाख फीस जमा की है मेरा चयन हुआ है मैं डॉक्टर बनकर परिजनों का सपना साकार करूंगा।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+