MP News: लैंड पूलिंग एक्ट के खिलाफ किसानों का आंदोलन, भारतीय किसान संघ और करणी सेना का संयुक्त प्रदर्शन
MP News Farmers: मध्य प्रदेश के उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए किसानों की जमीनों के स्थायी अधिग्रहण के खिलाफ भारतीय किसान संघ (Bhartiya Kisan Sangh, BKS) और करणी सेना परिवार ने एकजुट होकर बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर सोमवार को प्रदेश भर में किसानों ने कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा, और मंगलवार (16 सितंबर) को उज्जैन में 500 से अधिक ट्रैक्टरों की रैली निकालने की तैयारी है।
इस विरोध प्रदर्शन में BKS के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा भी शामिल हुए, जिन्होंने आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों से संवाद कर उनके हितों को ध्यान में रखकर विकास कार्य करेगी। यह मामला न केवल उज्जैन, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का केंद्र बन गया है। आइए, इस आंदोलन, किसानों की मांगों, और सरकार की प्रतिक्रिया को विस्तार से जानते हैं।

लैंड पूलिंग एक्ट और सिंहस्थ 2028: विवाद की जड़
सिंहस्थ कुंभ मेला, जो हर 12 साल में उज्जैन में आयोजित होता है, 2028 में होने वाला है। इसके लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण ने लैंड पूलिंग योजना के तहत करीब 2,378 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की योजना बनाई है। इस योजना में उज्जैन और इंदौर के 17 गांवों के किसानों की जमीनें शामिल हैं। किसानों का आरोप है कि उनकी जमीनों का स्थायी अधिग्रहण किया जा रहा है, जो उनके लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से विनाशकारी है।
भारतीय किसान संघ और करणी सेना परिवार ने इस योजना को "किसान विरोधी" करार दिया है। BKS के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा, "कुंभ मेला आस्था का प्रतीक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसानों की आजीविका छीनी जाए। हम जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन स्थायी अधिग्रहण स्वीकार नहीं।" उनका कहना है कि सरकार पुरानी भूमि अधिग्रहण नीति को लागू करे, जिसमें किसानों को उचित मुआवजा और जमीन का कुछ हिस्सा वापस मिले।
किसानों का हल्ला: ज्ञापन, ट्रैक्टर रैली, और आंदोलन की रणनीति
सोमवार को भारतीय किसान संघ ने पूरे मध्य प्रदेश में कलेक्टरों को 15 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। उज्जैन में 17 गांवों के सैकड़ों किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज होगा। मंगलवार को उज्जैन में 500 से ज्यादा ट्रैक्टरों की रैली निकाली जा रही है, जिसमें हजारों किसान शामिल होंगे। इस रैली में करणी सेना परिवार भी समर्थन दे रही है, जिसने इसे "किसानों की जमीन बचाने की लड़ाई" बताया।
मोहिनी मोहन मिश्रा ने उज्जैन में कहा, "यह सिर्फ शुरुआत है। अगर सरकार ने लैंड पूलिंग एक्ट को वापस नहीं लिया, तो हम प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे।" करणी सेना के एक नेता ने कहा, "हम किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। यह अन्याय नहीं चलेगा।"
किसानों ने पहले भी विरोध प्रदर्शन किए हैं। अगस्त 2025 में उज्जैन के रामघाट पर जल सत्याग्रह और इंदौर-कोटा हाईवे पर रास्ता जाम किया गया था। तब पुलिस ने 35 किसानों पर कार्रवाई की थी, जिससे आंदोलन और भड़क गया।
मुख्यमंत्री का जवाब: संवाद और विकास का वादा
लैंड पूलिंग एक्ट के खिलाफ बढ़ते विरोध पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "हमारा भाव है कि सभी से संवाद करें और सबके हितों को ध्यान में रखकर विकास करें। लैंड पूलिंग हो या अन्य योजनाएं, हम किसानों के साथ बातचीत कर समाधान निकालेंगे।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास के रास्ते पर सभी को साथ लिया जाएगा। हालांकि, किसानों का कहना है कि सरकार के दावे हकीकत से कोसों दूर हैं। किसान नेता सर्वज्ञ जी. दीवान ने कहा, "संवाद की बात तो ठीक है, लेकिन जमीनी कार्रवाई दिखनी चाहिए। स्थायी अधिग्रहण रद्द हो, वरना आंदोलन रुकेगा नहीं।"
किसानों की 15 सूत्रीय मांगें: प्रधानमंत्री के नाम पत्र
- जीएसटी हटाओ: बीज, खाद, दवाइयों, और खेती के यंत्रों पर जीएसटी पूरी तरह हटाई जाए।
- आयात-निर्यात नीति: फसल तैयार होने पर आयात रोककर किसानों के हितों की रक्षा हो।
- कम जीएसटी दर: खेती के संसाधनों पर न्यूनतम जीएसटी दर लागू हो।
- जीएम बीजों पर रोक: जीन बदलकर बनाए गए बीजों पर पूर्ण प्रतिबंध।
- कपास पर आयात शुल्क: कपास पर हटाए गए आयात शुल्क को पुनः लागू किया जाए।
- एकरूप भूमि अधिग्रहण कानून: राष्ट्रीय महत्व की योजनाओं के लिए ही अधिग्रहण हो, और देशभर में एक समान कानून बने।
- बैंक सुधार: योजनाओं का लाभ न मिलने पर जिला स्तर पर एक अधिकारी नियुक्त हो, और हेल्पलाइन शुरू हो।
- कृषि लोन की आसान प्रक्रिया: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और लोन प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी हो। परेशान करने वाले बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
- तत्काल लोन: मुद्रा लोन की तरह तुरंत कृषि लोन उपलब्ध हो।
- डीजल पर जीएसटी: खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए।
- वर्षा मापक यंत्र: हर ग्राम पंचायत में वर्षा नापने की मशीन लगे।
- कृषि शिक्षा: हर जिले में कृषि कॉलेज खोले जाएं, और स्कूलों में कृषि पढ़ाई जाए।
- MSP गारंटी: सभी फसलों की खरीदी पूरे साल समर्थन मूल्य पर हो।
- किसान सम्मान निधि: राशि बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की जाए।
- जैविक खेती को प्रोत्साहन: जैविक खेती करने वालों को खाद सब्सिडी के बराबर प्रोत्साहन मिले।
- फसल बीमा सुधार: सैटेलाइट सर्वे की जगह खेत में जाकर नुकसान का आकलन हो।
- 5 लाख तक KCC लोन: हर किसान को 5 लाख तक का कृषि लोन बिना जटिलता के मिले।
जांच और सवाल: क्या होगा समाधान?
किसानों का कहना है कि लैंड पूलिंग एक्ट के तहत उनकी जमीनों का 50% हिस्सा छीना जा रहा है, और मुआवजा अपर्याप्त है। किसान नेता राहुल धूत ने कहा, "हम कुंभ मेला नहीं रोक रहे, लेकिन हमारी आजीविका क्यों छीनी जाए? पुरानी नीति लागू हो, जिसमें जमीन का हिस्सा वापस मिलता था।" मुख्य विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को उठाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार ने संवाद के जरिए समाधान नहीं निकाला, तो यह आंदोलन 2020 के किसान आंदोलन जैसा रूप ले सकता है।
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