Bhopal News: कांग्रेस के पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट और काले धन को लेकर चौंकाने वाली बात कही
मध्य प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता और पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान हिंडनबर्ग रिपोर्ट और काले धन के मुद्दे पर कई गंभीर सवाल उठाए। चौधरी ने कहा कि यह पूरा मामला काले धन को सफेद करने का खेल है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वादे की सच्चाई को उजागर करता है, जिसमें उन्होंने विदेशों में छिपे काले धन को वापस लाने का दावा किया था।
कुणाल चौधरी ने कहा -"मोदी जी ने काले धन को समाप्त करने और विदेशों से उसे वापस लाने का वादा किया था, लेकिन वास्तव में उन्होंने भारत में काला धन एकत्रित किया और उसे विदेशी ऑफशोर कंपनियों में निवेश कर सफेद किया। इस प्रक्रिया का मकसद था कि इस काले धन को कुछ चुने हुए मित्रों की कंपनियों के शेयर की कीमत बढ़ाकर बैंकों से कर्ज दिलवा कर पोर्ट, एयरपोर्ट जैसे बड़े निवेश किए जाएं। यही मोदी सरकार की 'सूट-बूट-लूट और स्कूट' की रणनीति है।"

भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ आंदोलन
चौधरी ने वर्ष 2013-14 में भाजपा द्वारा किए गए भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ आंदोलन का उल्लेख किया, जिसमें भाजपा ने दावा किया था कि वे सत्ता में आने पर देश से भ्रष्टाचार समाप्त कर देंगे और हर परिवार को 15-15 लाख रुपये देंगे। लेकिन भाजपा सरकार के आने के बाद, एस.आई.टी. का गठन हुआ था, जो आज तक अपनी रिपोर्ट पेश नहीं कर पाई और न ही कोई ठोस कदम काले धन की वापसी के लिए उठाए गए हैं।
ऑफशोर कंपनियां और REITs
चौधरी ने स्पष्ट किया कि ऑफशोर कंपनियां और फंड्स, जैसे कि REITs, टैक्स हेवन देशों में रजिस्टर्ड होती हैं और इन्हें कम टैक्स या टैक्स में छूट मिलती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अडाणी समूह ने इन कंपनियों के माध्यम से भारतीय शेयर बाजार में कृत्रिम उछाल पैदा किया और छोटे निवेशकों को नुकसान पहुँचाया।
सेबी और माधबी पुरी बुच
चौधरी ने सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) की भूमिका पर भी सवाल उठाए, खासकर सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच पर। उन्होंने आरोप लगाया कि माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने अडाणी समूह से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं पर निष्पक्ष जॉच नहीं की।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट
हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा जारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए, चौधरी ने कहा कि इस रिपोर्ट ने अडाणी समूह की वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया, जिससे भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई और निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ।

सरकारी और सेबी की संलिप्तता
चौधरी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि उसने रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए नियमों में छेड़छाड़ की। विशेषकर, मुंबई के धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को बिना निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए अडाणी समूह को सौंपा गया। चौधरी ने इस पूरी स्थिति की जांच की मांग की और कहा कि भारत की वित्तीय और निवेश प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की आवश्यकता है।












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