Bahraich News: मौत से लड़कर मां ने की बेटे को बचाने की कोशिश, लेकिन किस्मत ने दोनों को छीन लिया
Bahraich News: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में रविवार को एक ऐसा हादसा सामने आया, जिसने हर किसी की रूह को हिला कर रख दिया। एक माँ ने अपने पाँच साल के बेटे की जान बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी, लेकिन तेज़ रफ्तार ट्रेन की चपेट में आकर दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
यह दर्दनाक घटना बहराइच के रेलवे क्रॉसिंग 41C के पास हुई, जहाँ माँ और बेटा रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे। अचानक बच्चा हाथ छुड़ाकर दूसरी पटरी की ओर भागा, तभी सामने से ट्रेन आती दिखी। माँ ने बच्चे को बचाने के लिए खुद को जोखिम में डाला और दौड़ पड़ी और ट्रेन दोनों को रौंदती चली गई।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह हादसा इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद हर व्यक्ति सन्न रह गया। माँ और बेटे के शव ऐसे हालत में पड़े थे कि देखने वालों की आँखें भर आईं। लोगों ने बताया कि बच्चा और माँ दोनों एक-दूसरे में लिपटे हुए थे, मरने के बाद मां की ममता झलक रही थी।
अधूरे निर्माण को लोगों ने बताया हादसे की वजह
हादसे के बाद से क्षेत्र में गुस्सा और ग़म का माहौल है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह दुर्घटना प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। पहले जहाँ एक रेलवे फाटक हुआ करता था, वहाँ अब अधूरे निर्माण कार्य के कारण लोग जान जोखिम में डालकर ट्रैक पार करने को मजबूर हैं।
अखिलेश यादव, जो वहीं के निवासी हैं, ने बताया कि वर्षों से इस जगह पर अंडरपास बनाने की माँग की जा रही थी, लेकिन रेलवे और प्रशासन ने सिर्फ आश्वासन दिए। अब वही लापरवाही दो मासूम जिंदगियों को लील गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। सीओ सिटी पहुँप सिंह ने बताया कि दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस रास्ते से माँ-बेटा रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे, वह पूरी तरह असुरक्षित था।
उन्होंने माना कि यह हादसा अधूरे निर्माण और सुरक्षा उपायों की कमी के चलते हुआ है। पुलिस ने घटना की विस्तृत जाँच शुरू कर दी है और रेलवे प्रशासन से भी रिपोर्ट तलब की गई है।
मां के ममता की हर ओर चर्चा
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि माँ की ममता दुनिया की सबसे ताकतवर भावना होती है। अपने बच्चे की जान को खतरे में देखकर वह खुद की परवाह किए बिना दौड़ पड़ी। यह एक ऐसी कुर्बानी है, जिसे शब्दों में बयान कर पाना मुश्किल है।
दिव्यांश की माँ ने अपने बच्चे को बचाने के लिए जो किया, वह समाज के हर व्यक्ति को सोचने पर मजबूर करता है। माँ केवल जन्म देने वाली नहीं होती, वह जीवन देने वाली शक्ति होती है और जब वक्त आता है, तो अपनी जान भी दे देती है।
इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही निर्माण कार्य को पूरा करवाते हुए रेलवे फाटक लगवाएं यदि यहाँ कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।












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