Ballia: CRPF जवान का प्रार्थिव शरीर आते ही पूरे गांव में मचा कोहराम, गार्ड आफ आनर के साथ हुई अंतिम विदाई
ग्वालियर में रविवार की सुबह यह सीआरपीएफ जवान जंगल में अपनी आखिरी परेड को निकला और फिर कभी न जागने वाली नींद सो गया। ये बलिया का लाल अपने पीछे तीन मासूम बच्चों को रोता बिलखता छोड़ गया।

जब सीआरपीएफ के जवान की मौत की खबर उसके घर वालों के पास पहुंची तो कोहराम मच गया। इस सूचना से परिवार ही नही बल्कि पूरा गांव सदमे में है। 28 वर्षीय सीआरपीएफ जवान हृदयनारायण सिंह का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर आते ही पूरे गांव ग़मगीन हो गया। ग्रामीणों ने परिजनों का ढांढस बंधाया और फिर अंतिम संस्कार की रस्म शुरू कर दी। सीआरपीएफ के जवानों व स्थानीय पुलिस के जवानों ने शहीद जवान को गार्ड आफ आनर के साथ अंतिम विदाई दी। इस दौरान परिवार वालों का रो-रो कर बुरा हाल था तो ग्रामीणों के आंसू नहीं रुक रहे थे।

हांथीयो के झुंड ने ली 'बलिया के लाल' की जान
मिली जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश के ग्वालियर में रविवार की सुबह जंगल में परेड के दौरान सीआरपीएफ जवान हृदयनारायण सिंह हाथियों के झुंड में फंस गए। जहां हांथीयो द्वारा रौंदे जाने से जवान हृदय नारायण सिंह ने दम तोड़ दिया। मिली सूचना के मुताबिक बिहार राज्य का भी एक जवान इसी हांथीयो के झुंड का शिकार हो गया और उसकी भी मौत हो गई थी। सीआरपीएफ जवान हृदयनारायण सिंह लगभग 13 साल से देश को अपनी सेवा दे रहे थे।

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तीन बच्चों के पिता थे सीआरपीएफ जवान हृदयनारायण सिंह
परिवार वालो की माने तो वर्ष 2011 में हृदयनारायण सिंह की नियुक्ति हुई थी। शादी के बाद उनके दो पुत्र व एक पुत्री है, जबकि एक भाई आर्मी में तैनात हैं। इस घटना से हर कोई मर्माहित है। बच्चों के सर से पिता का साया यूँ हटना हर किसी को कचोट रहा है। पत्नी के सामने मानो अंधेरा छा गया हो। इस दुख के घड़ी में पूरा गांव बलिया के लाल हृदयनारायण सिंह की एक झलक पाने को उमड़ गया। इस दौरान गांव के प्रधान प्रतिनिधि भरत गुप्ता सहित अन्य विशिष्ट जनों ने शहीद जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनका अंतिम संस्कार सम्मान पूर्वक बलिया गंगा तट पर किया गया।












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