बसंत के एक हसीन दिन हुआ था डायनासोरों का विनाश

नई दिल्ली, 24 फरवरी। बात 6.6 करोड़ साल पहले की है. अमेरिका के नॉर्थ डकोटा राज्य में दक्षिण पश्चिमी हिस्से में एक नदी थी. बसंत का एक हसीन दिन था. कल-कल नदी में मछलियां अठखेलियां कर रही थीं. पास ही विशालकाय डायनासोर विहार में मगन थे. उसी दिन आसमान से मौत बरसी थी.
वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि जिस दिन पृथ्वी से डायनासोर खत्म हुए थे, वह बसंत का एक खूबसूरत दिन था. नॉर्थ डकोटा से मिले मछलियों के जीवाश्म के अध्ययन से यह जानकारी मिली है. ये जीवाश्म एकदम सुरक्षित मिले थे, इसलिए काफी जानकारियां मिल पाईं.
करोड़ों साल बाद भी खबर देती हैं हड्डियां
अध्ययन के मुताबिक वह पृथ्वी के इतिहास के सबसे घातक दिनों में से एक था. उस दिन मेक्सिको के युकाटान प्रायद्वीप पर एक उल्कापिंड गिरा था, जो लगभग 12 किलोमीटर चौड़ा था. इस उल्कापिंड के गिरने से विनाशकारी घटनाओं का एक सिलसिला शुरू हुआ, जो पूरी पृथ्वी पर फैल गया.
मानव जाति का विकास
वैज्ञानिकों के मुताबिक इन घटनाओं से पृथ्वी पर मौजूद कुल जीवों का लगभग तीन चौथाई नष्ट हो गए. इनमें डायनासोर भी शामिल थे. इसके साथ ही क्रेटासियस युग का अंत हुआ और स्तनधारियों को पनपने के लिए ज्यादा अनुकूल परिस्थितियां मिलीं. इन्हीं परिस्थियों ने मनुष्यजाति को अन्य जीवों पर हावी होने में मदद की.
उस जगह को टैनिस कहा जाता है, जहां उल्कापिंड गिरा था. शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि उस वक्त पूरे उत्तरी गोलार्ध में बसंत का मौसम था. यह जानकारी नॉर्थ डकोटा से मिले छह मछलियों के जीवाश्म के अध्ययन से मिली है. 3,500 किलोमीटर दूर उल्कापिंड गिरने के आधे घंटे के भीतर इन मछलियों की मौत हो गई थी.
वैज्ञानिकों ने पाया कि मछलियों पर कांच जैसे पदार्थ की बारिश हुई थी. उन्हें मछलियों के गिलफड़ों में ऐसे तीखे पदार्थों के कण मिले जो धरती के वातावरण में आकर कांच जैसा हो गया था. टैनिस में पता चला था कि उल्कांपिड गिरने के बाद पानी की एक विशाल लहर पैदा हुई जो सब कुछ बहाकर ले गई और मौजूद जीवों को जिंदा ही दफन कर दिया. टैनिस इलाके में जो डायनासोर रहते थे उनमें सबसे खतरनाक प्रजाति टिरानोसॉरस भी शामिल थी.
भनक भी नहीं लगी
स्वीडन की उपासला यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रहीं मेलनी ड्यूरिंग का एक शोध नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुआ है, जिसमें यह जानकारी दी गई है. मेलनी ड्यूरिंग बताती हैं, "उस दिन टैनिस में रहने वाला हर जीव कुछ पल में ही खत्म हो गया था. उन्हें तो भनक भी नहीं लगी थी."
डायनासोर काल में थे हाथी जैसे जीव
ड्यूरिंग के मुताबिक इस बात के कई संकेत हैं कि वह बसंत का मौसम था. जैसे कि मछलियों की हड्डियों में वृद्धि के चक्र, जो बसंत में सबसे ज्यादा वृद्धि करते हैं और बाकी महीनों में पतले हो जाते हैं. जीवाश्मों में मौजूद एक मछली के भीतर मौजूद रसायनों से इस बात के संकेत मिलते हैं कि भोजन की उपलब्धता बढ़ रही थी लेकिन अपने चरम पर नहीं थी. भोजन की उपलब्धता बसंत में बढ़ना शुरू करती है और गर्मियों में चरम पर पहुंचती है.
शोध की सह-लेखिका सोफी सांचेज उपासला यूनिवर्सिटी में सीनियर लेक्चरर हैं. वह बताती हैं, "जीवों के बचे रहने के लिए बसंत का मौसम बहुत महत्वपूर्ण होता है." वह कहती हैं कि इसी मौसम में बहुत से जीव प्रजनन करते हैं. सांचेज कहती हैं कि दक्षिणी गोलार्ध में उस वक्त पतझड़ का मौसम रहा होगा, जबकि बहुत से जीव सर्दियों की तैयारी कर रहे थे.
वीके/एए (रॉयटर्स)
Source: DW
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