Prayagraj News: 'दंड के बजाय छात्रों को सुधरने का मौका देना सही', इलाहाबाद हाईकोर्ट का कॉलेज को निर्देश

Allahabad High Court: उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रों के हक में फैसला सुनाते हुए एक निर्देश जारी किया है जिसके तहत कोर्ट ने कहा है कि छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही में दंडात्मक आदेश के बजाय उन्हें सुधरने का मौका देना चाहिए।

इसमें अदालत ने छात्र के निष्कासन संबंधी आदेशों को रद्द कर एमआइटी स्कूल आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालाजी प्रशासन गौतमबुद्धनगर को नई अंकतालिका जारी करने का निर्देश दिया है।

Allahabad High Court

क्या है मामला?
दरअसल, याचिकाकर्ता बीटेक के छात्र को संस्थान ने अनुशासनात्मक कार्रवाई कर छह महीने के लिए निष्कासित कर दिया था। इसके बाद छात्र ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका डाली थी और निष्कासन को खत्म करने की मांग की थी। याची ने कहा कि आरोप अस्पष्ट और सामान्य प्रकृति के हैं। इसके आधार पर निष्कासन एक कठोर दंड है। जिसके बाद अदालत ने सुनवाई करते हुए निष्कासन संबंधी आदेशों को रद्द कर एमआइटी स्कूल आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालाजी प्रशासन गौतमबुद्धनगर को नई अंकतालिका जारी करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। संस्थान में अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक तत्वों को शामिल करना होगा, जो इसके शैक्षणिक माहौल और सुधारात्मक दृष्टिकोण के लिए अनुकूल हो और जो छात्रों के मानसिक बदलाव के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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