अडानी हिंडनबर्ग मामला: सेबी, बैंक और छोटे निवेशक होंगे शिकार

Provided by Deutsche Welle

अडानी ग्रुप पर हिंडनबर्ग रिसर्च ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की. फर्म के मुताबिक इस रिपोर्ट को 2 साल की रिसर्च के बाद तैयार किया गया है. इस रिपोर्ट में अडानी समूह पर गैरकानूनी तरीके से अपनी कंपनी के शेयर के दाम बढ़ाने और खातों में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं. रिपोर्ट का टाइटल कहता है कि अडानी समूह के मुखिया गौतम अडानी कॉरपोरेट दुनिया की सबसे बड़ी ठगी की ओर बढ़ रहे हैं. इसके बाद अडानी ग्रुप के कई शेयरों में तेज गिरावट आई और कई निवेशकों को भारी घाटा उठाना पड़ा.

अडानी ग्रुप ने रिपोर्ट को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया गया. अडानी समूह ने हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी कर रहा है. हिंडनबर्ग रिसर्च की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड कंपनी का एफपीओ यानी फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर आने वाला है. फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर के जरिए किसी कंपनी के कुछ शेयर फिर से मार्केट में लाए जाते हैं.

कुल मिलाकर इस पूरे प्रकरण में पांच पक्ष हैं. दो मुख्य पक्ष अडानी और हिंडनबर्ग रिसर्च हैं. तीसरा पक्ष समूह शेयर बाजार नियामक सेबी है. चौथे पक्ष वो बैंक हैं, जिन्होंने अडानी को कर्ज दिया है. और पांचवें आम निवेशक.

बैंकों की चिंता बढ़ेगी अडानी एंटरप्राइजेज अपने जारी एफपीओ के जरिए 2 खरब रुपये जुटाना चाहती है. अडानी ग्रुप की ओर से कहा जा चुका है कि इससे हुई कमाई का करीब पांचवा हिस्सा अडानी ग्रुप की कंपनियों की ओर से लिए गए कर्ज को चुकाने में लगाया जाएगा. अडानी ग्रुप पर कर्ज ही एक बड़ी समस्या है.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अडानी की 5 मुख्य कंपनियों पर करीब 20 खरब रुपये का कर्ज है, जिसमें से 7 से 8 खरब रुपये का कर्ज सिर्फ बैंकों से लिया गया है. यानी कंपनी कर्ज लेकर घी पीने वाली कहावत चरितार्थ कर रही है. हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट का असर इस एफपीओ पर भी होना तय है. अगर ऐसा होता है तो बैंकों का कर्ज चुकाने में अडानी समूह को मुश्किल हो सकती है. इसे लेकर बैंक चिंता में रहेंगे.

निवेशक और सेबी उठाएंगे नुकसान इसके अलावा अगर अडानी समूह मुश्किलों में आता है तो पूरे के पूरे भारतीय शेयर बाजार पर इसका असर होना तय है. हालांकि पहले की तरह ही इस बार भी अडानी ग्रुप की कंपनियों पर लगे आरोपों का असर ज्यादा दिनों तक रहेगा, ऐसा नहीं लगता. विदेशी निवेशकों को थोड़ी चिंता हो सकती है लेकिन उनके पास भी रिसर्च की क्षमता और ज्यादा जानकारियों की उपलब्धता होती है, तो उनपर भी अडानी ग्रुप की खबरों का कुछ खास असर होगा, ऐसा नहीं लगता.

लेकिन अन्य दो पक्षों को इसका नुकसान जरूर उठाना होगा. ऐसी खबरें जब भी सामने आती हैं, भारत के स्टॉक मार्केट नियंत्रक सेबी पर कुछ सवाल जरूर खड़े होते हैं. अडानी समूह पर लगे आरोपों के बाद से अब तक सेबी ने किसी भी तरह की जांच की बात नहीं कही है. वहीं सामान्य निवेशक बड़ी कंपनी में होने वाले बदलावों से ज्यादातर अंजान होते हैं और इससे आर्थिक खामियाजा उठाते हैं.

पहले भी आई खबरों पर कुछ नहीं हुआ अडानी ग्रुप पर पिछले कुछ सालों में कई बार अनियमितता के आरोप लगे हैं. हर्षद मेहता के दौर में स्टॉक मार्केट में हुए घोटाले को सामने लाने में अहम भूमिका निभाने वाली पत्रकार सुचेता दलाल के साल 2021 में किए एक ट्वीट को भी अडानी ग्रुप की कंपनी में अनियमितताओं से जोड़ा गया था. इस ट्वीट के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में काफी गिरावट आई थी. जुलाई, 2021 में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने भी संसद में बताया था कि सेबी नियम अनुपालन के मामले में अडानी समूह की कई कंपनियों की जांच कर रहा है.

इस तरह की खबरें कुछ ही दिनों में आई गई हो जाती हैं. भारत में अडानी समूह के तेजी से बढ़ते शेयर अक्सर राष्ट्रीय गर्व का विषय रहते हैं. और विश्व के पांच सबसे धनी लोगों में शामिल होना भी गर्व का ही विषय माना जाता है. अडानी समूह भारत में कोयला, बंदरगाह, एयरपोर्ट और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे आम से लेकर खास बिजनेस तक हर जगह अपनी पहुंच रखता है. इसलिए ऐसे किसी खुलासे से कंपनी का हाल फिलहाल मुश्किल में आना नामुमकिन लगता है.

एक ओर जहां हिंडनबर्ग अपने शेयर शॉर्ट सेल करके मुनाफा कमा लेगी. वहीं अडानी के शेयर के दाम पर भी लंबे समय में कोई फर्क पड़ेगा, ऐसा नहीं लगता. लेकिन बैंक, मार्केट रेगुलेटर सेबी और सामान्य निवेशक इसका असली खामियाजा भुगतेंगे.

Source: DW

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