फूलपुर में आखिर क्यों हारा गठबंधन, ये है असली 4 वजह
प्रयागराज। आम चुनाव में सपा बसपा गठबंधन के लिए फूलपुर लोकसभा सीट बेहद अहम थी और इस सीट पर जातिगत आंकड़ों और पिछले प्रदर्शन के आधार पर गठबंधन को सबसे अधिक मजबूत माना जा रहा था। उपचुनाव में यह सीट भी सपा के कब्जे में थी, लेकिन उसके बावजूद भी यहां गठबंधन बुरी तरहा से हारा। इस सीट से सवाल उठना लाजिमी है कि जब सपा अकेले लड़ी तो जीती थी और जब गठबंधन के साथ लड़ी तो हार गई। हार की वजह तलाश के दौरान कुछ ऐसे कारण रहे जो थे तो छोटे, लेकिन उनकी वजह से तैयार हुई परिस्थितियों ने सपा और गठबंधन को डुबो दिया।

सबसे बड़ा कारण
सबसे बड़ा कारण तो प्रत्याशी के चयन का था। गठबंधन के तहत सपा को यह सीट मिली थी, लेकिन नामंकन खत्म होने के चंद घंटे पहले तक किसी को भी नहीं पता था कि सपा यहां से किसे टिकट दे रही है। कार्यकर्ता और स्थानीय नेता भी असमंजस में था, ना प्रचार हो रहा था और ना ही किसी चेहरे के नाम पर कोई माहौल बनाया जा पा रहा था। और जब प्रत्याशी की घोषणा हुई तो नामंकन के खत्म होने के मुहाने पर। जैसे तैसे नामंकन तो हो गया, लेकिन अब प्रचार के लिए इतना वक्त नहीं बचा था कि अचानक से प्रत्याशी बनकर आए पंधारी यादव माहौल बना देते।

बड़े चेहरे के नाम पर सियासत
फूलपुर लोकसभा सीट पर इस बार सपा बड़ा चेहरा उतारने की फिराक में थी। इसका कारण साफ था भाजपा ने एक बड़े पटेल चेहरे के तौर पर केशरी देवी का उतार दिया था और उनके चेहरे के सामने किसी बड़े नाम को उतारना ही इस सीट पर जीत के लिये मुफीद होता। लगभग यह फाइनल हो गया था कि इस बार मुलायम परिवार के कद्दावर सदस्य तेज प्रताप सिंह यहां से चुनाव लड़ते। लेकिन, आखिरी समय तक इस नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की जा सकी। जबकि तेज प्रताप के नाम पर यहां सर्वे हुआ, आधिकारिक बैठक में प्रस्ताव पर सहमति भी बनी। लेकिन बाहरी प्रत्याशी के नाम के डर के कारण अखिलेश ने तेज प्रताप को प्रत्याशी नहीं बनाया। सवाल यह था कि जब तेज प्रताप को नहीं उतारना था तो उनके नाम पर पहले माहौल बनाने और फिर उसी बने माहौल को खराब करने की क्या आवश्यकता थी।

मुस्लिमों की बात ना सुनना
फूलपुर लोकसभा सीट से इस बार मुस्लिम प्रत्याशी को उतारे जाने की मांग की जा रही थी। मुस्लिम धर्म गुरूओं ने तो इस बावत अखिलेश को खुला खत लिखा था और प्रयागराज बेल्ट में एक भी मुस्लिम को टिकट न देने पर सवाल उठाते हुये फूलपुर से मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट देने की मांग की थी। इसके लिये अतीक अहमद का भी नाम सुझाया गया था। अतीक के नाम पर अखिलेश की ओर से मूक सहमति भी थी, लेकिन मायावती की ओर प्रतिक्रिया नकारात्मक होने के कारण अतीक का नाम सिरे से खारिज कर दिया गया और दूसरा कोई मुस्लिम चेहरा इस इलाके में कद्दावर नजर ही नहीं आया। आंकड़े भी बताते हैं कि इस बार मुस्लिमों में वोटिंग को लेकर ना तो उत्साह रहा और ना ही मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में महिलाएं घर से बाहर निकली। जिसका असर यह रहा कि सोरांव, मउआइमा, लालगोपालगंज, और फूलपुर जैसे बड़े मुस्लिम इलाके में भी सपा को अपेक्षाकृत वोट नहीं मिला, फूलपुर कस्बाई इलाके में ही पंधारी यादव फाइट करते हुये रिजल्ट में नजर आये थे।

