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मोगली का घर कहे जाने वाले सिवनी के पेंच टाइगर रिजर्व में एक और बघीरा ने अपनी मौजूदगी कराई दर्ज

पेंच राष्ट्रीय उद्यान के खवासा बफर क्षेत्र में बघीरा (काला तेंदुआ) पर्यटकों को लुभा रहा है। पार्क प्रबंधन का कहना है कि 2020 में पहली बार यहां काला तेंदुआ देखा गया था

भोपाल,25 अगस्त। मध्य प्रदेश के पेंच राष्ट्रीय उद्यान के खवासा बफर क्षेत्र में पिछले 4 दिनों से बघीरा (काला तेंदुआ) पर्यटकों को लुभा रहा है। पार्क प्रबंधन का कहना है कि 2020 में पहली बार यहां काला तेंदुआ देखा गया था, उसके महाराष्ट्र क्षेत्र के जंगल में चले जाने के संकेत मिले हैं। इस समय खवासा बफर में दिखाई देने वाला काला तेंदुआ पहले दिखाई दिया तेंदुआ नहीं है। इसकी उम्र करीब 9 महा है, जबकि पहले वाला काला तेंदुआ 2 साल से अधिक उम्र का हो चुका है।

द जंगल बुक का प्रमुख किरदार है बघीरा

द जंगल बुक का प्रमुख किरदार है बघीरा

रूडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध किताब द जंगल बुक और उस पर बने धारावाहिक के प्रमुख किरदार भेड़िया वाला मोगली की जन्मभूमि पेंच राष्ट्रीय उद्यान को माना जाता है। मोगली और काला तेंदुआ बगीरा के बीच गहरी दोस्ती के किस्से भी प्रसिद्ध है। एक जमाने में यह धारावाहिक पूरे देश में प्रसिद्ध हुआ करता था। बच्चों का सबसे फेवरेट नाटकों में से एक था। कहानी के इसी पात्र बगीरा से काले तेंदुए को जोड़ा जाता रहा है।

पेड़ व पत्थरों के बीच बार-बार दिख रहा तेंदुआ

पेड़ व पत्थरों के बीच बार-बार दिख रहा तेंदुआ

परिक्षेत्र अधिकारी, खवासा बफर के राहुल उपाध्याय बताते हैं कि यह काला तेंदुआ पेड़ पर आराम फरमाता है। पत्थरों के बीच और पर्यटकों को जिप्सियों के रास्ते में दिखाई दे रहा है। काले तेंदुआ को देखने के लिए बंगाल, नासिक, मुंबई और महाराष्ट्र के कई शहरों से पर्यटक आ रहे हैं और करीब से दीदार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह काला तेंदुआ पहले दिखाई दिए तेंदू से लगे 2020 में दिखाई दिया काला तेंदुआ महाराष्ट्र के जंगल में चला गया है।

अलग प्रजाति नहीं है काला तेंदुआ

अलग प्रजाति नहीं है काला तेंदुआ

विशेषज्ञ बताते हैं कि मध्य प्रदेश और देश में जो तेंदुए हैं काला तेंदुआ भी उसी प्रजाति का है या अलग कोई प्रजाति नहीं है केवल अनुवांशिक उत्परिवर्तन जेनेटिक म्यूटेशन के कारण इस कारण काला हो जाता है।द्रव्य मेलानिन के कारण इस कारण काला हो जाता है। काला रंग होने के कारण इसे जंगल का भूत विकास जाता है अक्सर रात में दिखाई देने पर काले तेंदू के सिर्फ आकर ही चमकती है, जिससे कई बार ग्रामीण भी जाते हैं।

पेंच टाइगर रिजर्व में तकरीबन 700 से 800 तेंदुए

पेंच टाइगर रिजर्व में तकरीबन 700 से 800 तेंदुए

जानकारों के मुताबिक मादा तेंदुआ ने करीब 9 महीने पहले तीन शावकों को जन्म दिया था जिसमें से एक तेंदुआ का रंग काला है। 2 साल पहले भी ऐसी जंगल में काले रंग का तेंदुआ दिखाई दिया था लेकिन अब वह महाराष्ट्र के जंगल में चला गया है। पेंच टाइगर रिजर्व में तकरीबन 700 से 800 तेंदुए निवास करते हैं।

वन विहार में अब होगी बाघों की ब्रीडिंग

वन विहार में अब होगी बाघों की ब्रीडिंग

मध्य प्रदेश में 10 साल बाद वन विहार नेशनल पार्क में बाघ की ब्रांडिंग हो सकेगी। इसके लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से पुन: हरी झंडी दे दी है। बिल्डिंग का काम बन गया प्रबंधन और नानाजी देशमुख विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक संयुक्त रूप से करेंगे

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