कौन हैं आकांक्षा तिवारी, जिन्होंने टाॅप किया UP PCS-J 2018
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की रहने वाली आकांक्षा तिवारी ने उत्तर प्रदेश पीसीएस जे परीक्षा में टॉप किया है। पढ़ाई के दौरान ही बेहद ही मेधावी और एलएलबी में गोल्ड मेडलिस्ट रही आकांक्षा तिवारी की उद्देश्य भी उनके टॉपर होने की वजह बताती है। आकांक्षा की बड़ी बहन विदेश में नौकरी कर रही है। आकांक्षा के लिए भी यह मौका था कि वह भी विदेश में पढ़ाई करें या वहां जाकर नौकरी करें, लेकिन आकांक्षा ने अपने पिता से कहा था कि वह हिंदुस्तानी हैं और अपने देश में ही रहकर देश की सेवा करेंगी। कड़ी मेहनत से आज उस दिशा में आकांक्षा ने बड़ा कदम बढ़ाया है और सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपी पीसीएस जे को न सिर्फ पास किया, बल्कि टॉपर बनकर पूरे देश के लिए उदाहरण बनी हैं।

दिल्ली में रहकर की पढ़ाई
आकांक्षा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की रहने वाली हैं और उनका परिवार आज भी वहीं पर है, लेकिन आकांक्षा का जन्म दिल्ली में हुआ था। 27 जुलाई 1990 को वह दिल्ली में पैदा हुई हैं और उनकी शुरुआती शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा भी दिल्ली में ही पूरी हुई। आकांक्षा ने अपनी इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई डीएवी कॉलेज दिल्ली से की और इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीएससी में स्नातक किया। इस बीच पिता ने बेटी से उसके करियर को लेकर विदेश जाने और वहीं नौकरी करने का ऑफर दिया, तब आकांक्षा ने पिता को साफ लहजे में बताया कि वह हिंदुस्तानी हैं और अपने देश में ही रहकर देश की सेवा करेंगी। आकांक्षा ने इसके बाद विधि के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया और चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ कानून की पढ़ाई करने के लिए एडमिशन ले लिया। पढ़ने में बेहद ही होनहार आकांक्षा ने एलएलबी में भी गोल्ड मेडल हासिल किया और हैदराबाद की एक कंपनी में लीगल एसोसिएट के पद पर नौकरी ज्वॉइन कर ली। नौकरी ज्वॉइन करने के बाद आकांक्षा को समझ में आया कि वह इस तरह से देश की सेवा नहीं कर सकती। उन्हें इसके लिए सरकारी क्षेत्र में आना होगा और इसके बाद उन्होंने तीसरे की तैयारी शुरू की और कड़ी मेहनत से उन्होंने अपने सपने को सच कर दिखाया और अब वह पीसीएस टॉपर बन गई हैं।

किसान हैं पिता
पीसीएस जे की टॉपर आकांक्षा जिस परिवार की रहने वाली हैं, वहां बेटी और बेटों में भेदभाव नहीं किया जाता, बल्कि बेटियों को भी आसमान छूने के लिए उतनी ही आजादी है, जितना कि बेटों के लिए। घर में दादा- दादी, माता-पिता, चाचा, भाई हर कोई मौजूद है और आकांक्षा की उपलब्धि पर हर किसी का सीना फक्र से चौड़ा हो चुका है। आकांक्षा के पिता सत्यदेव तिवारी जिला गोंडा के ग्राम देवरदा में आज भी किसानी करते हैं। उनका बड़ा बेटा शिवपूजन रियल स्टेट का काम करता है, जबकि छोटा बेटा गांव का ही ग्राम प्रधान है। बेटियों को पढ़ाने वा आगे बढ़ाने के लिए सत्यदेव तिवारी ने दिल्ली में ही एक घर खरीद लिया था और बेटियां वहीं रहकर पढ़ाई कर रही थी। दो बेटियों में आकांक्षा छोटी हैं। उनकी बड़ी बहन आंचल तिवारी ने दिल्ली से ही एमसीए की पढ़ाई की और मौजूदा समय में अमेरिका की एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी कर रही हैं। आंचल के अमेरिका जाने की साथ ही आकांक्षा को भी घरवालों ने कहा कि वह भी विदेश में जाकर पढ़ाई करें या नौकरी करें, लेकिन आकांक्षा ने देश में ही रहकर सेवा करने का फैसला किया और आखिरकार उन्होंने सफलता भी हासिल कर ली है।

बेटियों को आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए
बदलते हिंदुस्तान की सबसे सुखद तस्वीर यही है कि बेटियां बेटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। उत्तर प्रदेश पीसीएस जे की परीक्षा में टॉपर बनने वाली आकांक्षा तिवारी भी नारी सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण है। आकांक्षा तैयारी करने वाले युवा व खासकर लड़कियों को संदेश देते हुए कहती हैं कि मेहनत सही दिशा में करने की जरूरत है और अपनी मेहनत पर आपको भरोसा होना चाहिए। आकांक्षा का मानना है कि पढ़ाई के लिए कोई समय तय नहीं है, इसलिए जब भी मौका मिले आप इमानदारी से पढ़ाई करें और पूरे जी-जान के साथ अपने लक्ष्य के लिए एकाग्रएचित्त हो जाएं। अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों के साथ माता पिता व दादा दादी को देते हुए अकांक्षा कहती हैं कि बेटियों को आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।












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