मॉनसून सत्र: सोनिया गांधी बिछा चुकी हैं शतरंज की बाज़ी
[नवीन निगम] मानसून सत्र में शतरंज की बाजी बिछ चुकी हैं। कांग्रेस इसे इस लोकसभा का अंतिम सत्र मानकर चल रही हैं। सोनिया ने दुर्गा शक्ति नागपाल पर पीएम को चिट्ठी इसी परिपेक्ष्य को ध्यान में रखकर लिखी है। कांग्रेस का दांव है कि यदि खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पास हो गया तो वह इसे अपनी उपलब्धि बताकर चुनाव में कूद जाएंगी और यदि अटक गया तो इस पर जनमत संग्रह के नाम पर जनता के सामने चली जाएंगी। भाजपा ने क्योंकि पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह खाद्य सुरक्षा अध्यादेश में कुछ संशोधन के साथ ही समर्थन देंगी। लेकिन कांग्रेस उन संशोधनों को नहीं मानेगी और खाद्य सुरक्षा अध्यादेश गिर पड़ेगा।
क्योंकि अध्यादेश वह पहले ही लागू कर चुकी है इसलिए यह छह महीने तक लागू रहेगा। कांग्रेस इसीलिए जानबूझकर तेलंगाना का बिल नहीं ला रही है। क्योंकि खाद्य सुरक्षा अध्यादेश के नाम पर सपा सरकार का समर्थन नहीं करेंगी और भाजपा संशोधनों पर अड़ी रहेगी ऐसी स्थिति में मनमोहन सिंह लोकसभा भंग करने की सिफारिश कर देंगे। कांग्रेस इंदिरा गांधी के समय से चली आ रही परिपाटी पर आगे बढ़ रही हैं। इंदिरा गांधी भी इसी तरह किसी एक मुद्दे पर ही चुनाव मैदान में जाती थी।

कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने सपा को उत्तेजित करने के लिए ही दुर्गा शक्तिी नागपाल के मामले तो हवा दी हैं। नहीं तो क्या सोनिया गांधी नहीं जानती थी कि इस बात को कहते ही सपा किस तरह नाराज हो जाएंगी। कांग्रेस के लिए अब तेलंगाना भी गले की फांस बन गया हैं। यदि वह तेलगाना पर बगैर बिल लाए चुनावों में चली जाती है तो वह तेलंगाना में यह कहकर वोट बटोर लेंगी कि वह तो राज्य का निर्माण कर ही रहे थे यदि सरकार न गिर जाती। दूसरी तरफ बिल न आने की बात को आंध्र प्रदेश में कांग्रेस राज्य का बंटवारा न होने के लिए मतदाताओं को लामबंद करेंगी कि यदि ज्यादा सासंद आध्र से आते है तो कांग्रेस इस विषय को ठंडे बस्ते में डाल देंगी। इस तरह वह आंध्र और तेलगाना में ज्यादा सीटें कांग्रेस को दिलाने में होड़ लगवा सकती हैं।
इसीलिए आज संसद में संसदीय राज्य मंत्री राजीव शुक्ला खाद्य सुरक्षा अध्यादेश रखेंगे, जेडीयू इस अध्यादेश में सरकार के साथ दिख रही है, हालांकि वह इस अध्यादेश में थोड़ा बदलाव चाहती है पर यदि सरकार बदलाव नहीं भी करती है तो जेडीयू सरकार के पक्ष में ही वोट करेगी, वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने खाद्य सुरक्षा विधेयक को मौजूदा स्वरुप में समर्थन देने से रविवार को इंकार किया, सपा ने यह बात आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के मुद्दे पर कांग्रेस के साथ चल रहे वाक युद्ध के बीच कही। संसद के मॉनसून सत्र की पूर्व संध्या पर सपा नेता नरेश अग्रवाल ने स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा स्वरुप में यह विधेयक उनकी पार्टी को स्वीकार्य नहीं है और उसमें कुछ संशोधनों की जरुरत है और अगर जरुरत पड़ी तो पार्टी उसके खिलाफ मतदान करेगी। इस तरह यह लगभग तय हैं कि विधेयक गिर जाएगा और कांग्रेस गरीबों के नाम पर चुनाव में कूद पड़ेगी।












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