Ganesh Chaturthi 2022 बांस और सुखी लौकी से बनाए गए 'इको-फ्रेंडली' गणेश, देखें तस्वीरें
उमरिया 29 अगस्त। जिले में बैगा जनजाति के कलाकारों ने भगवान गणेश की इको फ्रेंडली प्रतिमाएं तैयार की हैं। ये प्रतिमाएं सूखी लौकी, बांस की लकड़ी, काष्ठ से तैयार की गई हैं। इन प्रतिमाओं को अंतरराष्ट्रीय बैगा चित्रकार जोधइया बाई बैगा के मार्गदर्शन में आशीष आर्ट स्टूडियो में तैयार किया गया है। ये प्रतिमाएं सूखी लौकी, बांस की लकड़ी और सूखा कुम्हड़ा से तैयार की गई हैं। मूर्तियों में आकर्षक रंगों से चित्रकारी की गई है।
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आदिवासी बैगा कलाकार सुखी लौकी, सूखि कुम्हड़ा पर पहले भी चित्रकारी करते थे लेकिन गणपति की प्रतिमाएं पहली बार तैयार की गई हैं। काष्ठ कलाकर अमर बैगा ने काष्ठ की कारविंग करके महिलाओं को चित्रकारी के लिए उपलब्ध कराया है।
बाजार के प्रतिमाओं के बराबर मूल्य
गणपति की इन प्रतिमाओं का मूल्य बाजार में मिलने वाली की प्रतिमा से ज्यादा नहीं है। हालांकि इन प्रतिमाओं का निर्माण व्यापार के लिए नहीं किया गया है। प्रतिमाओं के निर्माण का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। इन प्रतिमाओं का मूल्य 2 हजार रुपये तय किया गया है। जबकि बाजार में मिलने वाली मिट्टी और केमिकल युक्त प्रतिमाएं भी कम से कम 2 हजार रुपये में आती हैं।

विसर्जन की आवश्यकता नहीं
ये प्रतिमाएं बेहद आकर्षक और कलात्मक हैं। इन प्रतिमाओं को विसर्जित करने की भी आवश्यकता नहीं है। इन्हें पूजा कक्ष अथवा घर में कहीं भी श्रद्धा के साथ रखा जा सकता है। इन प्रतिमाओं को देवालयों में स्थापित किया जा सकता है। यदि कोई विसर्जन करना भी चाहे तो इनसे किसी भी तरह का कोई प्रदूषण नहीं फैलेगा।












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