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UP Police Agra: किराएदार की दुकान पर मालिक ने चलवाया बुलडोजर, पुलिस भी रही मौजूद? स्टेशनरी लूट ले गए लोग

UP Police Agra: उत्तर प्रदेश के आगरा में मंगलवार सुबह एक ऐसा मामला सामने आया जिसने आम लोगों के साथ प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रांस यमुना फेस वन क्षेत्र में एक किराएदार की दुकान को अचानक हथौड़ों और फिर बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। मामला हेरीटेज स्कूल के सामने का है, जहां दिन निकलते ही दुकान को घेरकर पहले मजदूरों ने छत तोड़ी, फिर पुलिस ने किराएदार को थाने भेजा और इसके बाद बुलडोजर ने दुकान को ध्वस्त कर दिया।

घटना के दौरान दुकान में रखे लाखों के स्टेशनरी सामान को लोग उठाकर ले गए। जो सामान नहीं उठा, वो मलबे में दब गया। हैरानी की बात यह रही कि घटनास्थल पुलिस चौकी से सिर्फ 150 मीटर की दूरी पर था, लेकिन किसी ने भी कार्रवाई को रोकने की कोशिश नहीं की। अब पुलिस पर मिलीभगत और लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।

UP Police Agra demolition

स्थानीय निवासी अवनीश मिश्रा, जो इस दुकान को किराए पर चला रहे थे, ने बताया कि उन्होंने यह दुकान राजेश कुमारी से ली थी और 'पवन बुक एंड स्टेशनरी' के नाम से व्यापार कर रहे थे। लेकिन राजेश कुमारी के बेटे विवेक कुमार ने हाल ही में दुकान खाली करने की धमकी दी थी। जब अवनीश ने समय मांगा, तो विवेक ने "रातों-रात दुकान खाली करा देने" की चेतावनी दी थी।

अलसुबह छत पर चढ़े मजदूर, घबराया दुकानदार

मंगलवार सुबह करीब साढ़े छह बजे अवनीश जब मॉर्निंग वॉक पर निकले तो देखा कि चार मजदूर उनकी दुकान की छत पर हथौड़े चला रहे हैं। विवेक कुमार भी अपने साथियों के साथ मौके पर मौजूद था। घबराकर उन्होंने 112 नंबर पर कॉल किया और अपने बड़े भाई अरविंद मिश्रा को भी बुलाया। थोड़ी देर में पुलिस पहुंची और दोनों पक्षों को थाने ले गई।

जब अवनीश और विवेक थाने में बैठे थे, उसी दौरान बुलडोजर लाया गया और दुकान को गिरा दिया गया। अवनीश के भाई ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाने की कोशिश की तो आरोपियों ने उनके मोबाइल भी छीन लिए। बताया जा रहा है कि गल्ले में करीब डेढ़ लाख रुपये भी रखे थे जो दुकान के मलबे के साथ गायब हो गए।

पुलिस आयुक्त के आदेश के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

दोपहर करीब 12 बजे यह मामला पुलिस आयुक्त तक पहुंचा। उनके निर्देश के बाद थाना एत्मादुद्दौला में विवेक कुमार और अन्य तीन लोगों-पृथ्वी सिंह, पवन चौधरी और सलोनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन धाराएं बेहद सामान्य लगाई गई हैं-मारपीट, गाली-गलौज और चोरी जैसी, जो इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नाकाफी मानी जा रही हैं।

घटना स्थल से मात्र 150 मीटर दूर ट्रांस यमुना पुलिस चौकी है, लेकिन वहां से कोई पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। 112 पर सूचना देने के बावजूद भी तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इंस्पेक्टर देवेंद्र दुबे ने चौकी प्रभारी धनंजय सिंह पर लापरवाही की बात मानते हुए उनके खिलाफ रिपोर्ट भेजने की बात कही है।

पूर्व इतिहास भी आया सामने

पीड़ित अवनीश मिश्रा ने बताया कि आरोपी विवेक कुमार का भाई अमित जाट अलीगढ़ जेल जा चुका है और उस पर गंभीर आरोप हैं। दीपावली के समय ट्रांस यमुना चौकी प्रभारी के खिलाफ एफआईआर भी करवा चुका है। ऐसे में अवनीश ने पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि शायद इसी वजह से मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और आरोपियों को खुली छूट दी गई।

पूरा मामला अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है। एक तरफ जहां पीड़ित अपने कारोबार के नुकसान और मानसिक आघात से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर लोगों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अब किसी को रातों-रात दुकान से निकाल देना इतना आसान हो गया है?

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