MP News: भोपाल सेंट्रल जेल में चाइनीज ड्रोन मिलने से मचा हड़कंप, सुरक्षा एजेंसियां हुईं सतर्क
Bhopal News: भोपाल सेंट्रल जेल में बुधवार दोपहर एक ड्रोन मिलने से हड़कंप मच गया। यह ड्रोन नवीन ब-खंड के निर्माणाधीन हिस्से में स्थित हनुमान मंदिर के पीछे पाया गया। ड्रोन की सूचना मिलने के बाद जेल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं।
गश्त कर रहे प्रहरी ने पाया ड्रोन
जेल प्रशासन के अनुसार, बुधवार को करीब 3:45 बजे जब जेल के प्रहरी सोनवार चौरसिया गश्त कर रहे थे, तब उन्हें नवीन ब-खंड के निर्माणाधीन हिस्से में स्थित हनुमान मंदिर के पीछे एक ड्रोन पड़ा हुआ दिखाई दिया। प्रहरी ने तुरंत इस ड्रोन को उठाकर वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचाया, ताकि इसे ठीक से जांचा जा सके।

सुरक्षा के लिहाज से जांच जारी
ड्रोन मिलने के बाद जेल अधीक्षक राकेश भांगरे ने बताया कि इसकी जानकारी तुरन्त स्थानीय थाना गांधी नगर को दी गई, और सुरक्षा को लेकर त्वरित कदम उठाए गए। ड्रोन की तकनीकी जांच की जा रही है, हालांकि फिलहाल इसमें कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है।
जेल प्रशासन ने डीजी जेल, डीजीपी, कंट्रोल रूम और स्थानीय पुलिस को भी ड्रोन के बारे में सूचित किया। ड्रोन की जांच करने के बाद उसे पुलिस के सुपुर्द कर दिया जाएगा। शुरुआती जांच में यह ड्रोन चाइना मेड बताया गया है, और इसकी पहचान के लिए पुलिस की ओर से जांच प्रक्रिया जारी है।
सुरक्षा चूक और संभावित खतरे
भोपाल सेंट्रल जेल में ड्रोन मिलने की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को चिंता में डाल दिया है। ड्रोन का उपयोग हाल के दिनों में जेलों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया जाने लगा है, जैसे कि जेलों में प्रतिबंधित सामान भेजना या अन्य अवैध कार्य करना। ऐसे में इस मामले की गहरी जांच की जाएगी, ताकि यह पता चल सके कि ड्रोन के जरिए कोई अवैध वस्तु जेल में भेजी जा रही थी या नहीं।
उच्च सुरक्षा वाली जेल में 69 आतंकियों का बंद होना
भोपाल सेंट्रल जेल के हाई सिक्योरिटी सेल में इन आतंकियों को रखा गया है, जहां क्षमता सिर्फ 58 की है, जबकि वर्तमान में 69 आतंकी वहां बंद हैं। यह स्थिति सुरक्षा अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है, क्योंकि उच्च सुरक्षा वाली जेल में इतने आतंकियों का होना गंभीर सुरक्षा मुद्दों को जन्म देता है।
सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था
जेल प्रशासन ने इन आतंकियों की सुरक्षा को लेकर कड़ी व्यवस्था की है। हर रोज़ इन आतंकियों को हाई सिक्योरिटी सेल से बाहर निकाला जाता है, लेकिन उनकी गतिविधियों पर पूरी नजर रखी जाती है। रोज़ाना उन्हें कुल 3.5 घंटे के लिए बाहर निकाला जाता है, जिससे वे अपने व्यक्तिगत काम जैसे कपड़े सुखाना, धूप लेना, टहलना आदि कर सकें। इन आतंकियों को अलग-अलग समय पर बाहर निकाला जाता है, जिससे किसी प्रकार की संलिप्तता या आपस में मिलकर कोई योजनाबद्ध गतिविधि न हो सके।
जेल अधिकारियों के अनुसार, आतंकियों को सुबह ढाई घंटे के लिए और शाम में एक घंटे के लिए बाहर निकाला जाता है। इस दौरान भी उनकी पूरी निगरानी की जाती है और उन्हें किसी से बातचीत की अनुमति नहीं होती। प्रत्येक आतंकी पर दो प्रहरी लगाए जाते हैं, जो उनकी गतिविधियों पर पूरी नजर रखते हैं।
मुलाकात और अन्य सुविधाएं
जेल मैन्युअल के अनुसार, इन आतंकियों को मुलाकात की इजाजत है, लेकिन कुछ खास नियमों के तहत। आतंकी कामरान, अबु फैजल, शिबली और कमरुद्दीन को छोड़कर बाकी सभी 65 आतंकियों को जेल मैन्युअल के हिसाब से अपने परिजनों से मिलने की अनुमति मिलती है और उन्हें कैंटीन की सुविधाएं भी दी जाती हैं। यह मुलाकातें और अन्य सुविधाएं जेल नियमों के अनुसार नियंत्रित होती हैं, जिससे किसी भी तरह की सुरक्षा चूक से बचा जा सके।
सजायाफ्ता आतंकी जेल ड्रेस में रहते हैं और जेल की टोपी पहनते हुए जेल के नियमों का पालन करते हैं। उनकी गतिविधियों को सख्ती से नियंत्रित किया जाता है, ताकि उनकी उपस्थिति और अन्य जेलों में पहुंचने की कोशिशों पर कड़ी निगरानी रखी जा सके।
सुरक्षा में बढ़ती चुनौतियां
इन आतंकियों का जेल में रहना और उनकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने की जिम्मेदारी जेल प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। इन आतंकियों के पास किसी भी तरह के बाहरी संपर्क से बचने के लिए जेल की सुरक्षा को सख्त किया गया है। साथ ही, किसी भी संभावित हमले या अपराध की योजना बनाने की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के इंतजाम बेहद कड़े किए गए हैं।












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