BDA कार्यालय में रिश्वत लेने वाला बाबू निकला करोड़ों रुपए की संपत्ति का मालिक, प्रॉपर्टी जानकर चौंक जाएंगे
Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्टेट भोपाल डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) के सहायक ग्रेड 3 कर्मचारी ताराचंद दास को लोकायुक्त ने ₹40,000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। शुक्रवार को लोकायुक्त की टीम ने BDA कार्यालय में आवेदक की शिकायत पर कार्रवाई की और दास को रंगे हाथ पकड़ा।
लोकायुक्त निरीक्षक नीलम पटवा के अनुसार, ताराचंद दास के खिलाफ शिकायत मिली थी कि वह अवैध तरीके से धन कमा रहा है और कई संपत्तियों का मालिक है। जांच के दौरान पता चला कि दास के पास करोड़ों की संपत्ति है, जो उसने अपने नाम, अपने परिजनों और परिचितों के नाम पर जमा की है।

मुख्य बिंदु:
संपत्तियों की जानकारी:
- ताराचंद दास की पत्नी मंदिरा दास के नाम पर कस्तूरबा नगर में माँ गंगा होटल, बॉयज हॉस्टल, और एक निर्माणाधीन फ्लोर है।
- मंदिरा MP नगर में स्टाम्प वेंडर का काम करती हैं और पंचशील नगर में ग्राहक सेवा केंद्र (SBI kiosk) का संचालन करती हैं।
- पंचशील नगर में मंदिरा के दो मकान हैं, जिनमें कुल 30 किरायेदार हैं।
- MP नगर जोन 2 में आनंद नमकीन के पास एक दुकान भी है जो किराए पर दी गई है।

वाहन और बैंक संपत्तियां:
आरोपी के पास टाटा पंच, टाटा Xenon पिकअप, Xylo, दो स्कूटी, और बुलेट जैसी वाहनों की जानकारी मिली है।
मंदिरा के माता-पिता के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा में एक जॉइंट अकाउंट भी है।

पूर्व संपत्तियां:
- मंदिरा और उनकी मां के नाम पर E6 अरेरा कॉलोनी में 4500 वर्गफुट का प्लॉट था, जिसे 2016 में ₹1.9 करोड़ में बेचा गया था।
- सभी दस्तावेज और संपत्तियों की जानकारी के साथ, लोकायुक्त की टीम ने ताराचंद दास के निवास पर सर्च ऑपरेशन जारी रखा है। पुलिस अधीक्षक मनु व्यास के निर्देश पर उप पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह और अनिल बाजपेई के नेतृत्व में यह छापेमारी की जा रही है।
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी ने लंबे समय से भ्रष्टाचार के माध्यम से अपनी संपत्ति को बढ़ाया है और अब इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
अवैध रजिस्ट्री के मामले में जांच की प्रक्रिया जारी
होशंगाबाद रोड स्थित विद्या नगर में अनिल साखी के प्लॉट की अवैध रजिस्ट्री को लेकर 19 जून को क्राइम ब्रांच ने FIR दर्ज की है। इस मामले में भोपाल डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) के सीनियर अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया जा रहा है। फिलहाल, कलेक्ट्रेट में इस मामले की जांच की जा रही है।
लोकायुक्त पुलिस ने इस संदिग्ध रजिस्ट्री में तारकचंद दास की भूमिका की भी जांच करने का निर्णय लिया है। BDA की राजस्व शाखा में लीज नवीनीकरण, नामांतरण और NoC के 300 से अधिक मामलों की जाँच पिछले छह महीने से लंबित है, जिसके कारण लोग लगातार दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।
जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि क्या इस अवैध रजिस्ट्री के पीछे BDA के किसी अधिकारी की संलिप्तता है या नहीं। लोकायुक्त पुलिस इस मामले की गहराई से जांच करेगी और आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।












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