जानिए कौन हैं भीम सिंह, जिन्होंने किया शहीदों का अपमान
पटना। सरहद पर पाकिस्तानी सैनिकों से मुठभेड़ के वक्त शहीद हुए बिहार रेजीमेंट के सैनिकों के शव जब पटना लाये गये, तो एक भी मंत्री नहीं पहुंचा। ऊपर से पंचायती राज मंत्री भीम सिंह ने यह कह कर शहीदों का अपमान कर दिया कि सेना में तो लोग शहीद होने ही जाते हैं।
मीडिया में भीम सिंह की जबर्दस्त तरीके से थू-थू हो रही है। तमाम लोग यह सोच रहे हैं, कि आखिर ये भीम सिंह हैं कौन? तो हम आपको सबसे पहले बता देते हैं कि ये हमारे बिहार के ऐसे पढ़े-लिखे नेता हैं, जिन्हें सरहद पर देश की रक्षा कर रहे जवानों के प्रति जरा भी दर्द नहीं। भीम सिंह गया के बेदौली गांव के निवासी हैं। इन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बीएससी, एमए, एलएलबी और फिर पीएचडी की। अपने करियर की शुरुआत इन्होंने एक शिक्षक के रूप में की। राजकीय पॉलिटेकनिक में 12 वर्षों तक अध्यापन। पटना विश्वविद्यालय सीनेट का सदस्य। सदस्य के रूप में विश्वविद्यालय से जुड़ी अनेक कमिटियों में योगदान। इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसाइटी, नई दिल्ली का आजीवन सदस्य हैं। भीम सिंह के आज के बयान से तो ऐसा ही लगता है कि अपने शिक्षण कार्य के दौरान शायद ही किसी को इन्होंने सेना में जाने के लिये प्रेरित किया होगा।
डा. भीम सिंह कहते हैं कि वो बाबा साहेब डा. भीम राव आम्बेडकर व डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों तथा जननायक कर्पूरी ठाकुर के कर्मों से प्रेरित हुए, लेकिन उनके आज के बयान से कहीं लगता है कि ऐसे महापुरुषों के विचारों का एक तिनका भी अब डा. भीम सिंह में नहीं बचा है।
छात्र राजनीति के दौरान डा. भीम सिंह प्रखर छात्र नेता एवं कर्मचारी नेता के रूप में पटना विश्वविद्यालय में मशहूर थे। इसी समय से जननायक कर्पूरी ठाकुर का सान्निध्य और लालू प्रसाद यादव, राम विलास पासवान व नीतीश कुमार के करीब आये। तत्कालीन राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी- लोकदल- की छात्र शाखा- छात्र सभा- का पहले पटना विश्वविद्यालय इकाई का महासचिव फिर बिहार प्रान्त का कार्यकारी अध्यक्ष बने। नीतीश कुमार की अध्यक्षता में युवा लोकदल बिहार का छह में से एक महासचिव बने। महासचिव के रूप में जनता दल के निर्माण में भूमिका अदा की। युवा जनता दल का प्रान्तीय महासचिव भी।













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