दिग्विजय सिंह के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के वीडियो ट्वीट पर बवाल
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक विवादित वीडियो शेयर किया हैं जिसे उन्होंने खरगोन का बताया जबकि वह वीडियो 2019 में तेलंगना में बनाया गया था।
भोपाल,14 अप्रैल। मध्य-प्रदेश के खरगोन में भड़की हिंसा भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन सियासत कम होने का नाम नहीं ले रही है। राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के बाद अब बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विवादित ट्वीट का मामला सामने आया है।

दरअसल, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अपने टि्वटर हैंडल से एक वीडियो को शेयर किया है, जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा है कि 'ये है खरगोन में चाचा जान दिग्विजय सिंह के शांतिदूत, पुलिस इन पर कार्रवाई ना करें तो क्या करें। आस्तीन के सांप कोई भी हो फन कुचलना जरूरी है।' वीडियो में एक मुस्लिम युवक कह रहा है कि 4 गाड़ियां हमारे एरिया में हैं, हम जरा कुछ करें तो तहलका मचा देते हैं ये लोग। इतना डर काफी है तुम्हारे लोगों के लिए। समझ गए न।
इस ट्वीट के बाद कांग्रेस नेताओं ने उठाए सवाल

कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने यह वीडीओ ट्वीट कर इसे खरगोन का बताया है। क्या यह वीडीओ खरगोन का है? शायद नही..
सलूजा ने कहा यदि यह वीडियो वहां का नहीं है तो इस झूठे वीडियो के आधार पर इन पर भी मुक़दमा दर्ज होना चाहिये। यह सद्भाव बिगाड़ने का कृत्य है।
वहीं पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने लिखा कि 'कैलाश जी आपने जो वीडियो डाला है वह खरगोन का नहीं है जिस भाषा का उपयोग आपने किया है वह भड़काने वाली है। क्यों न शिवराज जी व नरोत्तम जी जो कि आपके खास शुभचिंतक हैं, आप के खिलाफ मुकदमा दायर करें ? मैं नहीं करूंगा क्योंकि मैं जानता हूं आपके आजकल अच्छे दिन नहीं चल रहे हैं।'
इससे पहले भी कई बार यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हुआ
तेलंगना के निजाम में स्थित स्टार होटल के सामने बनाया वीडियो 2019 का है। इस वीडियो को बनाने के वाले के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ था। पिछले कुछ समय में सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े मामलों में यह वीडियो बार-बार सामने आ रहा है यहां तक कि राजस्थान की करौली हिंसा के बाद भी यह वीडियो वायरल हुआ था यूपी में भी कुछ समय पहले या वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ था।
खैर अब देखते हैं इस मामले में आगे क्या होता है क्योंकि फिलहाल अब तक विजयवर्गीय ने इसे अपनी ट्वीटर हैंडल से डिलीट नहीं किया है।












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