MP News: UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक से भड़का बहुजन समाज, भोपाल में दामोदर यादव मंडल का शक्ति प्रदर्शन
MP News ugc: देशभर में UGC के नए प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अस्थायी रोक ने बहुजन समाज में जबरदस्त रोष पैदा कर दिया है। बहुजन कार्यकर्ताओं और संगठनों का मानना है कि यह रोक उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव रोकने के प्रयासों पर ब्रेक लगाने जैसी है, जो रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद बनाए गए थे।
आज भोपाल में आजाद समाज पार्टी (भीम आर्मी) के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य एवं DPSS के राष्ट्रीय अध्यक्ष दामोदर यादव मंडल के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर दोलन प्रदर्शन (मजबूत आंदोलन) आयोजित किया जा रहा है। सैकड़ों कार्यकर्ता, छात्र, सामाजिक संगठन के सदस्य और बाबा साहब अंबेडकर के अनुयायी भोपाल के प्रमुख स्थानों पर जुट रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का नारा है- "सुप्रीम कोर्ट की रोक नहीं चलेगी, बहुजन न्याय की लड़ाई जारी रहेगी!"

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: क्या हुआ?
29 जनवरी 2026 को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने UGC के 2026 नियमों को अस्थायी रूप से स्थगित (kept in abeyance) कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नियमों में प्रथम दृष्टया अस्पष्टता (vagueness) है और ये दुरुपयोग की संभावना से भरे हैं। इससे समाज में विभाजन और "बहुत खतरनाक प्रभाव" पड़ सकता है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया, जवाब मांगा, और अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 तय की। तब तक 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। याचिकाकर्ताओं (ज्यादातर जनरल कैटेगरी से जुड़े) का आरोप था कि नियम केवल SC, ST, OBC के खिलाफ भेदभाव पर फोकस करते हैं, जबकि जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए कोई सुरक्षा नहीं, झूठी शिकायतों पर सजा का प्रावधान हटा दिया गया, और यह "रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन" को बढ़ावा देता है।
बहुजनों का रोष: "यह न्याय की हत्या है"
दामोदर यादव मंडल ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट की यह रोक बहुजन छात्रों के खिलाफ है। ये नियम रोहित वेमुला, पायल तड़वी की माताओं की अपील और सुप्रीम कोर्ट की पुरानी टिप्पणियों के बाद बने थे। अब इन्हें रोकना मतलब दलित-ओबीसी छात्रों को फिर से असुरक्षित छोड़ना है। हम इसे नहीं मानेंगे।"
उन्होंने आरोप लगाया कि जनरल कैटेगरी के विरोध और "मैन्युफैक्चर्ड प्रोटेस्ट" के दबाव में कोर्ट ने फैसला दिया। "बहुजन समाज अब चुप नहीं बैठेगा। हम शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ तरीके से आंदोलन तेज करेंगे। UGC को नियमों को मजबूत बनाना होगा, न कि कमजोर।"
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं का कहना है:
नियम बहुजन छात्रों को कैंपस में सुरक्षा देते थे, अब रोक से डर बढ़ेगा।
इक्विटी कमेटी और हेल्पलाइन जैसे प्रावधानों पर ब्रेक लगना अन्याय है।
संसदीय समिति की सिफारिशों को UGC ने पहले ही कमजोर किया था, अब कोर्ट की रोक से और पीछे धकेला जा रहा है।
आज के प्रदर्शन की रूपरेखा
- स्थान: भोपाल के प्रमुख चौराहे (शिवाजी चौराहा, गांधी मैदान क्षेत्र) से शुरू होकर UGC/शिक्षा विभाग कार्यालय तक मार्च।
- मांगें: UGC नियमों को बहाल किया जाए, झूठी शिकायतों पर सजा का प्रावधान जोड़ा जाए लेकिन बहुजन सुरक्षा कम न हो; स्पष्ट परिभाषा और समावेशी कमेटी।
- प्रतीक: बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीरें, संविधान की किताबें, और "संविधान बचाओ" के प्लेकार्ड।
- सैकड़ों कार्यकर्ता जुटे हैं, जिसमें महिलाएं, छात्र और युवा प्रमुख हैं। पुलिस सुरक्षा के इंतजाम हैं, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने का वादा किया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के अलावा अन्य बहुजन संगठन भी समर्थन दे रहे हैं।
जनरल कैटेगरी छात्रों के संगठन रोक का स्वागत कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहले कहा था कि दुरुपयोग नहीं होगा, लेकिन अब कोर्ट के फैसले पर चुप्पी है।
यह मुद्दा अब सिर्फ शिक्षा का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संविधान की व्याख्या का बड़ा सवाल बन गया है। बहुजन समाज का आज का प्रदर्शन इसी रोष की शुरुआत है। आने वाले दिनों में और बड़े आंदोलन की आशंका है।












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