जब उफान पर था प्रचार तो खामोश थे सपाई
फूलपुर लोकसभा के चुनाव में इस बार आश्चर्यजनक और हास्यपद माहौल तो उस वक्त बन गया था जब भाजपा प्रत्याशी केशरी देवी पटेल का पूरा कुनबा, समर्थक भाजपा नेता कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में जी जान लगा चुके थे। गली गली टोलियां पहुंच कर माहौल बना रही थी। यहां तक सपा के उस समय अघोषित प्रत्याशी पंधारी यादव के गांव में भी भाजपा का प्रचार उफान पर था, तब सपा कार्यकर्ता खामोश थे। उनका प्रचार केवल चौराहे की चाय की दुकान पर सीमित था। प्रचार किसके लिये करना है, उनका सेनापति यहां कौन होगा, किसी को कुछ नहीं पता थां एक ओर यहां भाजपा अपना माहौल बनाती रही और दूसरी तरह सपा माहौल बनाने का मूक समर्थन करती रही। कोर सपाईयों के आलवा सपा को दूसूरे मतदाताओं के वोट ना के बराबर मिले, यहीं कारण था कि जीत हार में डेढ लाख से अधिक वोटों का अंतर आ गया।

पटेलों को नहीं साध सके
सपा ने फूलपुर सीट से इससे पहले नागेंद्र सिंह पटेल के सहारे पटेल वोटों को साधा था। जबकि पूर्व में धर्मराज पटेल के जरिये दो बार फूलपुर का किला फतह किया था। जबकि मुस्लिम चेहरे अतीक अहमद के भी सहारे एक बार फूलपुर को फतह कर चुकी थी। यानी पटेल और मुस्लिमों को साधने के लिये सपा हर बार अपना दांव चलती थी। लेकिन इस बार ना तो मुस्लिमों को सपा साध सकी और ना ही पटेल मतदाताओं को रिझाने के लिये कोई चेहरा सपा उतार सकी। यह जग जाहिर है कि फूलपुर का कुर्मी बाहुल्य इलाका अपने सजातीय प्रत्याशी के साथ हमेशा से खड़ा रहा है, फिर वह चाहे जिस पार्टी का प्रत्याशी रहा हो और यह बात शायद सपा भूल गयी थी। वह अपने मूल वोटों के सहारे आगे बढी और उम्मीद थी कि उसे बसपा के भी वोट मिल जायेंगे और जीत आसान होगी। लेकिन मोदी की खामोशी लहर इस बार भी चलती रही और सपा के हाथ से यह सीट फिसल गयी।
-
Uttar Pradesh Gold Price: ईद पर Lucknow-Agra समेत 8 शहरों में 24K-22K गोल्ड रेट क्या? कहां महंगा-कहां सस्ता? -
Kal Ka Mausam: 22 मार्च को Delhi-UP समेत किन राज्यों में बारिश का IMD अलर्ट? ओलावृष्टि-वज्रपात संकट कहां? -
Gold Rate Today: फिर सस्ता हो गया सोना, हाई से 28,000 तक गिरे भाव, अब कितने में मिल रहा है 22K और 18K गोल्ड -
'मैंने 6 मर्दों के साथ', 62 साल की इस बॉलीवुड एक्ट्रेस ने खोलीं लव लाइफ की परतें, 2 शादियों में हुआ ऐसा हाल -
Aaj Ka Chandi ka Bhav: अमेरिका-ईरान जंग के बीच चांदी धड़ाम! ₹38,000 सस्ती, आपके शहर का लेटेस्ट Silver Rate -
Irani Nepo Kids: अमेरिका में मौज कर रहे ईरानी नेताओं-कमांडरों के बच्चे, जनता को गजब मूर्ख बनाया, देखें लिस्ट -
Gold Rate Today: सोना सस्ता या अभी और गिरेगा? Tanishq से लेकर Kalyan, Malabar तक क्या है गहनों का भाव? -
Iran Espionage Israel: दूसरों की जासूसी करने वाले इजरायल के लीक हुए सीक्रेट, Iron Dome का सैनिक निकला जासूस -
Mamta Kulkarni: क्या साध्वी बनने का नाटक कर रही थीं ममता कुलकर्णी? अब गोवा में कर रहीं ऐसा काम, लोग हुए हैरान -
कौन थे कैप्टन राकेश रंजन? होर्मुज में 18 दिनों से फंसा था शिप, अब हुई मौत, परिवार की हो रही है ऐसी हालत -
Mojtaba Khamenei: जिंदा है मोजतबा खामेनेई! मौत के दावों के बीच ईरान ने जारी किया सीक्रेट VIDEO -
कौन है हाई प्रोफाइल ज्योतिषी? आस्था के नाम पर करता था दरिंदगी, सीक्रेट कैमरे, 58 महिलाओं संग मिले Video












Click it and Unblock the Notifications