AMU में बहस- बुर्का पहनकर तिरंगा फहराना एंटी मुस्लिम
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। तो मुस्लिम संस्कृति के खिलाफ महिलाओं का झंडा फहराना... कम से कम अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बहुत से छात्रों को यही लगता है। वहां पर इन दिनों छात्र संघ के चुनाव के लिए कैंपेन का दौर जारी है। कुछ छात्र अपनी महिला सहपाठियों के झंड़ा फहराने का विरोध कर रहे हैं। उनके इस कदम का कड़ा विरोध हो रहा है।
पर एएमयू की छात्राएं भी दबंग हैं। वे इन कठमुल्ला मन के अपने साथियों की एक सुनने के लिए तैयार नहीं है। इनका कहना है कि वे इन छात्रों के कथित हुक्म को मानने के लिए तैयार नहीं हैं।
बुर्का पहनकर मत फहराओं झंडा
दरअसल हुआ यह कि कुछ छात्रों ने इस बात पर आपत्ति जताई कि बुर्का पहनने वाली कुछ छात्राएं झंडा फहरा रहीं थीं कैंपेन के दौरान। विरोध इस कथित तर्क पर हुआ कि साहब यह तो एंटी इस्लामिक है।
हालांकि एएमयू के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे लियाकत खान ने भी उन छात्रों की खिंचाई की जो छात्राओं के झंडा फहराने का संस्कृति के नाम पर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह गलत सोच है। सनद रहे कि एएमयू में हजारों छात्राएं पढ़ रही हैं, पर सिर्फ एक ने चुनाव लड़ने की हिम्मत दिखाई। इसका नाम है कहकशां खानम। उसने मान कि यहां का माहौल इस तरह का नहीं है,ताकि चुनाव लड़ा जा सके।
इस पूरी बहस पर अलीगढ़ मुस्लम यूनिवर्सिटी के चात्री रहे खालिद खान का कहना है कि छात्रओं के साथ एएमयू में भेदभाव होता है। इसलिए अगर छात्राओं के चुनाव लड़ने का विरोध हो रहा है,तो किसी को हैरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने माना कि वक्त का साथ कदमताल नहीं कर पाया एएमयू













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