MP के आखिर इस पर्वत पर ही पांडवों ने क्यों काटा था अज्ञातवास, एक लाख गुफाओं का आज भी मिलता है प्रमाण
शहडोल, 16 जुलाई। महाभारत के समय में कौरवों से द्यूत क्रीडा के दौरान पांडवों को हराने के बाद उन्हें 13 वर्षों का वनवास व एक वर्ष के अज्ञात वास पर भेजा था। पांडवों ने वनवास पूरा कर अज्ञातवास के लिए शहडोल जिले के बुढार जनपद के लखबरिया गांव को समय के लिए चुना था।

स्थानीय ग्रामीणों ने दी जानकारी
महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय शहडोल जिले के बुढ़ार क्षेत्र अंतर्गत लखबरिया गांव में भी बिताया था। जनश्रुति और इतिहासकारों के मुताबिक अज्ञातवास के दौरान पांडवों का शहडोल जिले में विचरण रहा है। इस दौरान वे तब के घने जंगलों के बीच अरझुला पहाड़ में पहुंचे। वहां रहते हुए एक ऐसी गुफा बनाई जिसमें 1 लाख कक्ष थे। इसके बाद उसका नाम लखबरिया पड़ गया। यह क्षेत्र मैकल पर्वत श्रृंखला की तराई में स्थित है।
आज भी मिलते हैं प्रमाण
लखबरिया में स्थित गुफाओं का निर्माण दूसरी- तीसरी सदी से 6वीं सदी के दौरान किया गया होगा। जिसके प्रमाण आज भी मिलते हैं। कठोर लाल रेत और मजबूत पहाड़ के चट्टानों से निर्मित इस गुफा में अब कुछ ही कमरे सुरक्षित बचे हैं। बाकी सभी का प्रवेश द्वार मिट्टी से दब गया है।
तलाब से निकलती है प्रतिमाएं
यहां स्थित तालाब से आज भी ऐसी कई प्रतिमाएं निकलती हैं जो यह बताती हैं कि पांडवकालीन समय में यहां उनकी गतिविधियां रही होंगी। लखबरिया की गुफाओं का रहस्य जानने आज भी लोग दूर-दूर से शहडोल जिला पहुंचते हैं।
पुजारियों ने जानकारी दी
पुजारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि मंदिर पुरातत्व विभाग का धरोहर है तथा इसके संरक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है, और हम इसकी देखरेख करते हैं।












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