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भारत-पाक युद्ध के दौरान गायब लेफ्टिनेंट के इंतजार में 48 साल से परिवार, अभिनंदन की वापसी से जगी आस

Agra news, आगरा। वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन के वतन वापसी के बाद आगरा के एक परिवार की भी उम्मीद जागी है। इंडियन एयर फोर्स के खेरिया एयरबेस पर तैनात फ्लाइट लेफ्टिनेंट मनोहर पुरोहित भारत पाकिस्तान के युद्ध में पकड़ लिए गए थे। वह 10 दिसंबर 1971 को ब्रिटिश द्वारा बनाए गए कैनबरा बॉम्बर जहाज लेकर अपने दो साथियों के साथ पाकिस्तान की तरफ बॉर्डर से 150 किलोमीटर दूर गए थे। वहां से लौटते समय राजस्थान की भारतीय सीमा के पास उनके जहाज को गोली लग गई थी, उन्हें मरा हुआ मान लिया गया था। आगरा में रह रहा उनका परिवार पिछल 48 साल से उनका इंतजार कर रहा है।

अभिनंदन की वापसी के बाद जगी उम्मीद

अभिनंदन की वापसी के बाद जगी उम्मीद

1971 के दौरान भारत सरकार ने घोषणा की थी 54 अधिकारियों और सैनिकों को पाकिस्तान में पकड़ लिया गया है या वो गायब हैं। इन 54 लोगों में मनोहर पुरोहित का नाम भी शामिल था। अब परिवार के लोगों को उम्मीद जागी है कि जैसे विंग कमांडर अभिनंदन को वतन वापस लाया गया वैसे ही मनोहर पुरोहित को भी वापस लाया जाएगा।

48 साल से पति की वापसी का इंतजार

48 साल से पति की वापसी का इंतजार

मनोहर पुरोहित की पत्नी सुमन पुरोहित 48 साल से पति विंग कमांडर मनोहर पुरोहित की वापसी का इंतजार कर रही हैं। सुमन ने बताया, ''बेटे विपुल ने उन्हें ठीक से पहचाना भी नहीं था, वह महज 3 महीने का था। बेटा, नाती के साथ मिलकर पति की वतन वापसी के लिए लगातार रक्षा मंत्री, विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री सहित तमाम अन्य कार्यालयों के चक्कर लगा रही हूं। पाकिस्तान की जेलों में जाकर भी उनकी तलाश की, लेकिन पति सहित अन्य अधिकारियों का कुछ भी पता नहीं चला है।''

कहीं नहीं मिले मनोहर पुरोहित

कहीं नहीं मिले मनोहर पुरोहित

सुमन पुरोहित ने बताया कि जब जुलाई 2001 में आगरा शिखर सम्मेलन में मुशर्रफ आगरा आये थे, तब भी हम लोगों ने काफी विरोध प्रदर्शन किया था। इस पर मुशर्रफ ने कहा था कि यदि ऐसा है तो पाकिस्तान की जेल में जाकर देखेंगे और हमें भी पाकिस्तान की जेलों में आकर देखने को कहा था। जून 2007 में 13 सदस्य दल के साथ पाकिस्तान गए। सभी ने कराची, लाहौर लखपत जेल सहित अन्य तमाम जिलों में जाकर पति मनोहर पुरोहित के साथ अन्य 54 भारतीय सेना अधिकारियों की तलाश की, लेकिन पाकिस्तान की जेलों में पहले से ही सभी को हटा दिया गया था। उन्होंने जो रिकॉर्ड दिखाया था वो उर्दू में था और उर्दू पढ़ने के लिए उनके पास कोई कन्वर्टर नहीं था। ऐसे में वो ये नहीं पढ़ पाए कि आखिर जो रिकॉर्ड दिखाया है उसमें लिखा क्या है।

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