दूध का कर्ज़: बैंड बाजे नृत्य के साथ निकली गौमाता की अंतिमयात्रा, समाधि के बाद अब बनेगा मंदिर
उन्होंने आगे कहा, गाय नहीं हमारी मां का निधन हुआ है। इसलिए पारिवारिक सदस्य की तरह उसका अंतिम संस्कार किया गया है।

रतलाम जिले में एक अनोखी पहल देखने को मिली। रावटी में गौ माता की मृत्यु के बाद हिंदू रीति रिवाज से गौमाता को अंतिम विदाई दी गई।अंतिम यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने उनका आशीर्वाद लिया और सभी ने उन्हें साड़ी में लपेटा और ईश्वर से मन की शांति के लिए प्रार्थना की।
मामला रतलाम जिले के रावटी में का है। जहां पर एक गौ माता का निधन होने के पश्चात ग्रामीणों के द्वारा बैंड बाजे के साथ पुरें गांव में उसकी बड़े धूमधाम से अंतिमयात्रा निकाली गई अंतिमयात्रा में किन्नर भी शामिल हुऐ और नृत्य करतें नजर आऐ। अंतिमयात्रा के बाद गौमाता को समाधि दी गई। इसके पश्चात एक शोक सभा और बैठक भी रखी गई जिसमें निर्णय लिया गया कि समाधि स्थल पर गौ माता का मंदिर ग्रामीण लोगों के सहयोग से बनाया जाएगा।
पूरे मामले के अनुसार रावटी निवासी श्रेणिक कुमार चत्तर जिनको ग्रामवासी चक्का सेठ के नाम से जानते हैं। काफी धार्मिक प्रवृत्ति के माने जाते हैं। उन्होंने गौ सेवा में अपना जीवन समर्पित कर रखा है। और उनके पास एक गाय थी जिसे उन्होंने बहुत ही लगाव से पाला था तथा पहले से ही मन बना रखा था कि यदि गाय का निधन हो जाता है तो वह धूमधाम से उसकी शवयात्रा को निकालेंगे तत्पश्चात समाधि देकर गांव वालों की सहमति से मंदिर का निर्माण कराएंगे। इसी के चलते आज गाय के निधन के पश्चात उन्होंने उसकी शव यात्रा को बैंड बाजे और धूमधाम के साथ निकाली इस दौरान पूरी यात्रा में किन्नरों ने भी नृत्य करा यात्रा के समाप्त होने के पश्चात गौ माता को समाधि दी गई तत्पश्चात अब वहां पर मंदिर बनाने का निर्णय भी लिया जा रहा है।
Recommended Video
संपूर्ण विधि विधान और धूमधाम से निकली यह शव यात्रा ग्रामीण अंचल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस अंतिमयात्रा में सैकड़ों गोभक्त व धर्मालु शामिल हुए।












Click it and Unblock the Notifications