पशुपालन विभाग ने लंपी वायरस को लेकर MP में जारी किया अलर्ट, प्रदेश के किसानों में डर का माहौल
एमपी के रतलाम में 2 गांवों के मवेशियों में लंपी वायरस के लक्षण मिलने के बाद पशुपालन विभाग ने प्रदेश में एलर्ट जारी कर दिया है।
भोपाल,6 अगस्त। मध्यप्रदेश में कोरोना के बाद अब प्रदेश के किसानों को एक नई बीमारी ने डरा दिया है। ये बीमारी इंसानों को नहीं बल्कि, मवेशियों में तेजी से फैलती है। एमपी के रतलाम में 2 गांवों के मवेशियों में लंपी वायरस के लक्षण मिलने के बाद पशुपालन विभाग ने प्रदेश में एलर्ट जारी कर दिया है। एमपी के सीमावर्ती राज्यों में लम्पी स्किन डिज़ीज़ की पुष्टि होने के बाद शासन ने एडवाइजरी जारी की है। भारत सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी के संबंध में पशुपालन विभाग मध्य प्रदेश के संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि गाइड-लाइन अनुसार रोग की पहचान और नियंत्रण के लिए सदैव सजग रहें। लक्षण दिखाई देने पर नमूने एकत्रित कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी राज्य पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला भोपाल को भेजें।

जानें लंपी वायरस के बारे में
लंपी स्किन डिसीज पशुओं को होने वाले एक वायरल बीमारी है। यह बीमारी मच्छर और मक्खियों के जरिए एक से दूसरे मवेशियों में फैलती है। लंपी स्किन डिज़ीज़ पशुओं की वायरल बीमारी है, जो पॉक्स वायरस से मच्छर, मक्खी, टिक्स आदि से एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है। शुरूआत में हल्का बुखार दो-तीन दिन के लिये रहता है। इसके बाद पूरे शरीर की चमड़ी में 2-3 सेंटीमीटर की गठानें निकल आती हैं। ये गठान गोल उभरी हुई होती है, जो चमड़ी के साथ मांसपेशियों की गहराई तक जाती है और मुंह, गले एवं श्वांस नली तक फैल जाती है। साथ ही लिम्फ नोड, पैरों में सूजन, दुग्ध उत्पादन में कमी, गर्भपात, बांझपन और कभी-कभी पशु की मृत्यु भी हो जाती है।

पशु दो-तीन सप्ताह में हो जाते हैं ठीक
लंपी वायरस को लेकर संचालक डॉ आरके मेहिया ने बताया कि अधिकतर संक्रमित पशु दो-तीन सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन दूध उत्पादकता में कमी कई सप्ताह तक बनी रहती है। मृत्यु दर एक से 5 प्रतिशत और संक्रामकता दर 10 से 20 प्रतिशत होती है। संक्रमण दर एवं मृत्यु दर के डेटा निर्धारित प्रपत्र में डीएचएडी को भेजा जाता है।

सुरक्षा और बचाव के उपाय
डॉ आरके मेहिया ने बताया कि संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से तत्काल अलग करें। संक्रमित क्षेत्र में बीमारी फैलाने वाले मक्खी-मच्छर की रोकथाम के लिये आवश्यक कदम उठायें। संक्रमित क्षेत्र से अन्य क्षेत्रों में पशुओं का आवागमन प्रतिबंधित करें। संक्रमित क्षेत्र के बाजार में पशु बिक्री, पशु प्रदर्शनी, पशु संबंधित खेल आदि पर पूर्णत: प्रतिबंध लगायें। संक्रमित पशु का सेम्पल लेते समय पीपीई किट सहित सभी सुरक्षात्मक उपाय अपनाएं। संक्रमित पशु प्रक्षेत्र, घर आदि जगहों पर साफ-सफाई, जीवाणु एवं विषाणुनाशक रसायन का प्रयोग करें।

लंपी वायरस कितना खतरनाक ?
लंपी वायरस इतना खतरनाक भी है कि कई बार इससे पशुओं की मौत भी हो जाती है। इस बीमारी में शुरुआत में पशु को दो-तीन दिन के लिए हल्का बुखार रहता है इसके बाद पूरे शरीर में यह तेजी से फैलता है। गोल उभरी हुई गटानें शरीर पर दिखने लगती हैं। जो चमड़ी से होते हुए मसल से शरीर के अंदर तक जाती है। संक्रमित होने के बाद पशु खाना पीना छोड़ देता है पहले पशु की स्कीम फिर ब्लड के बाद दूध पर असर पड़ता है। इसके बाद पशु धीरे-धीरे चलने में लाचार हो जाता है। वायरस कितना खतरनाक इंपैक्ट होता है कि 15 दिन के भीतर तड़प तड़प कर आशु की मौत हो जाती है।
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