कौन हैं डॉ. तारिक मंसूर?, यूपी में बड़ा मुस्लिम चेहरा बनाने की कोशिश
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तारिक मंसूर को यूपी विधान परिषद का सदस्य नियुक्त कर दिया गया है। आइए जानते है कौन हैं डॉक्टर तारिक मंसूर...

Tariq Mansoor: यूपी विधान परिषद के लिए प्रदेश की योगी सरकार ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को सोमवार 3 अप्रैल को 6 नामों के नियुक्ति प्रस्ताव सौंपे, जिन्हें उन्हें मंजूरी दे दी। इन सबसे सबस अहम नाम अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर का है। तो वहीं, अब खबर आ रही है कि डॉक्टर तारिक मंसूर ने अपना कार्यकाल खत्म होने से कुछ हफ्ते पहले मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। आइए जानते है कौन हैं डॉक्टर तारिक मंसूर...
कौन हैं डॉ. तारिक मंसूर?
डॉक्टर तारिक मंसूर अलीगढ़ जिले के रहने वाले हैं और उन्होंने अवर लेडी फातिमा स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की। माध्यमिक शिक्षा के लिए तारिक मंसूर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पहुंचे और यहां से मेडिकल तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जेएन मेडिकल कॉलेज में बतौर प्रोफेसर काम किया। इस दौरान वे यूनिवर्सिटी के गेम्स कमेटी के सचिव भी बने। उनके पिता एएमयू के लॉ फैकल्टी में चेयरमैन और डीन रहे थे। उनकी पत्नी प्रो.हामिदा तारिक जेएन मेडिकल कॉलेज में नियुक्त हैं।
पीएम मोदी की तारफी कर आए थे चर्चाओं में
प्रो. तारिक मंसूर को 17 मई 2017 को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का कुलपति बनाया गया था। उनका कार्यकाल 17 मई 2022 को पूरा हो गया। लेकिन महामारी से उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने उनका कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया था। लेकिन, तारिक मंसूर ने एमएलसी बनाए जाने के बाद आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बता दें, तारिख मंसूर पिछले दिनों अपने कार्यों से खासी चर्चा में रहे हैं। उन्होंने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी। तो वहीं, उनके आरएसएस और भाजपा के सीनियर नेताओं से बेहतर संबंध की खूब चर्चा होती रही है।
योगी सरकार ने भेजा था तारिक मंसूर का नाम
विधान परिषद सदस्य बनाए जाने के लिए प्रो. तारिक मंसूर का नाम योगी सरकार की ओर से भेज गया था। जिसपर राज्यपालआनंदीबेन पटेल ने अपनी मुहर लगा दी। राजभवन की मंजूरी के बाद प्रो. मंसूर अब एमएलसी बन गए हैं। भाजपा की और से विधान परिषद सदस्य बनाए जाने वाले तारिक मंसूर पहले वीसी बन गए है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एएमयू के कुलपति के तौर पर वे हमेशा भाजपा के निशाने पर रहे हों, लेकिन उनके बेटे की शादी में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी पहुंचे थे।
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मुस्लिम वोट बैंक को अपने पक्ष में लाने की कोशिश करती दिखी BJP
साल 2014 के चुनावों में बीजेपी ने मुस्लिम नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने से परहेज किया था। लेकिन, 2024 के चुनाव आते ही बीजेपी मुस्लिम समेत सभी वर्गों के वोट बैंक को अपने पक्ष में लाने की कोशिश करती दिखाई दे रही है। तो वहीं, अब तारिक मंसूर को विधान परिषद भेजकर बीजेपी अपने फॉर्मूले 'सबका साथ, सबका विकास' यूपी की राजनीति में अलग प्रकार से लागू करने की कोशिश करती दिख रही है।












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