कांग्रेस में शामिल होने वाले मलखान सिंह क्यों बने थे डाकू, रेप करने वालों को मार देते थे गोली
अन्याय के खिलाफ बंदूक उठाने वाले मलखान सिंह ग्वालियर-चंबल संभाग में बागी होने के चलते काफी चर्चित रहे। बताया जाता है कि गांव के मंदिर की 100 बीघा जमीन के लिए उन्होंने अपने हाथों में बंदूक उठा ली थी और डाकू बन गए थे। मलखान सिंह ने कल भोपाल में भाजपा का दामन छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया। इसके बाद से सोशल मीडिया पर मलखान सिंह को लेकर काफी चर्चाएं हो रही है।
चंबल के पहले डाकू जिनके पास थी ऑटोमैटिक अमेरिकन राइफल
मलखान सिंह के बारे में कहा जाता है कि वे चंबल के पहले ऐसे डाकू है, जिनके पास ऑटोमेटिक अमेरिकन राइफल थी। मलखान सिंह ने डाकू रहते हुए महिला उत्पीड़न को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। उनका ख़ौफ ऐसा था कि कोई डाकू किसी महिला का रेप नहीं करता था। जब मलखान सिंह ने अपने गिरोह के साथ आत्मसमर्पण किया तो भिंड में हजारों लोग उनकी एक झलक पाने के लिए उमर पड़े थे।

नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर की थी भाजपा जॉइन
मलखान सिंह ने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर सपा छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली थी। लेकिन भाजपा में लगातार उनकी कुछ फर्क नहीं होने से पार्टी से काफी खफा चल रहे थे। कल 9 अगस्त बुधवार को उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। पूर्व सीएम कमलनाथ ने कांग्रेस पार्टी का गमछा पहनकर सदस्यता दिलाई। पिछले दिनों जब प्रियंका गांधी ग्वालियर आई थी तो रैली में शामिल होकर उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने के संकेत दे दिए थे।
कौन है मलखान सिंह
70 के दशक में भिंड जिले के बिलाल गांव की 75% से अधिक जमीन कैलाश नारायण नामक दबंग और उसके परिजनों के कब्जे में थी। तत्कालीन प्रदेश सरकार में उसके चाचा मंत्री भी थे। इतना ही नहीं दबंगई के चलते कई वर्षों तक सरपंची भी इसी परिवार के पास रही। तब गांव में मंदिर की 100 बीघा जमीन को लेकर विवाद हुआ, दरअसल मंदिर की जमीन पर इसी परिवार ने कब्जा कर रखा था। जब मलखान सिंह ने इस बात का विरोध किया और गांव वालों को इकट्ठा करना शुरू किया तो इस परिवार ने मलखान सिंह को झूठे मामले में जेल भिजवा दिया।
इसके बाद मलखान सिंह जमानत पर यह होकर बाहर आए और इस दबंग परिवार के खिलाफ खुलकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सरपंची के चुनाव में उन्होंने पर्चा तक भर दिया। चुनाव प्रचार के दौरान ही उन्होंने नदी किनारे मंदिर की 100 बीघा जमीन का मुद्दा उठाया इससे कैलाश नारायण नाराज हो गया और मलखान के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर दी। उन पर आरोप लगाया गया कि उनका संपर्क डाकू गिरधारीय से है। इसके बाद पुलिस मलखान सिंह को पीटते हुए ले गई। इसके बाद कैलाश नारायण के खास आदमी की हत्या हो जाती है और इसका आरोप भी मलखान सिंह पर मढ़ दिया जाता है। होली के दिन मलखान के दोस्त की हत्या कर दी गई, जिससे नाराज मलखान सिंग बागी हो गए और हाथों में बंदूक उठा ली।
मलखान सिंह ने बिहार में अपने चचेरे भाई और दोस्तों के साथ मिलकर खुद की गैंग बनाई हथियार के लिए अपहरण और लूट की वारदातों को अंजाम दिया गैंग मजबूत हुआ तो मलखान सिंह एक रात गांव लौटे और कैलाश नारायण के घर पहुंच गए माइक से अनाउंसमेंट करके कैलाश को ललकारा कैलाश के निकलते मलखान सिंह और उसकी गैंग ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी इतनी फायरिंग के बावजूद कैलाश जिंदा भाग निकला। इसके बाद कई दिनों तक मलखान ने कैलाश को ढूंढा और ढूंढ कर उसकी हत्या कर दी। डाकू बनने के 15 साल तक बीहड़ ही उनका ठिकाना था।












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