शादी के एक साल के अंदर नहीं ले सकते तलाक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

Prayagraj News, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलाक के मामले पर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने शादी के बाद एक साल अंदर ही टूट रही जोड़ियों पर चिंता व्यक्त करते हुए तलाक देने की समय सीमा पर बड़ा आदेश जारी किया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि शादी के एक साल के अंदर तलाक नहीं दिया जा सकता। यानी शादी की सालगिरह से पहले तलाक अवैध होगा और उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह कोई नया नियम या कानून नहीं बना रहे हैं, बल्कि पूर्व में ही बने कानून का अनुपालन करने को कह रहे हैं। हाईकोर्ट ने बताया कि विवाह अधिनियम की धारा 13 बी में यह स्पष्ट निर्देश है कि शादी के साल के बाद ही तलाक आपसी सहमति से किया जा सकता है। लेकिन, शादी के बाद एक साल के अंदर तलाक की वैधानिकता सही नहीं है। फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब नये मामलों का जहां स्वत: निस्तारण हो जायेगा। वहीं, शादियां बचाने के लिये भी लोगों को वक्त मिलेगा। गौरतलब है कि आपसी सहमति से तलाक के लिये शादी के एक साल पूरे होने के अलावा भी कई शर्तें हैं, जैसे 6 महीनों से अलग रहना, पति पत्नी के सांसारिक रिश्तों का पालन ना करना आदि, जिन्हें पूरा किये बगैर वैधानिक रूप से तलाक की अर्जी कोर्ट अस्वीकार्य कर देता है।

क्या था मामला

क्या था मामला

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के रहने वाले अर्पित गर्ग और आयुषी जायसवाल ने तलाक के लिये परिवार न्यायाधीश की अदालत में अर्जी दी थी। 20 दिसंबर 18 को न्यायधीश ने नियमावली का हवाला देते हुये शादी के एक साल तलाक की अर्जी देने की सलाह देते हुये अर्जी खारिज कर दी और तब तक रिश्तों को वापस जोड़ने की कोशिश को कहा था। हालांकि दंपती ने इसे अपने अधिकारों का हनन बताकर कहा कि उन दोनों की मर्जी है कि वह साथ नहीं रहेंगे, ऐसे में उन्हें कानूनी रूप से इसकी मान्यता दी जानी चाहिये। हालांकि पारिवारिक कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंपत्ति को अन्य नियमों में छूट दी जा सकती है, लेकिन नियमावली जहां से शुरू ही होती है, उसे तो उन्हे पूरा करना पडेगा। पारिवारिक न्यायालय से निराश होकर दंपती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली और पारिवारिक न्यायालय के आदेश को चैलेंज करते हुये तलाक की मांग की।

डबल बेंच में सुनवाई

डबल बेंच में सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति एसके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दंपत्ति की याचिका पर सुवाई शुरू की तो पाया कि दोनों की शादी 9 जुलाई 2018 को हुई थी और अभी तक उनकी शादी को एक साल भी नहीं हुये थे। उनका तलाक का आधार विवाह अधिनियम के दूसरे नियम पति पत्नी का अलग रहना था। जिसमें कोर्ट को बताया गया कि वह दोनों पिछले 12 अक्तूबर 18 से अलग रह रहे हैं और आपसी सहमति से तलाक चाहते हैं। अदालत में दंपत्ति की ओर से दलील दी गयी की उनका साथ रहना संभव नहीं है और वह दोनों की तलाक चाहते हैं, इसलिये उन्हें तलाक के लिये मंजूरी दी जाये।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने क्या कहा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका पर दलीलों के बाद पाया कि तलाक के लिये दंपत्ति की ओर से बताये गये कारण उनके तलाक के लिये पर्याप्त हैं। लेकिन विवाह अधिनियम की धारा 13 बी के तहत उन्हे तलाक के लिये शादी के कम से कम एक साल बाद आवेदन करना था। चूंकि यह वैधानिक व्यवस्था है, ऐसे में वैधानिक व्यवस्था को माफ नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलाक के लिऐ एक साल की अवधि का बीतना बाध्यकारी है। दंपत्ति को वैधानिक व्यवस्था में छूट नहीं दी जा सकती। हालांकि आपसी सहमति के कारण उनके लिये अन्य नियमों में ढील दी जा सकती हैं।

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