MP News: भोपाल में बोहरा समाज ने हर्षोल्लास के साथ मनाई ईद-उल-फित्र: नमाज और ईदी के साथ फैला भाईचारा

रमजान के पवित्र महीने की इबादतों और रोजों का समापन होने के बाद रविवार, 30 मार्च 2025 की सुबह भोपाल में बोहरा समाज ने ईद-उल-फित्र का पर्व बड़े उत्साह और खुशी के साथ मनाया। शहर की प्रमुख मस्जिदों में सुबह 6 बजे ईद की नमाज अदा की गई, जिसमें समाज के हजारों लोग शामिल हुए।

नमाज के बाद गले मिलकर "ईद मुबारक" की बधाइयां दी गईं, पारंपरिक मिठास से भरे शीर खुरमा का स्वाद चखा गया और बच्चों को ईदी देकर उनकी मुस्कुराहटें बढ़ाई गईं। यह पर्व न सिर्फ खुशियों का त्योहार साबित हुआ, बल्कि एकता, भाईचारे और नेकी के संदेश को भी घर-घर तक पहुंचाने का जरिया बना।

Bohra community celebrated Eid-ul-Fitr festival in Bhopal meeting for moon will be held in Moti Masjid

सुबह मस्जिदों में गूंजी नमाज, एकजुट हुआ समाज

भोपाल जिले में करीब 7 हजार की आबादी वाला बोहरा समाज इस मौके पर अपनी सात प्रमुख मस्जिदों में एकत्र हुआ। हैदरी मस्जिद अलीगंज, बद्री मस्जिद, सेफिया कॉलेज, अहमदी मस्जिद भोपाल टॉकीज, हुसैनी मस्जिद पीरगेट, बुरहारी मस्जिद करौंद और नूर महल मरकज में सुबह के शांत और पवित्र माहौल में नमाज की गूंज सुनाई दी। परिवारों के साथ बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस खास आयोजन का हिस्सा बने। नमाज के बाद मस्जिदों के बाहर गर्मजोशी भरे गले मिलने का सिलसिला शुरू हुआ, जो बोहरा समाज की एकता और आपसी प्रेम का प्रतीक बन गया।

शीर खुरमा की मिठास और ईदी का उत्साह

ईद की नमाज के बाद बोहरा समाज की सबसे प्यारी परंपराओं में शुमार शीर खुरमा का दौर शुरू हुआ। यह स्वादिष्ट व्यंजन दूध, सेवई, चीनी और मेवों से तैयार किया जाता है और ईद की खुशियों को दोगुना करने का काम करता है। घर-घर में सुबह से ही इसे बनाने की तैयारियां चल रही थीं। पड़ोसियों, रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच इसे बांटा गया। 65 साल के हाजी अब्दुल कादिर ने भावुक होते हुए कहा, "शीर खुरमा हमारे लिए सिर्फ खाना नहीं, बल्कि प्यार और भाईचारे का संदेश है। इसे बांटते वक्त जो खुशी मिलती है, वही ईद का असली मतलब है।"

दूसरी ओर, बच्चों के लिए ईदी का इंतजार इस दिन की सबसे बड़ी खुशी होती है। बड़े-बुजुर्गों ने बच्चों को नकदी और तोहफे देकर उनकी आंखों में चमक बिखेरी। 10 साल के अहमद ने अपनी ईदी दिखाते हुए कहा, "मुझे 500 रुपये मिले हैं। अब मैं बाजार जाकर अपने लिए एक खिलौना लूंगा।" बच्चों का यह उत्साह और उनकी मासूम खुशी ईद के माहौल को और जीवंत बना रही थी।

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"ईद भलाई और भाईचारे का पैगाम है"

बोहरा समाज ने इस मौके पर सिर्फ उत्सव नहीं मनाया, बल्कि एक गहरा संदेश भी दिया। समाज के प्रवक्ता सैफुद्दीन बोहरा ने कहा, "रमजान का महीना हमें सब्र, दान और अच्छे काम सिखाता है। ईद इस सीख को जिंदगी में उतारने का मौका देती है। यह केवल त्योहार नहीं, बल्कि भाईचारा बढ़ाने और अच्छे अमल को जारी रखने का अवसर है।" उन्होंने बताया कि कई लोग इस दिन गरीबों को दान देते हैं, जरूरतमंदों के लिए खाना बांटते हैं और पुराने गिले-शिकवे भुलाकर रिश्तों को नया जीवन देते हैं।

हैदरी मस्जिद में नमाज के बाद हुए एक छोटे से जलसे में मौलवी साहब ने भी इसी बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "ईद का मतलब है दूसरों की खुशी में शरीक होना। रमजान में जो अच्छाइयां हमने अपनाईं, उन्हें सालभर बरकरार रखना चाहिए।" उनकी बातों से प्रेरित होकर कई युवाओं ने जरूरतमंदों की मदद का संकल्प लिया। 22 साल के छात्र जैनुल आबेदीन ने कहा, "मैंने इस बार अपनी ईदी का कुछ हिस्सा गरीब बच्चों के लिए रखा है। ईद ने मुझे सिखाया कि खुशी बांटने से बढ़ती है।"

भोपाल में बोहरा समाज की रौनक

भोपाल में बोहरा समाज का यह उत्साह हर साल देखते ही बनता है। नमाज के बाद लोग रंग-बिरंगे पारंपरिक लिबास में सज-धजकर एक-दूसरे के घर मिलने पहुंचे। महिलाओं ने हाथों में मेहंदी रचाई, नए कपड़े पहने और घरों को फूलों व रोशनी से सजाया। पुरुषों ने भी कुर्ता-पायजामा और टोपी पहनकर इस खास दिन की शान बढ़ाई। अलीगंज की रहने वाली फातिमा बानो ने बताया, "हम कई दिनों से ईद की तैयारियों में जुटे थे। आज सुबह सब साथ बैठे, शीर खुरमा खाया और बच्चों को ईदी दी। यह दिन हमारे लिए यादगार बन गया।"

नूर महल मरकज में भी खास आयोजन हुआ, जहां समाज के लोग जमा हुए। बच्चों के लिए छोटे-छोटे खेल आयोजित किए गए, जिसमें उनकी हंसी और शोर ने माहौल को और खुशनुमा बना दिया। 35 साल के व्यापारी हुसैन अली ने कहा, "ईद का असली मजा तब है, जब पूरा समाज एक साथ हो। इस बार हमने अपने कर्मचारियों को भी तोहफे दिए और उन्हें खुशियों में शामिल किया।"

एकता और सादगी का सबक

ईद-उल-फित्र का यह पर्व बोहरा समाज के लिए एकता और सादगी का प्रतीक बनकर उभरा। सुबह से ही भोपाल की सड़कों पर रौनक छाई रही। मस्जिदों के बाहर लोगों का हुजूम, बच्चों की चहल-पहल और शीर खुरमा की खुशबू ने पूरे शहर को उत्सव के रंग में रंग दिया। समाज के बुजुर्गों का कहना था कि यह दिन हमें सिखाता है कि जिंदगी की असली दौलत अच्छाई और सादगी में छिपी है।

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