Baba Bageshwar: हिंदुओं से 4 बच्चे पैदा करने की अपील पर घिरे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, फिर छिड़ी बहस
Baba Bageshwar Dham: राजस्थान की धार्मिक धरती पर एक बार फिर ऐसा बयान गूंजा जिसने सिर्फ श्रद्धालुओं के बीच ही नहीं बल्कि सियासी और सामाजिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें बाबा बागेश्वर के नाम से भी जाना जाता है, ने अजमेर में आयोजित धार्मिक सभा के दौरान हिंदुओं से कम से कम चार बच्चे पैदा करने की अपील कर दी।
मंच से उन्होंने कहा कि देश में हिंदुओं की घटती संख्या चिंता का विषय है और यदि समय रहते समाज नहीं जागा तो सांस्कृतिक संतुलन बिगड़ सकता है। अपने विशिष्ट अंदाज में उन्होंने यह भी कहा कि अभी उनकी शादी नहीं हुई है, लेकिन विवाह के बाद वे भी हिंदू आबादी बढ़ाने में योगदान देंगे। सभा में मौजूद लोगों के बीच यह बात हंसी-मजाक के साथ कही गई, लेकिन इसके राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ गंभीर माने जा रहे हैं।

शास्त्री ने धर्म परिवर्तन को रोकने, सनातन पर गर्व करने और जनसंख्या संतुलन बनाए रखने की बात भी दोहराई, साथ ही यह तर्क दिया कि जब कुछ समुदायों में अधिक बच्चे पैदा किए जा रहे हैं तो हिंदुओं को भी पीछे नहीं रहना चाहिए, अन्यथा भविष्य में देश की स्थिति बिगड़ सकती है। बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया और समर्थन-विरोध की लहर चल पड़ी - समर्थकों ने इसे "सनातन रक्षा का आह्वान" बताया तो आलोचकों ने जनसंख्या नियंत्रण, संसाधनों पर दबाव और सामाजिक जिम्मेदारी का सवाल उठाया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान चुनावी माहौल में जनसंख्या और पहचान की बहस को फिर तेज कर सकते हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं जब शास्त्री ने इस तरह की बात कही हो; इससे पहले भी वे विभिन्न मंचों से हिंदू समाज को अधिक संतान पैदा करने और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर देते रहे हैं।
पहले भी दे चुके हैं ऐसे बयान
यह पहली बार नहीं है जब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस प्रकार की अपील की हो। इससे पहले भी वे विभिन्न मंचों से हिंदू समाज को अधिक संतान पैदा करने और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर देते रहे हैं। उनके बयानों को लेकर समय-समय पर विवाद और समर्थन दोनों सामने आते रहे हैं।
धर्म, जनसंख्या और राजनीति - संतुलन कैसे?
ताजा बयान ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि धर्म, जनसंख्या और राजनीति के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। क्या ऐसे आह्वान सामाजिक विमर्श को नई दिशा देंगे या फिर विवाद को और गहरा करेंगे - यह आने वाला समय तय करेगा। फिलहाल, अजमेर से उठी यह आवाज राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन चुकी है। फिलहाल, उनके ताजा बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धर्म, जनसंख्या और राजनीति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए - और क्या ऐसे आह्वान सामाजिक विमर्श को नई दिशा देंगे या विवाद को और गहरा करेंगे।












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