यूपी के चौकीदार बोले- नाम के इस्तेमाल से अच्छा हमारी समस्याएं सुलझाएं प्रधानमंत्री

Barabanki news, बाराबंकी। लोकसभा चुनाव में राजनीतिक प्रोपोगेंडा बने चौकीदार इस समय सभी के दिमाग पर छाए हुए हैं। किसी ने अपने नाम के आगे चौकीदार लिखवा लिया तो किसी ने लिखा 'हां मैं भी चौकीदार', तो कोई इसी का विरोध करते हुए 'चौकीदार चोर' है का नारा बुलंद करके चुनावी तैयारियों में लगा हुआ है। लेकिन जिन चौकीदारों के नाम पर देशभर में राजनीति की जा रही है उन्हीं की माली हालत बेहत खराब है। सरकारें किसी की भी रही हों और स्थितियां चाहें जो भी रही हों गांवों में तैनात इन चौकीदारों पर न किसी का ध्यान गया और न ही किसी ने इनके बारे में आज तक सोचा।

बुनियादी सुविधाएं भी नहीं जुटा पा रहे चौकीदार

बुनियादी सुविधाएं भी नहीं जुटा पा रहे चौकीदार

प्रशासनिक कामों में अहम भूमिका निभाने वाले इन चौकीदारों की हालत यह है कि वे अपनी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं जुटा पा रहे हैं। और जो राजनीतिक पार्टियां उनका नाम लेकर राजनीति करने में जुटी हैं उन्होंने भी उनकी ओर ध्यान नहीं दिया। बाराबंकी की फतेहपुर कोतवाली में तैनात करीब 70 चौकीदार भी इससे आहत हैं कि उनके नाम का राजनीति में उपयोग तो किया जा रहा है, लेकिन उनकी ओर ध्यान किसी का नहीं जा रहा।

क्या कहते हैं चौकीदार

क्या कहते हैं चौकीदार

भाजपा के चौकीदार कैंपेन को लेकर फतेहपुर कोतवाली में कार्यरत चौकीदार सरकार से मिलने वाली सुविधाओं और मानदेय का रोना रोते नजर आए। चौकीदार हरनाम का कहना है कि साल 1986 में उन्हें 50 रुपए मिलता था फिर उनका मेहनताना 100 रुपए हुआ। जो बढ़ते-बढ़ते अब रोजाना पचास रुपए के हिसाब से डेढ़ हजार तक पहुंचा है। उनका कहना है कि सरकार नाम के साथ सुविधाएं और मानदेय बढ़ाए, जिससे परिवार का गुजार हो सके। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नाम के साथ चौकीदार लिखा है, यह खुशी की बात है लेकिन नाम को आगे बढ़ाने से बेहतर होता की वह गरीब चौकीदारों के लिए सुविधाएं देते। चौकीदार मेहनत करने के बाद भी परेशानी की जिंदगी बिताते हैं। सिर्फ चौकीदार लिखने से कुछ बदलने वाला नहीं, बल्कि हमारा मेहनताना बढ़ाएं जिससे हम भी अपने परिवार और बच्चों का गुजारा चला सकें।

चौकीदारों का मानदेय बढ़ाया जाए

चौकीदारों का मानदेय बढ़ाया जाए

वहीं, चौकीदार धीरज का कहना है कि यह गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री चौकीदार जैसा छोटा नाम अपने नाम के साथ जोड़ रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री को चौकीदारों की बदहाली का भी संज्ञान लेना चाहिए। जिससे परिवार का पालन हो सके। सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं दी जाती। चौकीदारों का मानदेय बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि वह कई बार अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर चुके हैं। यहां तक कि अपनी आवाज बुलंद करने को लेकर मुलायम सिंह यादव की सरकार में उनको जेल तक जाना पड़ा था। लेकिन हमारी स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।

हमें हमारा हक भी दे सरकार

हमें हमारा हक भी दे सरकार

बाबू चौकीदार का कहना है कि हमारा काम रखवाली करना है, लेकिन पुलिस वाले हमसे झाड़ू बर्तन और अपने सारे निजी काम करवाते हैं। उनका कहना है कि जब हम सरकारी काम करने के लिए रखे गए हैं तो हमसे पुलिस वाले अपना निजी काम क्यों करवाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अगर हमारे नाम का इस्तेमाल कर रही है तो हमें हमारा हक भी दे। क्योंकि सिर्फ नाम के साथ चौकीदार जोड़ने से हमारा कुछ भला नहीं होने वाला। 50 रुपए रोज के मेहनताने पर आजकल क्या होता है। नाम का इस्तेमाल कर राजनीति हो सकती है। लोग चोर कह रहे हैं। जबकि चौकीदार मेहनती और ईमानदार होता है। पुलिस के साथ रात में भी मेहनत करता है। लेकिन मानदेय के नाम पर मात्र 1500 रुपये दिए जाते हैं। वर्दी और डंडा तक नहीं मिलता।

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